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दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति का कड़ा रुख: पंजाब के गृह सचिव और DGP को 20 फरवरी तक का 'अल्टीमेटम'

आतिशी से जुड़े एक मामले में समिति ने पंजाब पुलिस को 20 फरवरी तक अपना अंतिम लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

विशेषाधिकार समिति ने अपनाया कड़ा रुख
विशेषाधिकार समिति ने अपनाया कड़ा रुख (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : February 14, 2026 at 1:27 PM IST

6 Min Read
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नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पंजाब सरकार के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सख्त तेवर अपना लिए हैं. दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी से जुड़े एक संवेदनशील मामले में समिति ने पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक और जालंधर के पुलिस आयुक्त को 20 फरवरी 2026 तक अपना अंतिम लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अंतिम अवसर है और इसके बाद समय सीमा में किसी भी प्रकार का विस्तार नहीं किया जाएगा.

दस्तावेजों और फोरेंसिक रिपोर्ट पर फंसा पेंच

दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने केवल जवाब ही नहीं, बल्कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य भी तलब किए हैं. समिति ने पंजाब सरकार से उन सभी दस्तावेजों की मांग की है जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी. इसमें शिकायत की मूल प्रति, पंजाब पुलिस के टेक्निकल सेल (सोशल मीडिया विशेषज्ञ) की विस्तृत रिपोर्ट और पंजाब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट शामिल है.

दिल्ली विधानसभा
दिल्ली विधानसभा (File Photo)

समिति का मानना है कि इन दस्तावेजों के बिना जांच को तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया जा सकता. गत12 फरवरी को पंजाब के गृह सचिव कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में देरी का कारण 'विस्तृत उत्तर तैयार करने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति' को बताया गया था, जिसे दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने गंभीरता से लिया है.

जानिए क्या है पूरा मामला

यह विवाद दिल्ली विधानसभा सदन के पटल पर दिए गए वक्तव्यों और उसके बाद पंजाब पुलिस द्वारा की गई कथित कार्रवाई से जुड़ा है. आरोप है कि पंजाब पुलिस की कुछ टिप्पणियां और कार्रवाइयां दिल्ली विधानसभा की गरिमा और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन करती हैं. जब कोई बाहरी शक्ति या अधिकारी सदन की कार्यवाही में बाधा डालता है या सदस्य के विरुद्ध अनुचित टिप्पणी करता है, तो उसे 'विशेषाधिकार हनन' माना जाता है.

दिल्ली विधानसभा के पास क्या हैं दंडात्मक अधिकार

संसदीय मामलों के विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष प्रतिहस्त के अनुसार, "विधानसभा केवल कानून बनाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि उसके पास अपनी गरिमा की रक्षा के लिए अर्ध-न्यायिक शक्तियां भी होती हैं." विधानसभा की विशेषाधिकार समिति निम्नलिखित कार्रवाई कर सकती है. समिति किसी भी अधिकारी (चाहे वह किसी भी राज्य का हो) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए मजबूर कर सकती है. यदि दोष सिद्ध होता है, तो सदन संबंधित अधिकारियों को सदन के घेरे में बुलाकर सार्वजनिक रूप से फटकार लगा सकता है.

दिल्ली विधानसभा में प्रदर्शन
दिल्ली विधानसभा में प्रदर्शन (ETV Bharat)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत, विधानसभा के पास सदन की अवमानना के दोषी व्यक्ति को निश्चित अवधि के लिए जेल भेजने की शक्ति भी है. समिति संबंधित राज्य सरकार या केंद्र सरकार को दोषी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दे सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि पंजाब के अधिकारी 20 फरवरी तक संतोषजनक जवाब या दस्तावेज नहीं सौंपते हैं, तो दिल्ली विधानसभा इसे 'जानबूझकर की गई अवमानना' मानकर उनके विरुद्ध वारंट जारी करने की सिफारिश भी कर सकती है.

दिल्ली बनाम पंजाब, क्यों बनी है टकराव की स्थिति

पंजाब सरकार के गृह सचिव ने अपने पिछले पत्र में दावा किया था कि उन्हें 5 फरवरी से पहले इस मामले में कोई प्रत्यक्ष संप्रेषण प्राप्त नहीं हुआ था. हालांकि, दिल्ली विधानसभा सचिवालय का रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है. अब 20 फरवरी की तारीख दोनों राज्यों के बीच इस प्रशासनिक और संवैधानिक खींचतान के लिए निर्णायक साबित होगी. समिति ने साफ कर दिया है कि कार्यसंचालन नियमों के उल्लंघन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब सबकी निगाहें पंजाब पुलिस के मुख्यालय और गृह विभाग की अगली फाइल पर टिकी हैं. 20 फरवरी की समय सीमा केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह तय करेगी कि क्या पंजाब सरकार दिल्ली विधानसभा की सर्वोच्चता को स्वीकार करती है या यह मामला एक लंबी कानूनी लड़ाई में तब्दील हो जाएगा.

संवैधानिक टकराव: दिल्ली विधानसभा की नियमावली बनाम पंजाब सरकार की कानूनी ढाल

दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति और पंजाब के शीर्ष अधिकारियों के बीच जारी यह खींचतान अब एक गंभीर संवैधानिक मोड़ ले चुकी है. जहां एक ओर दिल्ली विधानसभा अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रही है, वहीं पंजाब सरकार भी अपनी कानूनी प्रतिरक्षा तैयार करने में जुटी है.

जानिए क्या कहती है दिल्ली विधानसभा की नियमावली

दिल्ली विधानसभा की 'कार्यसंचालन एवं कार्य संचालन नियमावली' के अध्याय 16 के तहत विशेषाधिकार समिति को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं. नियम 160 (जांच की शक्ति) के तहत समिति को किसी भी व्यक्ति को बुलाने, दस्तावेज मंगाने और शपथ दिलाकर गवाही लेने का अधिकार है. यदि कोई अधिकारी दस्तावेज देने से इनकार करता है, तो इसे सदन की अवमानना माना जाता है. नियम 164 (रिपोर्ट प्रस्तुत करना) जांच पूरी होने के बाद समिति सदन को अपनी सिफारिशें भेजती है. सदन इन सिफारिशों के आधार पर दोषी अधिकारी को 'सदन के घेरे में बुलाकर दंडित कर सकता है. सदन के पास दोषी को कारावास भेजने या सार्वजनिक रूप से 'भर्त्सना' करने का अधिकार सुरक्षित है.

पंजाब सरकार की संभावित कानूनी प्रतिरक्षा

पंजाब सरकार के अधिकारी इस मामले में खुद को बचाने के लिए कानूनी तर्कों का सहारा ले सकते हैं. जिसमें पंजाब सरकार यह तर्क दे सकती है कि चूंकि कथित घटना या एफआईआर पंजाब के अधिकार क्षेत्र में हुई है, इसलिए दिल्ली विधानसभा की समिति को दूसरे राज्य के पुलिस अधिकारियों की प्रशासनिक कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का संवैधानिक अधिकार सीमित है. अधिकारी यह तर्क दे सकते हैं कि विपक्ष की नेता के विरुद्ध की गई कार्रवाई 'पुलिस की वैधानिक ड्यूटी' का हिस्सा थी और इसका सदन के भीतर दिए गए भाषण से सीधा संबंध नहीं है. वे अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर समिति की कार्रवाई पर रोक की मांग कर सकते हैं. गृह सचिव यह रुख अपना सकते हैं कि कुछ दस्तावेज गोपनीय हैं और इन्हें सार्वजनिक करने से चल रही जांच या राज्य की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

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