नहीं चल पाई भाजपा कार्यकर्ता सुनवाई, पार्टी कारण भी नहीं बता पाई, क्या इसी में है सबकी भलाई...
भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की सुनवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है.

Published : December 22, 2025 at 10:38 AM IST
|Updated : December 22, 2025 at 2:24 PM IST
जयपुर : भाजपा मुख्यालय पर होने वाली जनसुनवाई मात्र 5 दिन भी पूरी नहीं चल पाई और एक बार फिर यह जनसुनवाई पर ब्रेक लग गया है. पार्टी की तरफ से सरकार के दो साल के कार्यक्रम में मंत्रियों की व्यवस्था के बीच सुनवाई को स्थगित किया गया, लेकिन जिस तरह से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित के आदेश जारी हुए, इससे सत्ता और संगठन के बीच तालमेल पर सवाल उठे हैं. प्रदेश की भजनलाल सरकार बनने के 2 साल बाद पार्टी कार्यालय में दो बार जनसुनवाई का दौर शुरू हुआ, लेकिन दोनों बार मात्र चंद दिन ही ये सुनवाई का सिलसिला चल पाया.
सुनवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित : भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की सुनवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है. सुनवाई करने वाले मंत्रियों के सरकार के दो साल पर हो रहे कार्यक्रमों व सेवा पखवाड़ा में व्यस्त होने का बहाना कर सुनवाई को बंद कर दिया गया है, जबकि कार्यकर्ताओं की सुनवाई दो सप्ताह में केवल 5 दिन ही हो पाई थी. कार्यकर्ताओं की अंतिम सुनवाई 9 दिसंबर को कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, भाजपा महामंत्री श्रवण में सिंह बगड़ी ने की थी. इसके बाद पहले प्रवासी राजस्थानी दिवस समारोह के बहाने 21 दिसंबर तक सुनवाई के कार्यक्रम को स्थगित किया था, लेकिन 21 दिसंबर को प्रदेश कार्यालय प्रभारी मुकेश पारीक की जानकारी दी गई कि सरकार के दो साल पूरे होने और सेवा पखवाड़ा में मंत्रियों की व्यस्तता की वजह से कार्यकर्ता सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है.
पहले भी चार दिन चली थी सुनवाई : भजनलाल सरकार बनने के बाद भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने बीजेपी मुख्यालय में कार्यकर्ता सुनवाई कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन मंत्रियों ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी. प्रदेश कार्यालय में जनसुनवाई शुरू तो हुई, लेकिन मंत्री शामिल नहीं हुए. ऐसे में महज चार दिन बाद ही यह सुनवाई बंद हो गई थी. इसके बाद मदन राठौड़ प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी इसी तरह से पार्टी कार्यालय पर जनसुनवाई शुरू करने का कार्यक्रम से हुआ, लेकिन इस बार भी सरकार ने अपने किसी भी मंत्री को जनसुनवाई में नहीं भेजा मंत्रियों की गैर मौजूदगी में जनसुनवाई के सार्थक परिणाम सामने नहीं आने पर संगठन ने से फिर से बंद करने का निर्णय लिया था.
हालांकि, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बागड़ी, विधायक जितेंद्र गोठवाल, स्वयं प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ सहित कुछ पदाधिकारी पार्टी कार्यालय पर आने वाले कार्यकर्ताओं और आमजन की समस्याओं को सुनते थे. साथ ही उसके समाधान के लिए आवश्यक दिशा संदेश भी देते हैं, लेकिन जो समस्याओं का असर मंत्रियों के निर्देश पर होना चाहिए वह संगठन के पदाधिकारी पर नहीं होने से कार्यकर्ता और आमजन में असंतोष बन रहा था. अब मंत्रियों की मौजूदगी के सुनवाई के दौर चला, लेकिन महज 5 दिन में फिर ब्रेक लग गया. ऐसे में अब सरकार व संगठन के बीच तालमेल पर सवाल उठ रहे हैं.
पढ़ें. विवाद में भाजपा की 'जनसुनवाई': आम लोगों के लिए नो एंट्री, सिर्फ कार्यकर्ताओं की सुनी जाएगी बात
महीने के पहले सप्ताह में इन मंत्रियों को करनी थी जनसुनवाई :
- सोमवार को डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा और पंचायती राज्य मंत्री ओटाराम देवासी.
- मंगलवार को उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और जनजाति क्षेत्रीय मंत्री बाबूलाल खराड़ी.
- बुधवार को चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मंजू बाघमार.
महीने के दूसरे सप्ताह में इन मंत्रियों को करनी थी जनसुनवाई :
- सोमवार को उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और यूडीएच मंत्री जवाहर सिंह खर्रा.
- मंगलवार को कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर.
- बुधवार को पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और उद्योग राज्य मंत्री केके बिश्नोई.
महीने के तीसरे सप्ताह में इन मंत्रियों को करनी थी जनसुनवाई :
- सोमवार को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गौतम दक.
- मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और वन मंत्री संजय शर्मा.
- बुधवार को पीएचडी मंत्री संजय सिंह रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम.
महीने के चौथे सप्ताह में इन मंत्रियों को करनी थी जनसुनवाई :
- सोमवार को सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत और राज्य विजय सिंह चौधरी.
- मंगलवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा और राजस्व मंत्री हेमंत मीणा.
