सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा मामले में हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा के जमानात याचिका पर हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.

Published : February 27, 2026 at 3:44 PM IST
पंचकूला: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में आज, शुक्रवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा की जमानत मामले में सुनवाई हुई. इस दौरान की हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. हालांकि, बहस के दौरान ज्योति के वकील रविंद्र सिंह ढुल ने मामले में ज्योति के खिलाफ दर्ज एफआईआर का कोई ठोस आधार नहीं होने की बात कही.
मई 2025 से जेल में बंद आरोपी: मामले की आरोपी ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान के लिए जासूसी गतिविधियों के आरोप में मई 2025 से जेल में बंद है. आरोपी ने मामले में जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दर्ज एफआईआर के अनुसार मामला मई 2025 में इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक इनपुट रिपोर्ट से जुड़ा है. आरोप हैं कि ज्योति मल्होत्रा वर्ष 2023 में नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा आवेदन के लिए गई थी. यहां उसकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई. ज्योति पर भारत से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान करने का आरोप है. नतीजतन उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था.
खुद को बताया प्रोफेशनल ट्रैवल ब्लॉगर: दायर याचिका में ज्योति मल्होत्रा ने स्वयं को प्रोफेशनल ट्रैवल ब्लॉगर बताया और कहा है कि एक खुलेआम कैमरा लेकर कंटेंट शूट करती है, जिसे सार्वजनिक मंच पर अपलोड करती है. लेकिन इसे ‘जासूस’ बताना “अंतर्निहित रूप से अविश्वसनीय और निराधार” है. बचाव पक्ष की दलील है कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की आवश्यक शर्तें जैसे-प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करना, स्केच या मॉडल तैयार करना, किसी भी प्रकार से पूरी नहीं होती. ज्योति के वकील ने हिसार एसपी शशांक कुमार सवान के कथित सार्वजनिक बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ज्योति के पास किसी सैन्य संवेदनशील या रणनीतिक जानकारी तक पहुच नहीं पाई गई.
बीएनएस की धारा 152 लागू करना गलत: याचिका में कहा गया कि मामले में बीएनएस की धारा 152 को लागू करना गलत है, क्योंकि कथित मुलाकात वर्ष 2023 में हुई थी, जबकि न्याय दंड संहिता बाद में लागू हुई. वहीं, पुरानी धारा राजद्रोह (124 ए) की कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले ही स्थगित की जा चुकी है. इसके अलावा जांच रिकार्ड में ऐसे कोई फोन कॉल या मैसेज उपलब्ध नहीं हैं, जो ज्योति के मोबाइल नंबर और पाकिस्तानी अधिकारी के नंबर के बीच किसी संपर्क की पुष्टि करें.
परिवार की देखभाल का भी हवाला दिया: गौरतलब है कि आरोपी ज्योति मई 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं. आरोपी की जमानत याचिका में परिजनों की देखभाल का हवाला भी दिया गया है. कहा गया है कि वह एक महिला है और बुजुर्ग पिता और बीमार ताऊ की एकमात्र देखभालकर्ता है. कहा कि दोनों के उम्र संबंधी कई बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हैं.

