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प्रेग्नेंसी में सर्विस खत्म करने पर हाईकोर्ट सख्त, TGT टीचर के फौरन बहाली के आदेश

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भावस्था में सेवा खत्म करने पर सख्ती दिखाते हुए टीजीटी शिक्षिका की बहाली के आदेश दिए हैं.

Punjab and Haryana High Court takes a strict view of termination of service during pregnancy orders reinstatement of TGT teacher
प्रेग्नेंसी में सर्विस खत्म करने पर हाईकोर्ट सख्त (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : July 8, 2026 at 4:22 PM IST

4 Min Read
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पंचकूला: एक संविदा शिक्षिका की सेवा गर्भावस्था के दौरान केवल चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण अवकाश मांगने पर समाप्त करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि जब अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई गई तो महज मेडिकल आधार पर अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना उचित नहीं. नतीजतन, हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर टीजीटी (विज्ञान) शिक्षिका के पक्ष में ज्वाइनिंग पत्र जारी करने और उन्हें दो सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण कराने का आदेश दिया है.

याचिकाकर्ता की मुआवजे की मांग: दरअसल, जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने ये अंतरिम आदेश एक महिला टीचर की याचिका पर पारित किया. याचिकाकर्ता ने 16 मार्च 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसके माध्यम से उनकी संविदा नियुक्ति समाप्त कर दी गई थी. उन्होंने अदालत से अपनी सेवा बहाल कराने, संविदा अवधि बढ़ाने, वेतन समेत मातृत्व अवकाश, मेडिकल बोनस व अन्य मौद्रिक लाभ, ब्याज और मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा दिलाने की मांग की है.

चिकित्सकों की नौ माह बेड रेस्ट की सलाह: याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चतरथ ने अदालत को बताया कि टीचर की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के माध्यम से सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के रूप में हुई थी. नौकरी के दौरान उन्हें गर्भावस्था संबंधी गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं हुई और चिकित्सकों ने नौ महीने तक पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने 9 अक्टूबर 2025 को मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन किया. लेकिन उस पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई. इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया, जिससे स्पष्ट है कि अवकाश की मांग वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण की गई थी.

केवल याचिकर्ता की सेवा समाप्त: अदालत को बताया गया कि एकसमान पद पर कार्यरत अन्य संविदा टीजीटी शिक्षकों की नियुक्ति अवधि बढ़ाई गई. लेकिन महज याचिकाकर्ता की सेवा ही समाप्त की गई. याचिकाकर्ता ने कहा कि जिस अवधि में वे ड्यूटी पर नहीं रही, उस अवधि का वेतन लेने की इच्छुक नहीं है. लेकिन अब पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा सेवा देने को तैयार है. साथ ही यह भी दलील दी गई कि नियमित कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलता है और उसके मेडिकल रिकॉर्ड भी उसकी स्थिति की पुष्टि करते हैं.

सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा: हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह संतोषजनक प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने मजबूरन चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण मेडिकल अवकाश मांगा था, जो अब बच्चे को जन्म दे चुकी है. यह भी प्रतीत होता है कि अन्य टीजीटी शिक्षकों की संविदा अवधि बढ़ाई गई, जबकि याचिकाकर्ता की सेवाएं समाप्त कर दी गई. जबकि उन्होंने वास्तविक चिकित्सकीय आधार पर अवकाश मांगा था. अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है.

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