बैलाडीला पहाड़ी में एनसीएल कंपनी के विरोध में उतरे ग्रामीण, फर्जी ग्राम सभा कराने का लगाया गंभीर आरोप
दंतेवाड़ा के बैलाडीला पहाड़ी में एनसीएल कंपनी का विरोध हो रहा है.ग्रामीणों ने फर्जी ग्राम सभा का आरोप लगाते हुए परियोजना का विरोध किया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 10, 2026 at 7:06 PM IST
दंतेवाड़ा : दक्षिण बस्तर में एनएमडीसी/सीएमडीसी की सहयोगी कंपनी एनसीएल को खनन परियोजना के तहत काम मिला है. लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का परियोजना के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों ने कंपनी पर फर्जी ग्राम सभा कराने और संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून 1996 समेत वन अधिकार अधिनियम 2006 के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
ग्रामीणों का आरोप अनुसूचित क्षेत्र के नियमों का हुआ उल्लंघन
बताया गया कि बस्तर संभाग संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र घोषित है, जहां पेसा अधिनियम और वन अधिकार मान्यता अधिनियम पूरी तरह से लागू है. इन कानूनों के तहत किसी भी प्रकार के भूमि अधिग्रहण, खनन या औद्योगिक गतिविधि के लिए संबंधित ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य है. इसके बावजूद दंतेवाड़ा जिले के ग्राम पंचायत भांसी क्षेत्र में बैलाडीला डिपॉजिट-4 के अंतर्गत डिपॉजिट एल-1, एल-बी, एल-सी में एनएमडीसी की एनसीएल कंपनी ने खदान खोलने का प्रस्ताव रखा है. ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा प्रक्रिया आदिवासियों की अनुमति के बिना आगे बढ़ाई जा रही है.
आदिवासियों को संस्कृति खतरे में पड़ने और आजीविका छीनने का डर
प्रस्तावित खनन से बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित होंगे, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा. इसके साथ ही उनकी पहचान, पारंपरिक संस्कृति, देवी-देवताओं से जुड़े आस्था स्थल और जंगल आधारित जीवन प्रणाली भी खतरे में पड़ जाएगी. इसी मुद्दे को लेकर ग्राम पंचायत भांसी में बैलाडीला पहाड़ी के ऊपर और आसपास की 48 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों समेत दंतेवाड़ा जिले के अन्य पंचायतों के प्रतिनिधियों की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई.
ग्रामीणों के सवालों का जवाब नहीं दे सके अधिकारी
बैठक में ग्रामीणों ने एनएमडीसी–एनसीएल कंपनी के अधिकारियों से सीधे सवाल किए कि ग्राम सभा कब हुई, किसने करवाई, उसमें कितने लोग शामिल थे और उसकी वैधानिकता क्या है. ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि बैलाडीला डिपॉजिट-4 में प्रस्तावित खदान का वे एकजुट होकर विरोध करते हैं. इस दौरान कंपनी की ओर से आए अधिकारी ग्राम सभा से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.स्थिति तनावपूर्ण होते देख जिला प्रशासन की मौजूदगी में बैठक को निरस्त कर दिया गया.
आदिवासी पूर्वजों की अमानत हैं पहाड़ियां
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता मनीष कुंजाम ने कहा कि बैलाडीला पहाड़ी आदिवासियों के पूर्वजों की अमानत है. यहां दुर्लभ खनिज, घने जंगल, विविध वनस्पतियां, कई प्रजातियों के जीव-जंतु और बस्तर की संस्कृति और परंपरा से जुड़े देवी-देवताओं के पवित्र स्थल मौजूद हैं. ग्रामीण इन पहाड़ियों की पूजा करते हैं और इसे अपनी जान से भी ज्यादा महत्व देते हैं. ऐसे में बिना ग्राम सभा की सहमति के बाहरी कंपनियों को खदान देने का प्रयास पूरी तरह गलत है.
कंपनी भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह कर फर्जी ग्राम सभा दिखाकर डिपॉजिट-4 की खदान हासिल करना चाहती है. इस साजिश के खिलाफ सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में नाराजगी जताई है.हम बस्तर की संस्कृति, परंपरा और खनिज संपदा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे, जरूरत पड़ी तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन भी किया जाएगा- मनीष कुंजाम,सामाजिक कार्यकर्ता
बैठक के बाद राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन
बैठक के बाद ग्राम पंचायत भांसी सहित आसपास की कई पंचायतों के सरपंच, पंच, सचिव और दूर-दराज से आए ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में मांग की गई कि पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए. फर्जी ग्राम सभा के आधार पर की जा रही सभी प्रक्रियाओं को रद्द किया जाए और बैलाडीला डिपॉजिट-4 में प्रस्तावित खनन कार्य तत्काल रोका जाए.
एनसीएल कंपनी का विरोध तेज करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने को मजबूर होंगे. इस पूरे मामले ने एक बार फिर बस्तर क्षेत्र में खनन परियोजनाओं, आदिवासी अधिकारों और ग्राम सभा की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है.
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