- बुधवार को पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग.
सप्ताह में 3 दिन होनी थी सुनवाई : भजनलाल सरकार के 2 साल पूरे होने के बाद एक दिसंबर से कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और उनकी आवश्यकताओं को समझते हुए प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ता सुनवाई शुरू की. सप्ताह में तीन दिन दो मंत्रियों और पदाधिकारियों की ओर से कार्यकर्ता सुनवाई होनी थी. परिवाद के पंजीयन के बाद संबंधित मंत्री को भेजा जाना था, ताकि कार्यकर्ता की अनुशंसा पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके. कार्यकर्ताओं की ओर से सुनवाई में दिए गई परिवादों का फीडबैक नहीं मिलने को लेकर असंतोष जताया जा रहा था. बताया जा रहा है कि ऐसे में पंचायत व नगर निकायों को देखते हुए सुनवाई को स्थगित करने का फैसला लिया गया.
क्या होता है जनसुनवाई में : जनसुनवाई का मुख्य लाभ यह है कि यह नागरिकों को अपनी समस्याओं और शिकायतों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का एक मंच प्रदान करता है, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है. इससे नागरिकों को उनके मुद्दों का समयबद्ध समाधान प्राप्त करने में मदद मिलती है और सरकार को अपनी नीतियों और योजनाओं में सुधार करने का अवसर मिलता है. कई बार आम नागरिक मुख्यमंत्री कार्यालय और मंत्रियों के बंगलों पर होने वाली जनसुनवाई में नहीं पहुंच पाता है. ऐसे में जब पार्टी कार्यालय पर जनसुनवाई होती है तो कार्यकर्ता के साथ आम व्यक्ति भी अपनी समस्या लेकर वहां पहुंच जाता है. पार्टी कार्यालय की जनसुनवाई में पदाधिकारी के साथ मंत्रियों की मौजूदगी होती है और वह वहां से सीधे अधिकारी को फोन करके समस्या के समाधान के निर्देश देते हैं. इस तरह की जनसुनवाई से आम जनता को सीधा और त्वरित लाभ मिलता है.
पढे़ं. जनसुनवाई में बोले सीएम भजनलाल, आमजन की समस्याएं सर्वोच्च प्राथमिकता
पार्टी कार्यालय पर कब से शुरू हुई जनसुनवाई :
- वसुंधरा सरकार ने शुरू की थी पार्टी कार्यालय पर जनसुनवाई
- 2013 से 2018 के कार्यकाल में चला जनसुनवाई का दौर
- दो मंत्री, विधायक और दो पदाधिकारी रहते थे मौजूद
- सोमवार से शुक्रवार तक चलता था जनसुनवाई का दौर
- पदाधिकारियों के साथ आमजन की भी होती थी जनसुनवाई
- वसुंधरा फॉर्मूले को कांग्रेस सरकार ने भी अपनाया
- गहलोत सरकार 2018 से 2023 चला कांग्रेस दफ्तर में जनसुनवाई का दौर
- दो मंत्री और दो पार्टी के पदाधिकारी करते थे जनसुनवाई, लेकिन भजनलाल सरकार ने नहीं अपनाया फॉर्मूला
- सरकार बनने के बाद पहले तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने शुरू की जनसुनवाई
- सरकार ने नही भेजे मंत्री, जिसके चलते चार दिन में बंद हुई जनसुनवाई
- प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी जनसुनवाई शुरू, लेकिन फिर भी सरकार ने नहीं भेजे मंत्री
- लिहाजा ये जनसुनवाई भी चार दिन में बंद हुई
- इसके बाद 1 दिसंबर 2025 से फिर कार्यकर्ता सुनवाई शुरू हुई
- तीन सप्ताह भी पूरी तरह नही चल पाई और तीसरे सप्ताह दूसरे दिन के बाद से 21 दिसंबर तक स्थगित की
- अब 22 दिसंबर को फिर सुनवाई शुरू होती, लेकिन 21 दिसम्बर को पार्टी की तरफ से अनिश्चित काल के कार्यकर्ता सुनवाई स्थगित करने के आदेश जारी हुए.
कांग्रेस ने अपनाया, लेकिन भजनलाल ने नहीं : पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में लगने वाले जनता दरबार के इस फॉर्मूले को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी अपनाया गया था. चांदपोल स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार तक नियमित रूप से जनसुनवाई होती थी. इस जनता दरबार में मंत्री भी शामिल होते थे, जनता की फरियाद सुनने के बाद मंत्री सीधे अफसरों को कॉल लगाकर एक्शन लेने के निर्देश भी देते थे. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से शुरू की गई जनता दरबार की परिपाटी को भले ही कांग्रेस ने अपनाया हो, लेकिन उनकी पार्टी की सरकार उनके इस फार्मूले को सही नहीं मानती है, इसीलिए संगठन के बार-बार कहने के बावजूद मंत्रियों को जनसुनवाई के लिए पार्टी कार्यालय नहीं भेजा जाता. सत्ता और संगठन के बीच तालमेल के अभाव की खबरों के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिसंबर से सप्ताह में तीन मंत्रियों को पार्टी कार्यालय में सुनवाई के लिए निर्देशित किया. महज 5 दिन बाद फिर कार्यकर्ता सुनवाई पर ब्रेक लग गया.

