ETV Bharat / state

पंजाब यूनिवर्सिटी का "ग्रास प्रिंटर" बना स्मार्ट लॉन की नई पहचान, मोबाइल ऐप से होगा कंट्रोल

पंजाब यूनिवर्सिटी के ग्रास प्रिंटर रोबोट को पेटेंट मिला है. ये प्रिंटर घास काटकर लॉन पर संदेश और डिजाइन तैयार करता है.

Punjab University Grass Printer
पंजाब यूनिवर्सिटी का "ग्रास प्रिंटर" (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Haryana Team

Published : January 9, 2026 at 9:56 AM IST

|

Updated : January 9, 2026 at 12:25 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

चंडीगढ़: हरा-भरा लॉन अब सिर्फ सुंदरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह संदेश, पहचान और ब्रांडिंग का माध्यम भी बनेगा. दरअसल, पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर द्वारा विकसित ‘ग्रास प्रिंटर’ नाम के एक अनोखे ऑटोनॉमस रोबोट को भारत सरकार से पेटेंट मिला है. इस उपलब्धि ने यूनिवर्सिटी को ऑटोमेटेड लैंडस्केपिंग और रोबोटिक्स के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है.

तकनीक का कमाल: ग्रास प्रिंटर एक स्मार्ट रोबोटिक लॉन मूवर की तरह काम करता है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि यह घास को अलग-अलग ऊंचाई पर काटकर लॉन पर अक्षर, चिन्ह और डिजाइन तैयार करता है. इन डिजाइनों में बनने वाला विज़ुअल कंट्रास्ट दूर से भी साफ दिखाई देता है. इस तकनीक की मदद से खुले मैदानों और बड़े लॉन को एक चलते-फिरते मैसेज बोर्ड में बदला जा सकता है.

"ग्रास प्रिंटर" बना स्मार्ट लॉन की नई पहचान (ETV Bharat)

मोबाइल ऐप से नियंत्रण: इस रोबोट को मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. उपयोगकर्ता ऐप में टेक्स्ट या डिजाइन डालता है और ग्रास प्रिंटर बिना ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप के अपने आप काम पूरा कर देता है. इससे समय, ऊर्जा और श्रम की बचत होती है. यह सिस्टम उन लोगों के लिए भी उपयोगी है, जिनके पास तकनीकी प्रशिक्षण नहीं है.

2018 में हुई प्रोजेक्ट की शुरुआत: डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर के प्रमुख प्रो. नवीन अग्रवाल ने बताया कि, "इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2018 में की गई थी. कोविड-19 महामारी के कारण इसमें देरी हुई, जिसके बाद 2020 में इसे पेटेंट के लिए आवेदन किया गया. इस इनोवेशन के पीछे रिसर्च टीम का सामूहिक प्रयास रहा."

Punjab University Grass Printer
पंजाब यूनिवर्सिटी का "ग्रास प्रिंटर" बना स्मार्ट लॉन की नई पहचान (ETV Bharat)

ट्रेनिंग मोड और स्मार्ट नेविगेशन: ग्रास प्रिंटर में एक खास ट्रेनिंग मोड भी शामिल है. इस मोड के जरिए रोबोट पहले क्षेत्र को मैप करता है, फिर अपने आप रास्ता तय करता है. यह ऊर्जा का सही उपयोग करता है और काम पूरा होने के बाद अपने शुरुआती स्थान पर लौट आता है. यह फीचर इसे पूरी तरह ऑटोनॉमस और स्मार्ट बनाता है.

जानें कहां-कहां होगा इस्तेमाल: प्रो. नवीन अग्रवाल के अनुसार, ग्रास प्रिंटर का उपयोग एयरपोर्ट, स्पोर्ट्स स्टेडियम, कॉर्पोरेट पार्क, पब्लिक गार्डन और यूनिवर्सिटी कैंपस जैसी जगहों पर किया जा सकता है. यहां बड़े लॉन की देखभाल के साथ-साथ ब्रांडिंग, दिशा-निर्देश या संदेश प्रदर्शित करना आसान हो जाएगा.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग ने इस पेटेंट को विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया. उन्होंने कहा कि, "यह इनोवेशन आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है. यह दिखाता है कि विश्वविद्यालयों में हो रही रिसर्च किस तरह आम जगहों को भी स्मार्ट, उपयोगी और रचनात्मक बना सकती है."

ये भी पढ़ें:पंजाब यूनिवर्सिटी में तैयार हो रहा जेन-जी पोस्ट ऑफिस, हाईटेक सुविधाओं से होगा लैस, स्टूडेंट्स को मिलेगा गेमिंग-रीडिंग और डिजिटल सर्विस

Last Updated : January 9, 2026 at 12:25 PM IST