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हरियाणा में आखिर क्यों फेल हो रहे पेयजल के सैंपल, दूषित पानी से कब मिलेगी लोगों को मुक्ति ?

हरियाणा में नलों से सप्लाई की जा रही पानी की गुणवत्ता कई जगह खराब मिली है.

Quality of water supplied through taps in Haryana is poor in several places Ranbeer Gangwa
हरियाणा में आखिर क्यों फेल हो रहे पेयजल के सैंपल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 20, 2026 at 8:42 PM IST

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Updated : August 20, 2026 at 8:54 PM IST

6 Min Read
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चंडीगढ़ : जल ही जीवन है, ये कहावत हम हमेशा से सुनते आए हैं. इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि बिना जल सृष्टि की कल्पना करना नामुमकिन है. वहीं स्वच्छ जल या पेय जल अगर शुद्ध ना हो तो इंसान के लिए जीवन आसान नहीं होता. सरकारें लगातार कोशिशें कर रही है कि लोगों को शुद्ध जल हर हाल में मिले, लेकिन इसके लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी दिखाई देते हैं, क्योंकि जो जल लोगों को पीने को मिल रहा है उसमें कई ऐसे रासायनिक तत्व भारी मात्रा में रहते हैं जो इंसान के शरीर पर विपरीत असर डालते हैं.

पानी का हर 11वां सैंपल फेल : हरियाणा में जल जीवन मिशन के तहत 'हर घर नल से जल' पहुंचाने की सरकार की योजना काम कर रही है. लेकिन धरातल पर इस योजना के तहत पहुंचाए जा रहे पीने के पानी की गुणवत्ता कई जगह खराब मिली है. पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए 1 अप्रैल से 19 जुलाई तक मुहिम चलाई गई, जिसके तहत पानी के 19 हजार से अधिक सैंपल लेकर जांच की गई. बड़ी बात ये है कि इनमें से करीब 1700 सैंपल फेल हो गए. यानी करीब हर 11वां सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गया. बड़ी बात यह है कि इसमें 855 गांवों में पेयजल में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया.

ई कोलाई बैक्टीरिया क्या होता है? : पानी में पर जाने वाले ई कोलाई जीवाणु या बैक्टीरिया पाए जाने का मतलब यह हुआ कि उस पानी में इंसानों या जानवरों का मल मिल गया है, जिसकी वजह से पेट से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है.

हरियाणा में आखिर क्यों फेल हो रहे पेयजल के सैंपल (ETV Bharat)

ई कोलाई बैक्टीरिया पानी में मिलने पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ? : पानी के जो सैंपल लिए गए उसमें ई कोलाई जीवाणु कैसे मिला होगा, इसको लेकर एनके कटारा( रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ) कहते हैं कि जब पीने की पाइप लाइन में लीकेज हो तो यह समस्या आती है. लीकेज की वजह से नालों या सीवरेज का पानी उसमें मिल जाता है, जिसकी वजह से इस तरह का जीवाणु उसमें पाया जाता है.

पानी की जांच में और क्या पाया गया? : इतना ही नहीं जो पानी के सैंपल लिए गए थे, उसमें से करीब ढाई सौ गांवों में पीने के पानी में रासायनिक प्रदूषण पाया गया जिसमें टीडीएस, फ्लोराइड और टोटल हार्डनेस अधिक मात्रा में पाया गया जिसके पीछे भूजल की गुणवत्ता वजह मानी जा रही है. पानी में रासायनिक प्रदूषण से पलवल सबसे अधिक प्रभावित है. यहां टीडीएस व हार्डनेस दोनों सबसे अधिक मिले हैं.

क्या कहते हैं पानी में रासायनिक प्रदूषण पर जानकार ? : इसको लेकर एनके कटारा( रिटायर्ड चीफ इंजीनियर ) कहते हैं कि इस तरह की स्थिति ज्यादातर भूजल के प्रदूषित होने से होती है. जब पानी का स्तर काफी नीचे चला जाता है तो उससे पानी में इस तरह के रसायन मिलने का खतरा बना रहता है.

दूषित जल पीने से क्या हो सकता है खतरा ? : प्रदूषित जल से कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है. इसको लेकर डॉक्टर आशीष शर्मा कहते हैं कि
पानी में होने वाले रासायनिक प्रदूषण से कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है. वे कहते हैं कि दूषित जल से लोगों की पाचन क्षमता प्रभावित होती है, वहीं इससे किडनी की पथरी के साथ साथ हड्डियों से जुड़ी बीमारियां और दांतों पर भी इसका असर होता है.

हर 11वां सैंपल फेल, क्या कहते हैं संबंधित मंत्री ? : हरियाणा में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर जब संबंधित मंत्री रणबीर गंगवा से सवाल किया गया कि करीब 19 हजार पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें से 1,698 सैंपल फेल पाए गए. यानी लगभग हर 11वां सैंपल गुणवत्ता की जांच में खरा नहीं उतरा. करीब 855 गांवों की जल आपूर्ति प्रणालियों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने की जानकारी सामने आई है. कुछ स्थानों पर सीवरेज का पानी पेयजल में मिल जाने की शिकायतें भी मिली हैं. इसको लेकर जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि रिपोर्ट सही है. हमारा नारा है कि हर घर में नल, हर घर स्वच्छ जल, प्रधानमंत्री के आदेश से हमारा विभाग उसको साकार कर रहा है. हम दो तरह से पानी देते हैं एक तो नहर आधारित, दूसरा ट्यूबवेल आधारित. हमारे पास दो तरह की समस्याएं भी सामने आई है एक तो ट्यूबवेल है, जहां डार्क जोन है, जहां पानी ज्यादा नीचे चला गया है, वहां इस तरह की शिकायत आती है.

स्वच्छ पेयजल देने की कोशिश : वे कहते हैं इसके लिए हम समय समय पर सैंपल लेते हैं, जहां पर भी ज्यादा टीडीएस पाया जाता है, वहां हम नहर आधारित ज्यादा पानी देने की कोशिश करते हैं या फिर जहां पानी अच्छा होता है वहां पर ट्यूबवेल को स्थानांतरित करते हैं ताकि लोगों को स्वच्छ जल मिलता रहे. ये जो सैंपल लिए गए थे वे हमारे 23 जिलों में लिए गए थे. सभी जगह हमारी लेबोरेट्री बनी हुई है जिसके जरिए हम लगातार पानी के सैंपल लेते रहते हैं ताकि लोगों को स्वच्छ जल मिले. उनके मुताबिक झज्जर, चरखी दादरी, भिवानी और हिसार समेत कुछ क्षेत्रों में जलस्तर ऊपर आने की वजह से पानी के टैंक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, और कई जगह नीचे का पानी पेयजल में मिल जाता है. पिछले साल खराब हुए करीब 450 टैंकों के एस्टीमेट तैयार किए जा चुके हैं. सीएम के निर्देश पर एकमुश्त फंड की व्यवस्था कर इन टैंकों की मरम्मत करवाई जा रही है, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके.

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Last Updated : August 20, 2026 at 8:54 PM IST