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Iran-Israel War : अजमेर शरीफ दरगाह में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर जलसा...

ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर विश्वभर के मुसलमानों में गम और इजराइल के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है.

अली खामेनेई के लिए श्रद्धांजलि सभा
अली खामेनेई के लिए श्रद्धांजलि सभा (ETV Bharat Ajmer)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : March 4, 2026 at 2:58 PM IST

2 Min Read
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अजमेर : विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरबार में दरगाह से जुड़ी खादिमों की संस्था अंजुमन सैयदजादगान की ओर से एक ताजियाती जलसे (श्रद्धांजलि सभा) का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने पर उनकी आत्मा को शांति और उनके अनुयायियों को धैर्य के लिए प्रार्थना की गई.

कार्यक्रम में मौजूद खुद्दामें ख्वाजा और अंजुमन संस्था के पदाधिकारियों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की आत्मा की शांति के लिए दुआ की. इस दौरान क्षेत्र में अमन-चैन और वैश्विक शांति की कामना भी की गई. अंजुमन के प्रतिनिधियों ने कहा कि युद्ध की स्थिति से दुनिया भर में तनाव बढ़ा है और शांति स्थापित होना समय की आवश्यकता है.

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ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर विश्वभर के मुसलमानों में ग़म और इजराइल के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है. राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह पर भी अली खामेनेई के लिए ताजियती जलसा आयोजित किया गया और दुनिया भर के मुसलमानों से एकता की अपील की गई. दरगाह के आहता नूर परिसर में इस जलसे में जबरदस्त नारेबाजी भी की गई. अंजुमन के पूर्व सेकेट्री सैय्यद सरवर चिश्ती ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की इस हरकत के खिलफा और इंसानियत और भाईचारा के लिए भारत को दखल देना चाहिए, क्योंकि ईरान और भारत के हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं.

मौजूदा अंजुमन सेक्रेटरी सैय्यद कलीमुद्दीन चिश्ती ने बताया कि ताजियती जलसा (श्रद्धांजलि सभा) ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की शहादत को लेकर की गई, जिसमें दुनियाभर के मुस्लिमों की सुरक्षा और उम्मते रसूल हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि (समस्त मुस्लिम) को एकजुट होने और नेक होने की विशेष दुआ मांगी गई.

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अंजुमन के पूर्व अध्यक्ष सैय्यद मोइन हुसैन चिश्ती ने कहा कि आयतुल्लाह अली खामेनेई से उनकी मुलाकात 2017 में हुई थी. उनसे मुलाकात का हर पल उन्हें याद आ रहा है और दिल बहुत गमजदा है. अली खामेनेई सिर्फ शिया जमात के ही लीडर नहीं थे, बल्कि तमाम मुसलमानों के लीडर थे. उन्होंने कभी शिया सुन्नी को अलग नहीं समझा और इंसानियत का संदेश दिया. जलसे में दरगाह से जुड़ी संस्थाओं के पदाधिकारियों समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.