हिमाचल में किताबें, कॉपियों और स्कूल वर्दी की खरीद पर ये बड़ा फैसला, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत
निजी स्कूल न तो किसी विशेष दुकान से किताब-कॉपी खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य कर सकेंगे. न ही खास प्रकाशक की पुस्तकें थोप सकेंगे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 8, 2026 at 10:23 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और राहत भरा फैसला सामने आया है, जो सीधे-सीधे लाखों अभिभावकों की जेब और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा है. नए शैक्षणिक सत्र से पहले किताबें और कॉपियां की खरीद को लेकर हर साल मचने वाली मनमानी पर अब शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. निजी स्कूलों की ओर से तय दुकानों से महंगी किताबें और कॉपियां खरीदने के लिए अभिभावकों पर बनाए जाने वाले दबाव को लेकर सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है.
शिक्षा विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन में निजी स्कूल प्रबंधन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि वो न तो किसी विशेष दुकान से किताब-कॉपी खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य कर सकेंगे और न ही किसी खास प्रकाशक की पुस्तकें थोप सकेंगे. निजी स्कूलों में अक्सर अभिभावकों को स्कूली बच्चों के किताबें और कापियों सहित वर्दी खरीद को लेकर किसी एक ही दुकान से खरीदने को लेकर दबाब बनाया जाता है.
इस नियम के तहत सख्ती के आदेश
शिक्षा विभाग ने प्राप्त होने वाली शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 में निहित प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं. इसको लेकर शैक्षणिक सत्र आरंभ होने से पहले पीटीए के माध्यम से अभिभावकों का जर्नल हाउस आयोजित करना होगा. इस बारे में सभी सेकेंडरी और प्रारंभिक उपनिदेशकों सहित स्कूलों के प्रबंधको, प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गये हैं. इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर जर्नल हाउस के निर्णय को प्रदर्शित किया जाए. वहीं, इस संबंध में ना तो स्कूल स्वयं किताबें बेच सकते हैं और ना ही किसी स्पेशल दुकान से अभिभावकों को किताबें और कापियों सहित वर्दी खरीदने को लेकर बाध्य कर सकते हैं.
भारी पड़ेगी लापरवाही
शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि स्कूलों को नियमों की अनुपालना के लिए आदेश जारी किए जाएं. यदि कोई भी स्कूल नियमों की अवहेलना करता है या उसकी शिकायत विभाग को मिलती है तो ऐसे में स्कूलों का अनापत्ति प्रमाण पत्र रद्द किया जा सकता है, जिसके लिए स्कूल स्वयं जिम्मेदार होगा. शिक्षा विभाग ने ये भी स्पष्ट किया है कि छात्रों को स्कूल के प्रतीक चिन्ह वाली किताबें कापियां लेने के लिए बाध्य ना किया जाए, यदि स्कूल अपनी मनमानी को नहीं रोकते हैं तो ऐसे में उनके उपर नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
ये भी पढ़ें: भाजपा नेता को बिजली चोरी करना पड़ा महंगा, विभाग रंगे हाथों पकड़ ठोका इतना जुर्माना

