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साल के आखिरी दिन तेज म्यूजिक नहीं, पिंक सिटी में सुनाई दी रामधुनी की गूंज

प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर न सिर्फ अयोध्या बल्कि छोटी काशी में भी श्रद्धा, भक्ति और दीपोत्सव का आयोजन हुआ.

दीपोत्सव के साथ मनाई गई प्रतिष्ठा द्वादशी
दीपोत्सव के साथ मनाई गई प्रतिष्ठा द्वादशी (फोटो ईटीवी भारत जयपुर)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 1, 2026 at 8:42 AM IST

3 Min Read
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जयपुर : साल 2025 की आखिरी रात देश में जब अधिकांश जगहों पर तेज़ म्यूजिक और दिखावटी जश्न हो रहा था, उसी वक्त गुलाबी नगरी ने संस्कृति और संस्कार का परिचय देते हुए अयोध्या के राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई गई. ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप के बीच सिविल लाइंस में हिंदू संगठनों की ओर से सवा लाख दीपक प्रज्ज्वलित करते हुए सादगी और आस्था के साथ दीपोत्सव मनाया गया.

न बार की चकाचौंध, न डीजे की कान फोड़ने वाली आवाज, बल्कि रामधुनी और लोक संगीत की मधुर लहरियों के साथ सवा लाख दीपक प्रज्ज्वलित करते हुए अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई गई. सिविल लाइंस इलाके में हिंदू संगठनों की ओर से जलाए गए दीपकों से क्षेत्र रोशनी से नहा उठा. लोग परिवार और परिचितों के साथ पहुंचे और दीप जलाकर इस भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो उठे. इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी वर्गों की भागीदारी देखने को मिली. खास बात ये रही कि यहां पहुंचे लोगों ने साल की आखिरी रात शोर-शराबे से दूर, आपसी मेल-जोल और परंपरा के साथ बिताई. बुज़ुर्गों ने खास तौर पर खुशी जताई कि युवा पीढ़ी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ रही है.

सवा लाख दीपक प्रज्ज्वलित (वीडियो ईटीवी भारत जयपुर)

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वहीं इस दौरान मौजूद रहे सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोपाल शर्मा ने बताया कि अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को हुई थी. इसके बाद से इस दिन को प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाया जाता है. प्रतिष्ठा द्वादशी की तारीख में बदलाव पंचांग के अनुसार हुआ है. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा शुभ मुहूर्त को देखते हुए पौष शुक्ल द्वादशी तिथि को की गई थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि 2025 में पहली प्रतिष्ठा द्वादशी 11 जनवरी 2025 को मनाई गई थी और अब दूसरी प्रतिष्ठा द्वादशी 31 दिसंबर 2025 को मनाई जा रही है. उन्होंने बताया कि इस दीपोत्सव का उद्देश्य सिर्फ एक धार्मिक अवसर मनाना नहीं, बल्कि समाज को ये संदेश देना भी है कि नए साल का स्वागत शांति, संस्कृति और सकारात्मकता के साथ किया जा सकता है. प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर न सिर्फ अयोध्या बल्कि छोटी काशी में भी श्रद्धा, भक्ति और दीपोत्सव का आयोजन हुआ. ये तिथि आज न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सनातन संस्कृति का भी प्रतीक बन चुकी है.