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30 या 31 जानें कब मनाई जाएगी पुत्रदा एकादशी, पुत्र प्राप्ति और धन-वैभव के लिए करें ये खास उपाय, छप्पर फाड़कर बरसेगा धन

साल 2025 की आखिरी एकादशी, पुत्रदा एकादशी के पूजन का सही समय और व्रत के नियम इस रिपोर्ट में विस्तार से जानें.

पुत्रदा एकादशी
पुत्रदा एकादशी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : December 26, 2025 at 7:44 AM IST

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करनाल: सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है. इसमें हिंदू वर्ष का पौष महीना चल रहा है. पौष महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है. इस एकादशी पर विशेष तौर पर पुत्र प्राप्ति और संतान प्राप्ति के लिए पूजा अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है. भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. जिसे सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है.

कब है पुत्रदा एकादशी: पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि "साल में 12 महीने में 24 एकादशी होती हैं. पौष महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस बार हिंदू पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी की शुरुआत 30 दिसंबर को सुबह 7:50 पर होगी. जबकि इसका समापन अगले दिन 31 दिसंबर को 10:12 पर होगा. सनातन धर्म में प्रत्येक व्रत और त्योहार को उदय तिथि के साथ मनाया जाता है. इसलिए पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर के दिन रखा जाएगा. पूजा करने का शुभ ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:24 से लेकर 6:19 तक रहेगा. जबकि दूसरा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 से लेकर 12:44 तक रहेगा".

पुत्रदा एकादशी का महत्व: पंडित ने बताया कि "पुत्रदा एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व होता है. यह साल की अंतिम एकादशी है. इसलिए इसका और भी ज्यादा महत्व बढ़ जाता है. जिस दंपति को संतान नहीं होती या पुत्र नहीं होता, वह पुत्र प्राप्ति और संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत करता है. विशेष तौर पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. जिस घर में सुख समृद्धि आती है और वह अपने जातक की सभी प्रकार की मनोकामना पूरी करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दिन एकादशी का व्रत करने से और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से पिछले जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिलती है".

एकादशी के व्रत का विधि विधान: पंडित ने बताया कि "एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके भगवान सूर्य देव का जल अर्पित करें. उसके उपरांत अपने घर में मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें और उनके साथ माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करें. भगवान विष्णु को पीले रंग के फल फूल वस्त्र और मिठाई अर्पित करें. जो जातक व्रत रखना चाहते हैं, वह व्रत रखने का प्रण ले. दिन में एकादशी की कथा का पाठ करें और भगवान विष्णु पुराण पढ़े. शाम के समय गरीब और जरूरतमंदों को भोजन दें और व्रत के पारण के समय अपने व्रत का पारण करें".

एकादशी के दिन करें ये विशेष उपाय: एकादशी के दिन कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख समृद्धि आती है. सभी मनोकामना पूरी होती है. इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से परिवार समृद्ध होता है. इस दिन भगवान विष्णु को केले का प्रसाद चढ़ाने से और रोटी पर घी लगाकर और गुड़ रखकर गाय को दें. ऐसा करने से धन वृद्धि होती है.

जिस इंसान के व्यापार में वृद्धि नहीं हो रही वह भगवान विष्णु को पंचामृत का अभिषेक करें. इससे उनके सभी प्रकार की बाधा दूर होगी और व्यापार में वृद्धि होगी. एकादशी के दिन तुलसी के आगे दीपक जलाएं. इससे घर में सुख समृद्धि आती है और आर्थिक संकट भी दूर होता है. एकादशी के दिन लोहे, तेल और नमक का दान नहीं करना चाहिए यह अच्छा नहीं माना जाता.

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