'बच्चा-बच्चा जानता है कि 10000 में वोट खरीदा गया', सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद बोले प्रशांत किशोर
सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'उन्हें सबसे ज्यादा बिहार की जनता से ही उम्मीद है.'

Published : February 10, 2026 at 3:20 PM IST
बेतिया: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देने वाली जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुनवाई करने से सर्वोच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायालय जाने को कहा है. अब इस पर पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. 'बिहार नवनिर्माण यात्रा' के दौरान बेतिया में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बात कोर्ट से निराशा की नहीं है. असल बात तो ये है कि जिसको दिक्कत होती है, वही न्यायालय जाता है. लिहाजा अदालत को समस्या सुननी चाहिए. कोर्ट का काम ये नहीं है कि वह ये बताए कि किसको कितना वोट मिला?
कोर्ट से फैसले से निराश हैं पीके?: प्रशांत किशोर ने कहा कि वह न्यायालय और न्यायाधीश का पूरा सम्मान करते हैं लेकिन आदर के साथ ये जरूर कहना चाहेंगे कि न्यायाधीश का तो काम ये है कि जिसके साथ या जिसको लगता है कि उसके साथ अन्याय हो गया, उसके लिए न्यायसंगत बात की जाए. कोर्ट का काम ये नहीं है कि किसको कितना वोट मिला? अगर वोट मिलने की बात है तो 15 लाख से ज्यादा लोगों ने जन सुराज को वोट दिया है तो क्या 15 लाख लोगों का कोई अधिकार नहीं है?
"कोई निराशा नहीं है. कोर्ट ने कहा है कि आप हाईकोर्ट में जाइये, ये मामला हाईकोर्ट का है. ये नया भारत है. नए भारत में जो न्यायाधीश हैं, विद ऑल ड्यू रिस्पेक्ट, वह ये कह रहे हैं कि आप हारे हैं चुनाव, इसलिए मत आइये. अब आप ही बताइये कि कोर्ट में तो वही जाएगा, जिसको दिक्कत होगा. मेरी समझ से न्यायालय का, न्यायाधीश का तो काम ये है कि जिसके साथ या जिसको लगता है कि उसके साथ अन्याय हो गया, उसके लिए न्यायसंगत बात की जाए. कोर्ट का काम ये नहीं है कि किसको कितना वोट मिला?"- प्रशांत किशोर, सूत्रधार, जन सुराज पार्टी
बच्चा-बच्चा जानता है हकीकत: पीके ने कहा कि जज अपनी कुर्सी पर बैठे हैं. जो टीका-टिप्पणी करनी थी, उन्होंने कर दी लेकिन सच तो ये है कि बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है कि बिहार में 10 हजार रुपये देकर सरकार बनाई गई है. यानी 10 हजार रुपये देकर वोट खरीदा गया है.

प्रशांत किशोर ने आगे कहा, 'न्यायाधीश महोदय कर रहे हैं कि हमलोग फ्री बी पर चर्चा कर सकते हैं. मतलब फ्री बी सरकार दे रही है, नहीं दे रही है. देना चाहिए, नहीं देना चाहिए, इसपर चर्चा कर रहे हैं लेकिन जो ब्राइब्री (रिश्वत) है, सीधे वोटर की. 10,000 रुपये देकर जिनका वोट खरीदा गया है, उस पर यहां का न्यायालय या यहां के न्यायाधीश बात नहीं करना चाहते हैं. देश की जनता देख रही है, बिहार की जनता देख रही है. उनको तय करना है.'
हाईकोर्ट से उम्मीद है आपको?: इस सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि बात कोर्ट से उम्मीद की नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारा जो काम है और जो ड्यूटी है, वो काम हमलोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें तो सबसे ज्यादा उम्मीद बिहार की जनता से है.
जन सुराज न पक्ष में है न विपक्ष फिर भी बिहार की जनता को किसी दल से सबसे ज्यादा उम्मीद है तो वो है जन सुराज। मझौलिया चीनी मिल के केमिकल वाले नाले से भानाचाक गाँव के लोग परेशान हैं। गन्ना भरे ट्रैक्टर से गाँव के एक बच्चे की मौत हो गयी, उल्टा गाँव वालों पर ही FIR हो गयी। आज भानाचाक… pic.twitter.com/uQoiWcoIIr
— Jan Suraaj (@jansuraajonline) February 10, 2026
जनता को फैसला लेना होगा: प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर गांव में कोई दिक्कत है तो क्या न्यायाधीश महोदय को दिक्कत है, पुलिस को दिक्कत है या प्रशांत किशोर को दिक्कत है? सबसे ज्यादा दिक्कत तो गांव में रहने वाले लोगों को है. उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपने जीवन की चिंता नहीं करेंगे, बच्चों की चिंता नहीं करेंगे तो कोई क्यों आपकी चिंता करेगा?
क्या है मामला?: असल में जन सुराज ने बिहार चुनाव-2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन उच्चतम न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल के कहने पर चुनाव को पूरी तरह पद्द करने का व्यापक निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है. शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायालय में जाने के लिए कहा है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव की घोषणा के बाद भी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजान के तहत महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए, जोकि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया गया था.
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