NMDC के रवैये से नाराज आदिवासी ग्रामीणों ने डोंगरीगुड़ा रेलवे साइडिंग का काम किया बंद
बस्तर में ग्रामीणों के आंदोलन से डोंगरीगुड़ा रेलवे साइडिंग से होने वाली लौह अयस्क की ढुलाई का काम पूरी तरह ठप हो गया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 12:55 PM IST
जगदलपुर: बस्तर जिले के ग्राम मारेंगा डोंगरीगुड़ा में विकास के नाम पर वादाखिलाफी का आरोप लगा है. एनएमडीसी और स्थानीय प्रशासन के रवैये से नाराज ग्रामीणों ने पिछले चार दिनों से रेलवे साइडिंग के काम को पूरी तरह बंद कर रखा है. इस आंदोलन के कारण रेलवे साइडिंग से होने वाली लौह अयस्क की ढुलाई का काम पूरी तरह ठप हो गया है. जिससे प्रबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को जब एनएमडीसी के कुछ अधिकारी और स्थानीय प्रशासन की टीम प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंची, तो लंबी वार्ता के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.
एनएमडीसी के खिलाफ प्रदर्शन, डोंगरीगुड़ा रेलवे साइडिंग से माल ढुलाई बंद
स्थानीय नागरिक बलराम मौर्य ने बताया कि विवाद की जड़ें साल 2020 से जुड़ी हैं. जब तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों और एनएमडीसी प्रबंधन ने ग्रामीणों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर ग्राम सभा से रेलवे साइडिंग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल किया था. उस वक्त ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि रेलवे साइडिंग खुलने से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा. बल्कि सीएसआर मद से गांव में पक्की सड़कें, नालियां, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. ग्रामीणों ने गांव की तरक्की की उम्मीद में एनओसी दे दी. लेकिन जैसे ही एनएमडीसी के हाथ में अधिकार आए. वादों की हकीकत बदलने लगी.
एनएमडीसी के लोगों ने हमें लिखित में आश्वासन दिया कि हमें रोजगार देंगे. हमने भरोसा में आकर एनओसी दे दिया. लेकिन अब हमारी मांगें पूरी नहीं कर रहे हैं. जब तक बड़े अधिकारियों से बात नहीं होगी हम यहां कोई काम नहीं होने देंगे- बलराम मौर्य, समिति अध्यक्ष डोंगरीगुड़ा
मांगे पूरी नहीं होने तक आंदोलन की चेतावनी
हैरानी की बात यह है कि रेलवे साइडिंग के भूमि पूजन के महज तीन दिन बाद ही उस स्वीकृत किए गए कार्यो को निरस्त कर दिया गया. जिसके आधार पर ग्रामीणों ने सहमति दी थी. इस धोखाधड़ी के खिलाफ जब ग्रामीणों ने मोर्चा खोला. तब जाकर करीब डेढ़ साल बाद कुछ लोगों को रोजगार नसीब हुआ. इसके बाद ग्राम पंचायत ने गांव के विकास के लिए 3 करोड़ 31 लाख रुपये का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर जिला और जनपद पंचायत को सौंपा था. हालांकि शासन स्तर से यह राशि स्वीकृत तो हो गई. लेकिन ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि अब तक यह पूरा पैसा ग्राम पंचायत को हस्तांतरित नहीं किया गया है. फंड की इसी कटौती और प्रशासनिक सुस्ती ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया और उन्होंने रेलवे साइडिंग का काम बंद करवाकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया. और कहा है कि जब तक मांगे पूरी नही होगी तब तक साइडिंग में कार्य पूरी तरह बंद रहेगा.

स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिक्ता दी जाए. प्रथम चरण की बैठक असफल हुई है. जब तक यहां की समस्याओं का समाधान नहीं होगा कोई काम शुरू नहीं किया जाएगा- नवनीत चांद, सचिव समिति
इधर NMDC के अधिकारियों ने होली तक समय मांगा था. और कार्य को शुरू करने की बात कही लेकिन स्थानीय नागरिकों ने इसे साफ तौर पर मना कर दिया.



