जल जंगल जमीन और अधिकारों के लिए हुंकार, सर्व आदिवासी समाज का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन
दंतेवाड़ा समेत प्रदेश के 33 जिलों में सर्व आदिवासी समाज ने अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 22, 2026 at 5:38 PM IST
दंतेवाड़ा : जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों की रक्षा को लेकर लंबे समय से सर्व आदिवासी समाज संघर्षरत है. इसी कड़ी में समाज ने सोमवार को प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन कर अपनी 15 सूत्रीय मांगों के लिए आवाज बुलंद की. दंतेवाड़ा सहित प्रदेश के सभी 33 जिलों में समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने धरना देकर महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा. समाज का कहना है कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, पारंपरिक आस्थाओं, रोजगार और भूमि सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
15 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना
धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे. प्रदर्शनकारियों ने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आदिवासी हितों से जुड़े विषयों पर अपनी मांगें रखीं.आईए आपको बताते हैं कि सर्व आदिवासी समाज की प्रमुख मांगें क्या हैं.
पेसा कानून के पूर्ण क्रियान्वयनक की मांग
सर्व आदिवासी समाज के ज्ञापन में प्रमुख रूप से पेसा कानून का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन, अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोई भी कार्य नहीं किए जाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के साथ निर्दोष आदिवासियों को कथित फर्जी मामलों से मुक्त कराने की मांग की गई है.
ठेकेदारी प्रथा का अंत समेत पांचवीं अनुसूची से संबंधित मांगें
इसके अलावा जनगणना में पृथक आदिवासी कोड लागू करने, ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने, पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, आदिवासी परंपराओं और आस्था को वैधानिक मान्यता देने तथा एनएमडीसी सहित अन्य संस्थानों में स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई.
समाज ने बैलाडीला डिपॉजिट क्रमांक-4 की जांच, समानता के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, जनसंख्या के आधार पर सीधी भर्ती में आदिवासियों को प्रतिनिधित्व देने और फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की भी मांग की है.
आदिवासियों के अधिकारों को संरक्षित करना लक्ष्य
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि आदिवासी समाज हमेशा से अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष करता आया है.उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में एक साथ धरना-प्रदर्शन कर राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया है.
अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सर्वोच्च मान्यता मिलनी चाहिए. ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का विकास, खनन या अन्य कार्य नहीं होना चाहिए. साथ ही भू-माफियाओं द्वारा आदिवासी जमीनों पर किए जा रहे कब्जों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए- सुरेश शर्मा,अध्यक्ष,सर्व आदिवासी समाज
पहाड़, जंगल और संस्कृति बचाने की लड़ाई
सर्व आदिवासी समाज के सदस्य बल्लू भवानी ने कहा कि समाज लगातार जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ता आ रहा है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा. परियोजनाओं और खनन गतिविधियों के कारण पहाड़ों और जंगलों को नुकसान पहुंच रहा है.बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है. इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.
पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के अधिकारों की रक्षा, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामलों में दोषियों पर कार्रवाई और निर्दोष आदिवासियों की रिहाई जैसे मुद्दे समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान की सुरक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए- बल्लू भवानी, सदस्य सर्व आदिवासी समाज
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन
धरना-प्रदर्शन के समापन पर सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी 15 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में प्रदेशव्यापी और व्यापक आंदोलन किया जाएगा. समाज का कहना है कि यह केवल मांगों का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व, अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है.
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