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ग्राउंड रिपोर्ट: कंक्रीट के नीचे दफन 'नन्हीं चीखें', 6 साल बाद एक्सप्रेसवे उगलेगा फिल्म 'दृश्यम' जैसा खौफनाक सच

मासूम प्रिंस की हत्या उसके ही चाचा और बुआ ने आपसी विवाद और रंजिश के चलते की थी. 6 साल बाद हत्या का राज खुला.

Dausa Prince murder case
मासूम के शव को जीपीआर मशीन की मदद से खोजा जा रहा है (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 27, 2026 at 4:36 PM IST

5 Min Read
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रिपोर्ट- विकास व्यास

दौसा: विकास की रफ्तार का प्रतीक बना 'दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे' आज एक मासूम के कत्ल का गवाह बनकर खड़ा है. साल 2020 से जिस 4 साल के मासूम प्रिंस (टिल्लू) को उसका परिवार पूरे राजस्थान में ढूंढ रहा था, उसका राज घर की चारदीवारी के भीतर ही दफन था. मासूम के ही अपनों ने ही न केवल खून के रिश्तों को शर्मसार किया, बल्कि मासूम की हत्या कर शव को एक्सप्रेसवे की नींव में गाड़ दिया. पुलिस जांच में सामने आया कि 16 अगस्त 2020 की दोपहर, जब प्रिंस अपने घर के बाहर खेल रहा था, तभी रंजिश की आग में जल रहे उसके चाचा अनिल और बुआ कृष्णा ने उसे दबोच लिया. चीख बाहर न आए, इसलिए मासूम का गला घोंटा और उसकी हत्या कर दी.

एक्सप्रेसवे बना 'कब्रिस्तान': पुलिस की अभी तक की जांच के अनुसार हत्या के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी, शव को ठिकाने लगाना. उस समय दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा था. फिल्म 'दृश्यम' की तरह, आरोपियों ने शव को ऐसी जगह छुपाया जहां भविष्य में खुदाई की संभावना कम हो, और 6 साल तक इस राज को दबाए रखा. आरोपियों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाया और एक्सप्रेसवे के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे में मासूम के शव को दफना दिया. कुछ दिनों बाद मशीनों ने वहां मिट्टी और कंक्रीट भर दी. हत्यारों को लगा कि 30-40 फीट ऊंचे कंक्रीट के इस पहाड़ के नीचे उनका राज हमेशा के लिए दफन हो गया है. हैरानी की बात यह है कि हत्या के बाद आरोपी चाचा लगातार प्रिंस की फोटो लेकर उसकी खोज में शामिल होता रहा. वह परिवार के साथ आंसू बहाता था ताकि किसी को शक न हो, लेकिन कहते हैं कि 'अपराध अपने पीछे सुराग छोड़ ही जाता है'.

सुनिए क्या बोले मासूम के पिता (ETV Bharat Jaipur)

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शक के आधार पर गिरफ्तारी: बांदीकुई थानाधिकारी जहीर अब्बास का कहना है कि चार साल का प्रिंस उर्फ टिल्लू करीब छह साल पहले लापता हो गया था. परिजनों और पुलिस ने काफी तलाश किया, लेकिन सुराग नहीं मिला. हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने दुबारा जांच शुरू की तो प्रिंस के रिश्ते में चाचा और बुआ लगने वाले अनिल और कृष्णा पर शक गया. अनिल को गुजरात और कृष्णा को दिल्ली से हिरासत में लिया गया. दोनों से कड़ी पूछताछ की गई. तो दोंनों ने प्रिंस की हत्या कर शव एक्सप्रेसवे के पास गाड़ने की बात कबूल की.

Dausa Prince murder case
प्रिंस हत्याकांड (ETV Bharat GFX)

जीपीआर मशीन से किया गया सर्वे: दौसा जिले से गुजर रहा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस वे में से एक है. अब हाइवे की मुख्य सड़क को नुकसान पहुंचाए बिना शव की तलाश की कवायद की जा रही है. इसके लिए जीपीआर मशीन (Ground Penetrating Radar) से सर्वे करवाया जा रहा है. शुक्रवार को जीपीआर की मदद से करीब करीब 70 मीटर की लंबाई और छह मीटर गहराई तक सर्वे किया गया है. इस मशीन की मदद से जमीन में मौजूद किसी ऑब्जेक्ट का पता लगाया जा सकता है. आज के सर्वे में चार स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, जहां कोई संदिग्ध वस्तु होने का अनुमान है.

जीपीआर मशीन से सर्वे किया गया.
जीपीआर मशीन से सर्वे किया गया. (ETV Bharat Jaipur)

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पिता बोले, जल्द मिले बच्चे का शव: मृतक प्रिंस के पिता जगमोहन का कहना है कि वह दुबई में जॉब करते हैं. यह घटना 16 अगस्त 2020 की है, जब उनका बेटा लापता हुआ था, उस समय भी वे दुबई में थे. उन्हें जब जानकारी मिली तो वे घर आए और बच्चे की तलाश शुरू की. उन्होंने अपने स्तर पर भी तलाश की और पुलिस से भी मदद ली. लंबे समय तक जब उसका पता नहीं चला तो हार मान ली. पिता का कहना है कि सबसे पहले उनके बच्चे का शव मिलना चाहिए. उसके बाद आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

सूचना मिली तो दुबई से लौटे पिता: उनका कहना है की इन छह साल में अपने बेटे की तलाश में उन्होंने सब कुछ गंवा दिया. जितनी हैसियत थी, उससे ज्यादा प्रयास किया, लेकिन बेटे का पता नहीं चला. पिछले दिनों इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिली तो वे तत्काल छुट्टी लेकर दुबई से अपने घर पहुंचे. उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. जब से यह मामला फिर चर्चा में आया है, उसकी तबीयत खराब है.

एक्सप्रेस वे की सड़क किनारे की गई खुदाई.
एक्सप्रेस वे की सड़क किनारे की गई खुदाई. (ETV Bharat Jaipur)

रिपोर्ट आने में लगेंगे एक-दो दिन: वहीं, जीपीआर मशीन ऑपेरटर अजीत सिंह का कहना है कि यह मशीन ग्राउंड पेनेटिक राडार है. इसकी मदद दे जमीन के अंदर पाइप, केबल या धातु की वस्तुओं की खोज में किया जाता है. यह मशीन नॉन मेटलिक वस्तुओं के बारे में भी पता लगा सकती है. इस मशीन की स्क्रीन पर आने वाले ग्राफ की रीडिंग के आधार पर यह पता चलता है कि जमीन में किसी खास गहराई पर कुछ संदिग्ध वस्तु दबी हुई है. उनका कहना है कि फिलहाल आज की रीडिंग जांच के लिए भेजी है. जिसकी रिपोर्ट आने में एक-दो दिन लग सकते हैं.

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