शिक्षा की राह में कीचड़ का रोड़ा! बिहार में 30 साल पुराने स्कूल का रास्ता गायब, समस्या ने खोली सिस्टम की पोल
जमुई के लहथरा गांव में तीन दशकों से सड़क नहीं बनी, 238 बच्चे और शिक्षक कीचड़ के बीच से स्कूल जाते हैं.रिपोर्ट- राजेश कुमार

Published : August 27, 2026 at 8:31 PM IST
जमुई: बिहार के जमुई से डिजिटल इंडिया और पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया के नारों पर सवाल उठाती तस्वीर सामने आई है. हाथों में किताबें और नोटबुक, पीठ पर स्कूल बैग और पैरों में कीचड़ के साथ स्कूल जाते बच्चों की तस्वीरें जिले के सोनो ब्लॉक में स्थित लथरा गांव में सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही है.
तीन दशकों से एक जैसे हालात: हर दिन मासूम बच्चों को उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहुंचने के लिए कीचड़ भरे रास्ते से गुज़रना पड़ता है. मुख्य सड़क से स्कूल की दूरी महज 300 मीटर है, लेकिन पिछले 30 सालों में बच्चों को सड़क नहीं मिल पाई. सिस्टम की बेरुखी और प्रशासनिक विफलता के कारण गांव के बच्चे तीन दशकों से इस मुश्किल का सामना कर रहे हैं.

खराब हालत वाले रास्ते की तस्वीरें: गांव की मुख्य सड़क से लगभग 300 मीटर दूर स्थित स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को खेतों और खुले मैदानों से होकर चलना पड़ता है. आम दिनों में तो वे जैसे-तैसे गुज़ारा कर लेते हैं, लेकिन मॉनसून के दौरान हालात बहुत खराब हो जाते हैं. बारीश के दिनों में उन्हें कीचड़ में नंगे पैर चलने पर मजबूर होना पड़ता है.
हर कदम पर खतरा: ऐसे हालात में, कीचड़ में फिसलने और गिरने का लगातार खतरा बना रहता है. पानी और कीचड़ में छिपे जहरीले जीवों के काटने का डर भी रहता है. इसके अलावा, कीचड़ में छिपे नुकीले पत्थरों, कांच के टुकड़ों, कीलों और लोहे के तारों से चोट लगने का खतरा भी होता है. स्कूल जाते समय शिक्षकों और छात्रों, दोनों को ही इन खतरों का सामना करना पड़ता है
कई दशक पुराना स्कूल: रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्कूल लगभग 30 साल पहले शुरू किया गया था. तीन दशक बीत जाने के बाद भी, स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं बनाई गई है. नतीजतन, बारिश के मौसम में स्कूल पहुंचने की कोशिश में छात्रों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ता है. आज तक, स्कूल तक जाने के लिए कोई सही, पक्की सड़क नहीं है.
स्कूल की मौजूदा स्थिति: यह उत्क्रमित मध्य विद्यालय कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए है. अभी यहां 238 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इन सभी बच्चों की पूरी शिक्षा व्यवस्था सिर्फ चार शिक्षकों के कंधों पर टिकी है, जो इन बच्चों का भविष्य संवारने के लिए जिम्मेदार हैं.
हेडमास्टर की दुविधा: पूरे मामले पर प्रभारी प्रधानाध्यापक रमाशंकर सिंह ने बताया कि "यहां पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है, हमारे पास 238 छात्र हैं, लेकिन शिक्षक सिर्फ चार हैं. सबसे बड़ी समस्या स्कूल तक जाने के लिए सही सड़क का न होना है. वहां पहुँचने के लिए खेतों के बीच बनी संकरी मेड़ों से होकर गुज़रना पड़ता है. मॉनसून के मौसम में इन मेड़ों पर कीचड़ घुटनों तक जमा हो जाता है."
अधिकारियों की बेरुखी: रमाशंकर सिंह ने आगे कहा कि हमने कई बार अधिकारियों, प्रशासकों और जन-प्रतिनिधियों को इस समस्या के बारे में बताया है. हमने स्कूल तक सड़क बनाने और शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने आगे कहा कि 2005 से अब तक हालात ऐसे ही है, हालांकि अब डीएम ने सड़क बनवाने का आश्वासन दिया है.

"हमने कई बार अधिकारियों, प्रशासकों और जन-प्रतिनिधियों को इस समस्या के बारे में बताया है. हमने स्कूल तक सड़क बनाने और शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने आगे कहा कि 2005 से अब तक हालात ऐसे ही है, हालांकि अब डीएम ने सड़क बनवाने का आश्वासन दिया है."- रमाशंकर सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक
स्कूलों की एक लंबी फेहरिस्त: हैरानी की बात ये है कि जमुई जिले में ये सिर्फ कोई एक स्कूल नहीं है जिस तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं हो. जिला शिक्षा पदाधिकारी के मुताबिक ऐसे स्कूलों की एक लंबी फेहरिस्त है, जहां स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क भी नहीं है.

दस प्रखंड के 57 विद्यालय में सड़क नहीं: जमुई जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने बताया जिलेभर के कुल दस प्रखंड में कुल 57 ऐसे सरकारी विद्यालय है जहां स्कूल में पहुंचने के लिए सड़क नहीं है. उन्होंने कहा कि इसको लेकर 'चिंतन शिविर' में लिखित रूप से सरकार के भूमि सुधार विभाग आवेदन दे दिया गया है, मंत्री को अवगत करा दिया गया है.पदाधिकारी ने कहा कि अब विभाग के ओर से आगे निर्णय लिया जाना है.
"जिलेभर के कुल दस प्रखंड में कुल 57 ऐसे सरकारी विद्यालय है जहां स्कूल में पहुंचने के लिऐ सड़क नहीं है, इसको लेकर 'चिंतन शिविर' में लिखित रूप से सरकार के भूमि सुधार विभाग को दे दिया गया है, मंत्री को अवगत करा दिया गया है अब उक्त विभाग के ओर से आगे निर्णय लिया जाना है काम किया जाना है."-धनंजय कुमार पासवान, डीईओ

ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश: लहथरा गांव के निवासी भी लंबे समय से स्कूल तक सड़क के तुरंत निर्माण की मांग कर रहे हैं. भले ही डीएम ने आश्वासन दिया है कि सड़क बन जाएगी. लेकिन फिर भी ग्रामीण अपने स्तर से भी बच्चों की सहूलियत के लिए सड़क बनाने की कोशिश में जुट गए हैं.
वादे सुनकर थक चुके ग्रामीण: स्थानीय मोहन यादव ने आगे कहा कि जब भी यह मुद्दा उठाया जाता है, हमें भरोसा दिलाया जाता है कि समस्या जल्द ही हल हो जाएगी. हम सिर्फ ये वादे सुनकर थक चुके हैं. हम अपनी आजीविका के लिए खेती और मज़दूरी पर निर्भर हैं. हम सरकारी दफ़्तरों के रोज़ चक्कर लगाने के लिए अपना काम नहीं छोड़ सकते.

स्थानीय ग्रामीण मोहन यादव ने कहा, "यह एक बड़ी समस्या है और सड़क तो बननी ही चाहिए. हम ग्रामीणों ने जन-प्रतिनिधियों से लेकर सरकारी अधिकारियों तक, सभी के सामने यह मांग रखी है, लेकिन अब तक हमारी गुहार अनसुनी ही रही है."
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