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PU में इलेक्शन को लेकर गहमागहमी, इसी बीच उठा सवाल- क्या विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव जरूरी हैं?

पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की जरूरत पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं. छात्र ही सवाल पूछने लगे हैं. पढ़ें खबर

PATNA UNIVERSITY ELECTION
पटना विश्वविद्यालय (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 11, 2026 at 3:20 PM IST

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पटना : पटना विश्वविद्यालय में 28 फरवरी को छात्र संघ चुनाव होने जा रहा है. इसके लिए 11 फरवरी यानी आज से नामांकन फॉर्म की बिक्री भी शुरू हो गयी है. इस चुनाव में लगभग 20000 के करीब छात्र हिस्सा लेंगे. इन सब के बीच एक तरफ विश्वविद्यालय में परीक्षा फॉर्म भरे जा रहे हैं तो दूसरी ओर चुनाव की घोषणा ने कैंपस में नई बहस छेड़ दी है. सवाल उठने लगे हैं कि बिहार के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की मौजूदा समय में जरूरत क्यों है और इसका छात्रों के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

छात्रों की राय अलग : छात्रों के बीच इस मुद्दे पर राय बंटी हुई है. कुछ छात्र मानते हैं कि सामाजिक लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देश में छात्र संघ चुनाव जरूरी हैं. जबकि कई छात्रों का कहना है कि वर्तमान समय में छात्र संघ छात्रों के वास्तविक हितों की राजनीति नहीं कर रहा है. ऐसे में चुनाव का औचित्य नहीं रह जाता. उनका कहना है कि छात्र संघ अब पढ़ाई, परीक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों से हटकर केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा का जरिया बन गया है.

जानकार और छात्रों की प्रतिक्रिया (ETV Bharat)

'पीयू में छात्र संघ की जरूरत नहीं' : पटना कॉलेज के स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र मोहम्मद अब्बास ने कहा कि छात्र संघ चुनाव होने चाहिए, लेकिन पटना विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में मौजूदा हालात में इन्हें नहीं कराया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि वे थर्ड ईयर में हैं और उनकी इच्छा है कि जून तक उनका फाइनल एग्जाम और रिजल्ट मिल जाए, क्योंकि उन्होंने कैट की परीक्षा दी है और सीयूईटी के लिए आवेदन किया है.

छात्र संघ छात्रों की राजनीति नहीं कर रहा : मोहम्मद अब्बास ने आरोप लगाया कि छात्रों को कॉलेज प्रशासन पर समय पर परीक्षा कराने का दबाव बनाना चाहिए था, लेकिन छात्र संघ से जुड़े लोग बीते दिनों कैंपस में चुनाव की घोषणा को लेकर अनशन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक फिफ्थ सेमेस्टर के एग्जामिनेशन फॉर्म तक नहीं भरे गए हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है.

''छात्र संघ के लोग कॉलेज में छात्रों की समस्याओं की राजनीति करने के बजाय अपनी भविष्य की राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हैं. छात्र संघ चुनाव इसलिए जरूरी हैं ताकि छात्रों की आवाज कॉलेज प्रबंधन तक पहुंचे, लेकिन फिलहाल यह भूमिका पटना यूनिवर्सिटी में सही तरीके से निभाई नहीं जा रही है.''- मोहम्मद अब्बास, छात्र, पटना कॉलेज

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मोहम्मद अब्बास, छात्र, पटना कॉलेज (ETV Bharat)

छात्र संघ है जरूरी? : पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अंशुमान ने छात्र संघ चुनाव को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव लड़ने से उन्हें ऐसा अनुभव मिला, जिसने आगे चलकर पटना सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में रणनीति बनाने और जीत हासिल करने में मदद की.

''विश्वविद्यालय में ही यह समझ आ गया था कि लोगों से संवाद कैसे करना है और संगठन को कैसे मजबूत करना है. लोगों को साथ जोड़ने के लिए क्या किया जाता है यह सब कुछ छात्र संघ चुनाव के दौरान सीखा था.''- अंशुमान, पूर्व उपाध्यक्ष, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ

चुनाव में बढ़ रहा धनबल का बोलबाला : अंशुमान ने कहा कि छात्र संघ चुनाव भविष्य में किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज राजनीति में धनबल का प्रभाव बढ़ गया है और छात्र संघ से निकलने वाले नेता संसदीय राजनीति में आसानी से जगह नहीं बना पा रहे हैं.

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अंशुमान, पूर्व उपाध्यक्ष, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ (ETV Bharat)

''छात्र राजनीति से निकले नेताओं और धनबल से जीतने वाले नेताओं के वक्तव्यों में फर्क साफ दिखाई देता है. आज सदन में कुछ ही छात्र राजनीति वाले नेता बचे हैं. छात्र संघ से निकले नेता जनता के मुद्दों को बेहतर ढंग से समझते और उठाते हैं, जबकि दूसरे लोग उतनी प्रभावी बात नहीं रख पाते. परीक्षा के समय चुनाव कराना छात्रों की परेशानी बढ़ा सकता है और इससे फिलहाल कोई बड़ा फायदा नहीं होगा.''- अंशुमान, पूर्व उपाध्यक्ष, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ

'राजनीतिक संवेदनशीलता विकसित होती है' : इस मुद्दे पर शिक्षाविद और एएन सिन्हा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के सामाजिक विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि बिहार और भारत के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि समाज में सामाजिक जीवन जीने की समझ भी देता है.

''सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता केवल पाठ्यक्रम से विकसित नहीं होती, इसके लिए छात्र संघ जैसी गतिविधियां जरूरी हैं. छात्र संघ को कोई विशेष प्रशासनिक शक्ति नहीं होती, लेकिन इसके माध्यम से छात्र लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली को समझते हैं.''- डॉ. राकेश तिवारी, सामाजिक विज्ञान के प्राध्यापक

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डॉ. राकेश तिवारी, सामाजिक विज्ञान के प्राध्यापक (ETV Bharat)

'दूसरे के लिए स्टैंड लेने का साहस आता है' : डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि छात्र संघ चुनाव से छात्र अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर राय बनाते हैं और उन पर बहस करते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व का विकास होता है. देश दुनिया में चल रहे मुद्दों पर समझ विकसित होती है.

''छात्र संघ नेतृत्व क्षमता विकसित करता है और दूसरों के लिए स्टैंड लेने का साहस देता है. छात्र संघ चुनाव एक तरह से भविष्य के जीवन की मॉक ड्रिल होते हैं. यहां छात्र एक वोट का महत्व समझते हैं और अपने अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होते हैं.''- डॉ. राकेश तिवारी, सामाजिक विज्ञान के प्राध्यापक

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