हिमाचल में ड्राई स्पेल ने बढ़ाई टेंशन, पिछले दो सालों में बढ़ा सेब उत्पादन क्षेत्र, कम हुआ प्रोडक्शन
हिमाचल में लगातार ड्राई स्पेल बना हुआ है. लंबे समय से बारिश न होने के कारण परिस्थितियां बागवानी के प्रतिकूल बनी हुई हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 27, 2025 at 8:31 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में दिसंबर गुजरने को है लेकिन अब तक बारिश बर्फबारी का इंतजार जारी है. बारिश-बर्फबारी के इस बढ़ते इंतजार ने फ्रूट बास्केट ऑफ़ इंडिया कहे जाने वाले हिमाचल में फल उत्पादकों की टेंशन बढ़ा दी है. दिसंबर अपने आखिरी हफ्ते में है, मगर अब तक शिमला, मंडी, कुल्लू और किन्नौर जैसे सेब उत्पादक क्षेत्रों में बारिश बर्फबारी देखने को नहीं मिली है. अब बागवानों को जमीन में नमी की कमी के साथ चिलिंग आवर्स पूरे न होने की चिंता सताने लगी है.
सेब के लिए मौसम बना चिंता
हिमाचल प्रदेश के पूरे फल उत्पादन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सेब की है. लिहाजा प्रदेश की आर्थिक में भी इसका योगदान बड़ा है. प्रदेश के लाखों बागवानों की निर्भरता पूरी तरह से सेब पर है. ऐसे में मौसम परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर इन लाखों सेब उत्पादकों पर पड़ने वाला है. ऐसी स्थिति पर सेब उत्पादक बागवानों ने गहरी चिंता व्यक्त की है. बीते दो वर्षों में भारी बरसात ने सेब बागवानी को बड़े स्तर पर प्रभावित किया. अब सर्दियों के मौसम में ड्राई स्पेल राज्य की सेब बागवानी पर संकट की तरह देखा जा रहा है.
पहले मानसून में भारी बरसात और अब सूखे की मार
पहले मानसून में भारी बारिश और अब सर्दियों में ड्राई स्पेल से डबल मार झेल रहे बागवान बेहद चिंतित हैं. बागवान अब प्रशासन से ड्राई स्पेल को देखते हुए बागवानों को एडवाइजरी जारी करने और सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं. शिमला के जुब्बल इलाके में पारंपरिक बागवानी करने वाले प्रमोद शर्मा ने मौसम परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों से सेब बहुल क्षेत्र मंडी, कुल्लू और शिमला में बारिश नहीं हुई है. ऐसे में इन इलाकों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है. पहले बरसात के समय फसलों को भारी नुकसान हुआ. इसके बाद जो उत्पादन हुआ वो खराब सड़कों के चलते फल मंडियों तक नहीं पहुंच पाया. ऐसे में सरकार को एडवाइजरी जारी करते हुए बागवानों के विषय में सोचना चाहिए.
सेब उत्पादन पर पड़ा असर
मौसम परिवर्तन का असर राज्य की सेब बागवानी पर बड़े स्तर पर हुआ है. एक तरफ पिछले दो सालों में मानसून में भारी बारिश ने सेब बागवानी को आहत किया. वहीं, अब ड्राई स्पेल ने बागवानी के लिए मुश्किलों का पहाड़ खड़ा कर दिया है. पिछले वर्षों के मुकाबले राज्य में सेब उत्पादन वाले क्षेत्र का विकास जरूर हुआ है. लेकिन, इसके बावजूद सेब उत्पादन कम हुआ. राज्य सरकार के बागवानी विभाग की ओर से जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो सेब बागवानी पर मौसमी प्रभाव का असर सीधा-सीधा देखने को मिलता है. साल 2022-23 के मुकाबले वर्ष 2024-25 में 1 लाख 69 हज़ार 395 मेट्रिक टन सेब उत्पादन कम हुआ.
हिमाचल प्रदेश में साल 2022-23 में 1 लाख 15 हजार 680 हैकटेयर भूमि पर सेब उत्पादन किया जा रहा था. इस साल राज्य में 6 लाख 72 हजार 343 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ. वहीं साल 2023-24 में सेब उत्पादन क्षेत्र का विकास हुआ. इस वर्ष 1 लाख 16 हजार 240 हेक्टेयर भूमि पर सेब उत्पादन किया गया, जबकि इस साल 5 लाख 06 हज़ार 687 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ. इससे अगले वाले वर्ष 2024-25 में 1 लाख 16 हजार 338 हेक्टेयर भूमि पर 5 लाख 02 948 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था. कुल मिलाकर देखें तो 2022-23 के मुकाबले वर्ष 2024-25 में सेब उत्पादन 1 लाख 69 हजार 395 मीट्रिक टन कम हुआ, जबकि साल 2022-23 के मुकाबले वर्ष 2024-25 में सेब उत्पादन क्षेत्र में 703 हेक्टेयर की वृद्धि हुई.
सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
रोहड़ू के प्रतिशील बागवान मोहित शर्मा ने भी बारिश बर्फबारी न होने पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि 'दिसंबर गुजरने को है लेकिन अब तक बारिश बर्फबारी देखने को नहीं मिली है. उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आने वाले समय में भी मौसम परिवर्तन का असर ऐसे ही देखने को मिला तो बागवानी के लिए संकट पैदा हो जाएगा. प्रशासन से गुजारिश की है कि सेब उत्पादक क्षेत्रों में भी सिंचाई व्यवस्था को बेहतर किया जाए. जमीन में नमी बेहद कम है ऐसे में राज्य सरकार को बागवानों के लिए ड्रिप इरीगेशन जैसी सिंचाई प्रणाली को उपलब्ध करवाने के बारे में विचार करना चाहिए.'
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