बिहार में 40 हजार दवा दुकानें बंद, ई-फार्मेसी के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल
ई-फार्मेसी के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल के कारण बिहार में दवा दुकानें बंद रही. ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बंदी की है.

Published : May 20, 2026 at 11:41 AM IST
पटना: ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) बड़े बड़े कॉपरेट के एकाधिकार के खिलाफ बुधवार को पूरे देश में दवा की दुकानें बंद रही. ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर पूरे देश में 24 घंटों के लिए दवा दुकानें बंद रहेगी. बिहार में भी इसका असर देखने को मिला. राज्य की राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में दवा दुकानें बुधवार सुबह से ही बंद रही.
40 हजार दवा दुकानें बंद: हड़ताल का व्यापक असर सुबह से ही देखने को मिला. राज्य में लगभग 40 हजार दवा दुकानें बंद रही. राजधानी पटना में अकेले 7 हजार के आसपास थोक और खुदरा विक्रेता अपनी दुकानें बंद रखी. ऐसे में दवा लेने आए मरीजों और खुदरा बिक्रेता को परेशानियों का सामना करना पड़ा.

मसौढ़ी में 150 दवा दुकान बंद: बुधवार को मसौढ़ी अनुमंडल में 150 दवा दुकानों के शटर एक साथ गिर गए. बिहार केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने हुंकार भरते हुए कहा कि कोरोना काल में शुरू हुई ऑनलाइन दवा बिक्री अब नशीली दवाओं की खुली मंडी बन गई है. ई-फार्मेसी को तुरंत बंद किया जाए. एआई जेनरेट रसीद से युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं. यह समाज के लिए खतरा है.
"जब हम पर ड्रग लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर और इंस्पेक्शन के सख्त नियम हैं तो ऑनलाइन कंपनियों को खुली छूट क्यों? सरकार या तो उन पर भी वही नियम थोपे या हमें भी राहत दे. ई-फार्मेसी पूर्ण रूप से बंद हो. ऑनलाइन और ऑफलाइन विक्रेताओं पर एक समान कानून लागू हो. नशीली दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त रोक लगे." -मुकेश कुमार, अध्यक्ष, बिहार केमिस्ट एसोसिएशन

अनिश्चितकालीन की चेतावनी: मुकेश कुमार ने कहा कि बंद के बावजूद इमरजेंसी सेवा के लिए चुनिंदा दुकानें खुली रखी गईं ताकि मरीजों को परेशानी न हो. मुकेश कुमार ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने 3 सूत्री मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो यह एक दिन का बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा. पूरे राज्य के केमिस्ट सड़क पर उतरेंगे.

AIOCD का कहना है कि "देश में धड़ल्ले से ऑनलाइन दवा की बिक्री हो रही है. बड़ी-बड़ी कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफार्म दवाओं पर भारी छूट देते हैं. इससे बाजार का संतुलन बिगड़ रहा है. इस कारण पीढ़ियों से मेडिकल स्टोर चला रहे दुकानदारों को परेशानी होती है. दवा की बिक्री नहीं होने के कारण दुकानों पर ताला लगाने की नौबत आ गयी है. इसलिए ई-फार्मेसी के खिलाफ हड़ताल की गयी है."
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