विभागीय कार्रवाई के चलते प्रमोशन से वंचित कर्मचारी को बरी होने पर देने होंगे सभी वित्तीय लाभ: हाईकोर्ट
हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई में बरी होने पर कर्मचारी को सांकेतिक नहीं, बल्कि पुरानी तारीख से सभी वास्तविक वित्तीय लाभ देने होंगे.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 4, 2026 at 1:06 PM IST
शिमला: हिमाचल हाईकोर्ट ने विभागीय कार्रवाई के चलते कर्मचारियों के वित्तीय लाभों से जुड़े मामले पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने कर्मचारी के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर किसी कर्मचारी को विभागीय कार्रवाई के कारण पदोन्नति से वंचित रखा गया हो और बाद में कर्मचारी सभी आरोपों से पूरी तरह बरी हो जाता है. तो ऐसे में कर्मचारियों को केवल सांकेतिक नहीं बल्कि वास्तविक आर्थिक लाभ भी उसी तारीख से दिए जाने चाहिए, जिस दिन उसके साथ के अन्य अधिकारियों को पदोन्नति मिली थी.
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी की याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की अदालत ने ये फैसला सुनाया है. साथ ही अदालत ने एचआरटीसी के 8 मार्च 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को जनरल मैनेजर पद पर वास्तविक वेतन और अन्य लाभ जॉइनिंग की तारीख से देने का फैसला किया गया था. हाईकोर्ट ने निगम को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 9 जनवरी 2015 से जनरल मैनेजर पद का पूरा वेतन और सभी सेवा संबंधी लाभ एक महीने के भीतर जारी किए जाएं. तय समय में भुगतान नहीं होने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा
न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में "नो वर्क, नो पे" का सिद्धांत लागू नहीं होता, क्योंकि कर्मचारी अपनी गलती से काम से दूर नहीं था. उसे विभागीय कार्रवाई लंबित होने के कारण पदोन्नति नहीं मिल सकी और डीपीसी की सिफारिशें सील बंद लिफाफे में रखी गई थीं. बाद में विभागीय कार्रवाई समाप्त हुई और कर्मचारी सभी आरोपों से पूरी तरह बरी हो गया. लिहाज़ा कर्मचारियों को उसी तारीख से पदोन्नति और उससे जुड़े सभी वास्तविक लाभ मिलने चाहिए थे, जिस दिन अन्य अधिकारियों को पदोन्नत किया गया था. अदालत ने कहा कि कर्मचारी को वास्तविक आर्थिक लाभ से वंचित रखने का कोई ठोस कारण रिकॉर्ड पर नहीं है. इसलिए उसे जनरल मैनेजर पद का वेतन और अन्य सभी लाभ 9 जनवरी 2015 से दिए जाने चाहिए.
क्या है पूरा मामला
मामला एचआरटीसी के अधिकारी डॉ. नवीन कपलास से जुड़ा है. वर्ष 2012 में उनके खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी. इसी कारण 2014 में हुई डीपीसी में उनके पदोन्नति संबंधी निर्णय को सीलबंद लिफाफे में रख दिया गया. वर्ष 2017 में उन्हें 'सेंसर' की सजा दी गई, लेकिन अपील पर 6 मार्च 2019 को यह सजा रद्द कर दी गई और सभी ऑडिट आपत्तियां भी समाप्त कर दी गईं. इसके बाद 8 मार्च 2019 को उन्हें 9 जनवरी 2015 से सांकेतिक आधार पर पदोन्नति तो दे दी गई, लेकिन वास्तविक वेतन और आर्थिक लाभ केवल कार्यभार संभालने की तारीख से दिए गए. इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है.

