ETV Bharat / state

रावघाट माइंस नारायणपुर: बीएसपी प्रबंधन पर ग्रामीणों ने लगाई आरोपों की झड़ी, विरोध की जानिए वजह

भिलाई इस्पात संयंत्र के खिलाफ ग्रामीण लामबंद होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, प्रबंधन के खिलाफ कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर की.

Narayanpur Collectorate
रावघाट माइंस पर वादाखिलाफी का आरोप (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : March 17, 2026 at 1:29 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

नारायणपुर: भिलाई इस्पात संयंत्र यानी बीएसपी द्वारा संचालित रावघाट लौह अयस्क खनन परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है. ग्रामीणों का आरोप है, कि खनन शुरू होने के करीब 3 वर्ष बाद भी विकास के वादे पूरे नहीं किए गए. जिसकी वजह से नारायणपुर और कांकेर जिले के प्रभावित गांवों में असंतोष गहराता जा रहा है.

रावघाट माइंस के खिलाफ प्रदर्शन

सोमवार को 45 गांवों के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा. ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन के माध्यम से बीएसपी प्रबंधन पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया. ग्रामीणों का कहना है कि रावघाट माइंस परियोजना, जो नारायणपुर जिले के 22 और कांकेर जिले के 23 गांवों को प्रभावित करती है, शुरुआत से ही स्थानीय विरोध का सामना कर रही है. ग्रामीणों का कहना है कि जब यह परियोजना शुरू हुई थी, तब क्षेत्र के अधिकांश लोग इसके विरोध में थे, लेकिन महज कुछ प्रतिशत लोगों के सहयोग से खनन कार्य प्रारंभ कर दिया गया.

रावघाट माइंस पर वादाखिलाफी का आरोप (ETV Bharat)

बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलने का दावा

ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार, भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रतिनिधियों ने परियोजना शुरू करने से पहले क्षेत्र में व्यापक विकास का भरोसा दिलाया था. जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, बाल कल्याण, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर जैसे मुद्दे शामिल थे. लेकिन 3 सालों का समय बीत जाने के बावजूद इन वादों पर कोई ठोस अमल नहीं किया गया.

जब से रावघाट माइंस चालू हुआ तब से हमें कई तरह के प्रलोभन दिए गए. हमें कहा गया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और तमाम सुविधाएं आपको मिलेगी. सभी वादे इनके छलावा निकले. जितने भी आश्रित गांव है वहां पर जाकर आप व्यवस्था देख लीजिए. जितने भी गांव हैं वहां पर क्या मॉडल पेश किया गया कोई भी देख सकते हैं. 31 तारीख तक हमारी मांगों को नहीं माना जाता है तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे: गुलाब चंद बघेल, संरक्षक, बूढ़ादेव विकास समिति

बीएसपी के खिलाफ हम लोगों ने मोर्चा खोला है. अधिकारियों ने कहा था कि हमारी मांगों को सुना जाएगा और पूरा किया जाएगा. लेकिन हमारी मांगों को यहां पर अनसुना किया जा रहा है. हमारे गांव में मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए. कोई बैठक भी बीएसपी की ओर से नहीं की जा रही है. हम बंद करने पर भी विचार कर रहे हैं: शांताराम दुग्गा, कोषाअध्यक्ष, बूढ़ादेव समिति

स्कूल और अस्पताल के लिए जो वादा किया था वो वादा पूरा करना चाहिए. हमसे जो लुभावने वादे इन लोगों ने किए हैं वो पूरे होने चाहिए. हम बस इतना चाहते हैं कि जो वादा बीएसपी ने किया वो पूरा होना चाहिए: सुरेश नरोटी, परियोजना समिति का भूतपूर्व अध्यक्ष

प्रबंधन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप

प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइंस संचालन के दौरान मालवाहक वाहनों के लिए पहले 900 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय थी, जिसे अब घटाकर 400 रुपये कर दिया गया है. ग्रामीण ने इसे बीएसपी प्रबंधन का तानाशाही रवैया करार दिया. ग्रामीणों का कहना है कि उनके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. ग्रामीणों का ये भी कहना है कि ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपये की विकास राशि देने का दावा भी अब तक जमीन पर नहीं उतर पाया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह राशि वास्तव में दी गई होती, तो क्षेत्र में विकास कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते.

Narayanpur Collectorate
रावघाट माइंस पर वादाखिलाफी का आरोप (ETV Bharat)

पेड़ कटाई की अनुमति मांग रहे

कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए, भवन निर्माण की मांग पर बीएसपी द्वारा पेड़ों की कटाई की अनुमति न मिलने का हवाला दिया जा रहा है. इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब खनन के लिए सैकड़ों पेड़ काटे जा सकते हैं, तो जनहित के कार्यों के लिए यह अनुमति क्यों नहीं दी जा रही.

Narayanpur Collectorate
रावघाट माइंस पर वादाखिलाफी का आरोप (ETV Bharat)

जिला प्रशासन को ग्रामीणों ने दी चेतावनी

ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में खनन और परिवहन कार्य को बाधित करना उनकी मजबूरी होगी. रावघाट माइंस परियोजना, जो क्षेत्र के औद्योगिक विकास का प्रतीक मानी जा रही थी, अब स्थानीय असंतोष और अविश्वास का केंद्र बनती जा रही है. यदि बीएसपी प्रबंधन और प्रशासन समय रहते ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं करते, तो यह विवाद एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे न केवल खनन कार्य प्रभावित होगा बल्कि क्षेत्र की सामाजिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है.

तारोकी–रावघाट के बीच दिसंबर में चल सकती है ट्रेन, दल्लीराजहरा–रावघाट परियोजना का 97% काम पूरा, जानिए पूरे आंकड़े

नारायणपुर में रावघाट माइंस के खिलाफ ग्रामीणों का हल्ला बोल

Bastar chakkajam: बस्तर के हजारों ग्रामीणों का चक्काजाम, पुलिस कैंप और नए रोड के विरोध में खोला मोर्चा