गोरखपुर में अब नहीं थमेगी दिल की धड़कन: 40 हजार का जीवन-रक्षक इंजेक्शन मुफ़्त, 10 मिनट में होगी ECG
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि स्थानीय चिकित्सकों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 25, 2026 at 5:40 PM IST
|Updated : February 25, 2026 at 6:29 PM IST
गोरखपुर: गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा के अनुसार, अब सीने में दर्द या हार्ट अटैक के लक्षणों वाले मरीजों की 10 मिनट के भीतर ईसीजी की जाएगी. इस रिपोर्ट को तुरंत "स्टेमी केयर नेटवर्क" के व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर किया जाएगा. इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के निर्देशों के आधार पर मरीज का उपचार शुरू होगा.
राज्य सरकार ने हृदय रोग से होने वाली मौतों को रोकने के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल का चयन इस विशेष नेटवर्क के लिए किया है.
ट्रेनिंग और संसाधनों की उपलब्धता: इस पहल के तहत स्थानीय चिकित्सकों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा चुका है. अब प्रमुख अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं स्थापित कर मरीजों की जान बचाने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. यह सुविधा जल्द ही सभी चयनित अस्पतालों में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी. सीएमओ ने बताया कि ईसीजी रिपोर्ट मिलते ही हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह पर 'स्टेमी' का मामला होने पर जरूरी इंजेक्शन लगाया जाएगा.
गोल्डन ऑवर में जीवनरक्षक उपचार: इंजेक्शन लगने के बाद मरीज का एक घंटे तक गहन परीक्षण किया जाएगा. यदि स्थिति गंभीर होती है, तो मरीज को एम्बुलेंस के जरिए तत्काल बीआरडी केंद्र रेफर कर दिया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक घंटे के भीतर मरीज की दो बार ईसीजी होना अनिवार्य है. सारा उपचार हब (बीआरडी) पर बैठे विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में ही संपन्न होगा.

स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: जिले की सभी सात एफआरयू (FRU) इकाइयों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. इससे हार्ट अटैक के मरीजों को उनके घर के पास ही त्वरित प्राथमिक उपचार मिल सकेगा. समय पर मिलने वाले इस उपचार से भविष्य में एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता भी काफी कम हो जाएगी. हर केंद्र पर पांच-पांच जीवनरक्षक इंजेक्शन हर समय उपलब्ध रहेंगे.
महंगे इंजेक्शन और थ्रंबोलिसिस प्रक्रिया: इन विशेष इंजेक्शनों की बाजार में कीमत लगभग 40 हजार रुपये है. इन्हें टेनेक्टेप्लाज (Tenecteplase) और स्ट्रेप्टोकाइनेज (Streptokinase) के नाम से जाना जाता है. यह थ्रंबोलिसिस इंजेक्शन हार्ट अटैक के दौरान जमे हुए खून के थक्के को तोड़कर जान बचाने में मदद करता है. डॉ. झा ने बताया कि 'गोल्डन ऑवर' के भीतर इन दवाओं का उपयोग मरीज के जोखिम को न्यूनतम कर देता है.
पिपराइच सीएचसी में सफल शुरुआत: जिले के पिपराइच सीएचसी स्थित फर्स्ट रेफरल यूनिट पर स्टेमी केयर नेटवर्क पहले ही सक्रिय हो चुका है. हाल ही में सीने में दर्द की शिकायत के साथ पहुंची एक 90 वर्षीय बुजुर्ग का इसी प्रोटोकॉल के तहत उपचार किया गया. जांच के बाद मामला स्टेमी का न होने पर उन्हें आवश्यक प्राथमिक इलाज देकर घर भेज दिया गया. सीएमओ स्वयं सभी स्टेमी कॉर्नर का दौरा कर वहां दवाओं और ईसीजी स्टाफ की उपलब्धता का निरीक्षण कर रहे हैं.
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