प्रयागराज NCR अस्पताल का कमाल: 'सर्कुलर स्टेपलर' तकनीक से बिना टांके जोड़ी मरीज की आंत, 31 साल की महिला को मिली राहत
प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य रेलवे के केंद्रीय चिकित्सालय में 'सर्कुलर स्टेपलर' तकनीक से बिना टांके के आंत जोड़ने का सफल ऑपरेशन किया गया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 10:53 PM IST
प्रयागराज: उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के केंद्रीय चिकित्सालय ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. अस्पताल के डॉक्टरों ने आधुनिक 'सर्कुलर स्टेपलर' तकनीक का इस्तेमाल कर पहली बार बिना किसी पारंपरिक टांके के आंत को दोबारा जोड़ने में सफलता पाई है. इस जटिल ऑपरेशन के बाद 31 साल की मरीज ममता मौर्या को असहनीय परेशानी से मुक्ति मिल गई है, जो पिछले तीन महीनों से स्टोमा बनाकर मल त्याग करने को मजबूर थीं.
चार घंटे चला एंड-टू-एंड कोलोरेक्टल ऑपरेशन: अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, यह ऑपरेशन 24 अगस्त 2026 को किया गया था, जो करीब चार घंटे तक चला. इसे मेडिकल भाषा में 'एंड-टू-एंड कोलोरेक्टल एनास्टोमोसिस' कहा जाता है. इस अत्याधुनिक तकनीक से बिना सुई-धागे के टांके लगाए आंतों को आपस में सुरक्षित तरीके से जोड़ दिया गया. सर्जरी के तीन दिन बाद यानी 27 अगस्त को मरीज ने सामान्य (प्राकृतिक) मार्ग से मल त्याग किया.

मरीज की हालत में सुधार, जल्द मिलेगी छुट्टी: मरीज की हालत अब पूरी तरह ठीक है और उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी. इस बेहद बारीक और जटिल सर्जरी का नेतृत्व एमएलएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शबी अहमद और सेंट्रल हॉस्पिटल के सीनियर रेलवे सर्जन डॉ. संजय कुमार ने मिलकर किया. इस सर्जिकल टीम में डॉ. सौरभ कुमार मौर्य, डॉ. आलोक कुमार यादव सहित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल रहा.
रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा सुपर-स्पेशियलिटी इलाज: अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजीव कुमार हंडू और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र नाथ ने डॉक्टरों की पूरी टीम की पीठ थपथपाई. अधिकारियों ने बताया कि रेलवे अस्पताल में इस तरह की अत्याधुनिक सुविधाओं के शुरू होने से अब मरीजों को बाहरी अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे रेलवे के इलाज खर्च में बचत होगी और कर्मचारियों व उनके परिवारों को अपने ही अस्पताल में बेहतर इलाज मिल सकेगा.
यह भी पढ़ें- नेपाल त्रासदी: बलिया का परिवार हादसे का शिकार, तीन में से दो लोग अब भी लापता

