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बनारस में PWD तोड़ेगा 187 मकान, पैसा भी देगा; फिर भी मुआवजा लेने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा

प्रशासन ने 44000 रुपए प्रति वर्ग मीटर रेट निर्धारित करते हुए सर्किल रेट का दोगुना यानी 88000 मुआवजा देने का ऐलान कर दिया है.

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बनारस की दालमंडी, जहां चलने वाला है बुलडोजर. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : October 15, 2025 at 10:55 AM IST

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वाराणसी: बनारस के दालमंडी इलाके से विश्वनाथ धाम तक पीडब्ल्यूडी एक नया रास्ता बनाएगा. माना जा रहा है कि काम शुरू होने से ठीक 8 महीने बाद ये रास्ता तैयार हो जाएगा. पीडब्ल्यूडी ने पूरा रोड मैप तैयार कर लिया है. इसके लिए दालमंडी के 187 मकान तोड़े जाएंगे.

इसके लिए पीडब्ल्यूडी मुआवजा भी देगा. लोगों को कागजात जमा करने और मुआवजा राशि लेने का समय 17 अक्टूबर निर्धारित किया गया है. लेकिन, अब तक लोग अपने कागजात लेकर पहुंचे ही नहीं हैं. 187 में से कुछ हैं, जिन्होंने इंटरेस्ट दिखाया है, जबकि बाकी अब भी शांत बैठे हैं.

प्रशासन ने 44000 रुपए प्रति वर्ग मीटर रेट निर्धारित करते हुए सर्किल रेट का दोगुना यानी 88000 मुआवजा जमीन की उपलब्धता के अनुसार देने का ऐलान कर दिया है. जिसके बाद भी लोग पहुंच नहीं रहे हैं. सबसे बड़ी बात यह है की जांच में कई शत्रु संपत्तियां भी मिली हैं.

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि लोग खुद से नहीं आए तो शासन के आदेश पर अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी. दरअसल दालमंडी में चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. डॉक्यूमेंट की जांच करने और मुआवजे की प्रक्रिया के लिए चौक थाने में पीडब्ल्यूडी का कैम्प कार्यालय खुल चुका है.

जिन 187 भवन स्वामियों को नोटिस गया है, उनको आपसी सहमति से बैनामा कराने के लिए प्रशासन ने आमंत्रित किया है. जिसके बाद दालमंडी के लोगों ने अब प्रशासन से सम्पर्क स्थापित करना शुरू कर दिया है. फिलहाल 44000 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से सर्किल रेट तय हुआ है और मुआवजा सर्किल रेट का दोगुना तय किया गया है. तो दालमंडी में मुआवजे की रकम 88000 रुपए प्रति वर्ग मीटर तय की गई है.

पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह का कहना है कि दालमंडी में आपसी सहमति के आधार पर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 2015 के शासनादेश के आधार पर ये प्रक्रिया शुरू हुई है. वाराणसी में पिछले 5 साल में इसी आधार पर मुआवजा दिया गया है.

2015 का शासनादेश कहता है कि प्रोजेक्ट के अधिग्रहण के छह महीने पहले समतुल्य भूमि के रेट, सर्किल रेट जो भी ग्रेटर होगा शहरी क्षेत्र में उसका दोगुना जबकि ग्रामीण क्षेत्र में उसका चार गुना मुआवजा तय किया जाएगा.

10 करोड़ तक की कीमत वाली भूमि के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में समिति और दस करोड़ से ऊपर की कीमत वाली भूमि के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति मुआवजा देने के मामले देखेगी.

यदि कोई भी व्यक्ति, भवन स्वामी इस शासनादेश के तहत अपनी प्रॉपर्टी देने पर सहमत नहीं होता तो फिर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत उसकी भूमि, प्रॉपर्टी अधिग्रहित करने का विधान है. आपसी सहमति के लिए 2015 का शासनादेश इसी उद्देश्य से लाया गया था कि लिबरल तरीके से भू स्वामी, भवन स्वामी को संतुष्ट किया जा सके जबकि 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून इसकी तुलना में जटिल है.

उन्होंने बताया कि अभिलेख की जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक समिति होगी जबकि मुआवजा देने के लिए एडीएम फाइनेंस एवं रेवेन्यू की अध्यक्षता में दूसरी समिति होगी. पीडब्ल्यूडी के अधिकारी दोनों ही समिति को असिस्ट करेंगे.

मुआवजे के लिए कोई नहीं आया: अधिशासी अभियंता के कहना है कि हम आपकी समझौते के आधार पर मुआवजा देने के लिए तैयार हैं और लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं लेकिन लोग इसमें इंटरेस्ट कम दिखा रहे हैं. नोटिस जारी किए हुए 4 दिन हो चुके हैं लेकिन अब तक 10 लोग भी मुआवजे के लिए डॉक्यूमेंट लेकर नहीं पहुंचे हैं, जो कहीं ना कहीं से निराशाजनक है.

6 मस्जिद, 2 मंदिर भी टूटेंगे: उन्होंने कहा कि यदि लोग खुद से नहीं आते हैं तो हमें ना चाहते हुए भी भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीनों के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू करनी होगी. अब तक की जांच में 187 संपत्तियां मिली हैं जिसमें 6 मस्जिद-मजार और 2 मंदिर के ट्रस्ट की प्रॉपर्टी भी सामने आई है. इसके अलावा अब तक दो शत्रु संपत्तियां मिली है जिनको लेकर भी जांच की जा रही है.

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लिए हुआ था 314 संपत्तियों का अधिग्रहण: श्रीकाशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के लिए 314 सम्पत्तियों का अधिग्रहण किया गया था. मुआवजे के रूप में 390 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इसमें 1400 किरायेदारों, वेंडरों और दुकानदारों के पुर्नवास पर हुआ खर्च भी शामिल है. मुआवजे की रकम 25000 से 45000 रुपए प्रति मीटर की दर से दी गई थी.

प्रोजेक्ट पर आएगा 225 करोड़ रुपए का खर्च: दालमंडी प्रोजेक्ट नई सड़क को चौक थाने से विश्वनाथ धाम को जाने वाली सड़क से जोड़ने का प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 225 करोड़ खर्च आना है, जिसमें 191 करोड़ मुआवजे पर खर्च होना है. 600 मीटर लम्बी सड़क को 17.4 मीटर चौड़ा करना है.

दालमंडी का ले-आउट जारी: दालमंडी का जो लेआउट सामने आया है, उसमें मुख्य सड़क दस मीटर चौड़ी होगी जबकि दोनों तरफ सीएनसी रेलिंग होगी. सड़क के दाहिने और बाईं तरफ 3.2 मीटर का फुटपाथ होगा. जिसके नीचे डक आउट (सीवेज, टेलिकॉम, पीएनजी पाइप लाइन, इलेक्ट्रिसिटी वायर) होगा. दालमंडी की सड़क पूर्वांचल की सबसे आदर्श सड़क होगी. जिसके दोनों ओर काशी की संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान से जुड़े चिह्न दिखाई देंगे.

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