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बोकारो का 'कंकाल' कांड: 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड, क्या SP-DSP पर गिरेगी गाज? इंसाफ की लड़ाई में खाकी हुई शर्मसार!

बोकारो में पुष्पा हत्याकांड ने पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं. हाईकोर्ट की फटकार के बाद आरोपी को पकड़ा गया है.

Pushpa murder case
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : April 12, 2026 at 8:50 PM IST

3 Min Read
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​बोकारो : झारखंड के बोकारो से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. जिस 18 साल की मासूम के घर लौटने की उम्मीद में एक परिवार महीनों से दरवाजे पर आंखें बिछाए बैठा था, शनिवार को उसकी केवल हड्डियाँ और अवशेष बरामद हुए. यह महज एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की उस सड़न का सबूत है जिसने एक बेबस परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया.

​हाईकोर्ट की फटकार और CID की एंट्री

​यह मामला तब तक फाइलों में दबा रहा जब तक झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की सुस्ती पर कड़ा रुख नहीं अपनाया. कोर्ट की फटकार के बाद जब CID अधिकारी संध्या रानी मेहता ने खुद जांच की कमान संभाली, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. जो केस महीनों से 'लापता' की श्रेणी में था, वह अचानक एक खौफनाक हत्याकांड में तब्दील हो गया.

पुष्पा हत्याकांड ने पुलिस पर खड़े किए सवाल (Etv Bharat)

​इस मामले में पुलिस की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध रही है. आरोप है कि पीड़ित परिवार जब FIR दर्ज कराने गया, तो उन्हें प्रताड़ित किया गया और मुख्य आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई.

​बड़ी कार्रवाई: लापरवाही और संदिग्ध संलिप्तता के आरोप में 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.

रडार पर आला अफसर: सूत्रों के अनुसार, जिले के SP और DSP की भूमिका की भी गहन जांच हो रही है. गृह विभाग और CID इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि इतने महीनों तक जमीनी स्तर पर सूचनाओं को क्यों दबाया गया. क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या किसी 'पावरफुल' अपराधी को बचाने का सुनियोजित खेल?

​"मेरी बेटी मासूम थी, उसका क्या दोष था? हमें अब इस भ्रष्ट सिस्टम की हकीकत समझ आ गई है. ताकतवर लोगों के लिए हमारी जान की कोई कीमत नहीं है, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे." — मृतका की माँ

​सत्ता और सिस्टम के बीच पिसता आम आदमी

​रेत और झाड़ियों के बीच से बरामद हुए नरकंकाल ने बोकारो पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. FIR में देरी क्यों हुई? पीड़ित परिवार को ही पुलिस ने क्यों डराया? क्या रसूखदार आरोपियों के दबाव में थे अफसर?

​बोकारो की इस बेटी के अवशेषों ने पूरे झारखंड को झकझोर दिया है. 28 पुलिसकर्मियों का निलंबन तो सिर्फ शुरुआत है, असली इंसाफ तब होगा जब पर्दे के पीछे बैठे उन 'सफेदपोशों' और 'वर्दीधारियों' के चेहरों से नकाब उतरेगा जिन्होंने एक अपराधी को संरक्षण दिया.

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