सुदिव्य की 'शह' में मात खा गए बाबूलाल के शैलेंद्र, प्रमिला मेहरा को ऐसे मिली ऐतिहासिक जीत
गिरिडीह की महापौर पर प्रमिला मेहरा की जीत हो गई है.

Published : February 28, 2026 at 12:53 PM IST
गिरिडीह: झारखंड मुक्ति मोर्चा की रणनीति के सामने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी को घुटना टेकना ही पड़े. भारतीय जनता पार्टी के समर्थित प्रत्याशी डॉ. शैलेंद्र चौधरी को करारी हार का सामना करना पड़ा. जबकि गिरिडीह नगर निगम को पहली बार महिला महापौर मिलीं. प्रमिला मेहरा गिरिडीह की महापौर चुनी गई हैं. यह जीत बतला रही है कि भाजपा के बड़े नेताओं की कैंपेन के बावजूद निकाय चुनाव में लोगों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित प्रत्याशी प्रमिला मेहरा का खूब साथ दिया.
प्रमिला मेहरा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंन्दी डॉ शैलेन्द्र चौधरी को 14599 मतों से हराया. प्रमिला मेहरा को 38091 तो भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी डॉ शैलेन्द्र चौधरी को 23492 मत मिले. प्रमिला की जीत पर उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला. जीत के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह के साथ प्रमिला बाजार समिति स्थित मतगणना सेंटर पहुंची और जीत का प्रमाण पत्र लिया. इस दौरान प्रमिला ने पत्रकारों से बात की. कहा कि उन्हें गिरिडीह निगम क्षेत्र के सभी वर्ग, जाति, धर्म, समुदाय का समर्थन मिला है. उन्होंने निगम क्षेत्र की जनता को धन्यवाद देते हुए एक सेवक की तरह निगम क्षेत्र में काम करने की बात कही. वहीं मौके पर झामुमो जिलाध्यक्ष ने कहा प्रमिला मेहरा की जीत एक बड़ी जीत है. गिरिडीह निगम क्षेत्र की जनता को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के मंत्री का जो विजन था उसको पूरा करने में सफलता मिली है.
भाजपा ने झोंकी थी पूरी ताकत
प्रमिला की जीत राजनीतिक दृष्टिकोण से कई मायने बतलाती है. उन्होंने कहा कैसे महिला के सामने भाजपा की फौज टिक नहीं सकी. दरअसल चुनावी घोषणा के साथ ही भाजपा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मंत्री राज पालीवार, पूर्व मंत्री सह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रविंद्र राय ने ज्यादातर समय गिरिडीह में ही दिया. वहीं प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, पूर्व विधायक अमित मंडल भी गिरिडीह पहुंचे. कार्यकर्ताओं संग बैठक की लोगों से वोट की अपील भी की. इन नेताओं के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा भी दो दफा गिरिडीह आए. ताबड़तोड़ प्रचार हुआ परन्तु वोटर प्रभावित नहीं हुए.
मंत्री की रणनीति से चारों खाने चित हुए भाजपाई
एक तरफ भाजपा ने पूरी ताकत झोंक डाली तो दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मंत्री सुदिव्य कुमार की रणनीति पर काम करना शुरू किया. मंत्री के साथ जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने संगठन को जोड़कर रखा. हर एक बूथ की मॉनिटरिंग की जाती रही. कार्यकर्ताओं को एकजुट रखा. समाज के हर एक जाति-धर्म के लोगों को विश्वास में लिया और अंततः भाजपा समर्थित प्रत्याशी को हराने में सफलता मिली.
बागियों को मनाने में भी जेएमएम ने बाजी मारी
चुनाव के नामांकन के दौरान भाजपा के तीन तो जेएमएम के साथ कांग्रेस के दो बागी मैदान में आ गए. ऐसे में बागियों को मनाने की चुनौती थी. भाजपा इस चुनौती में फेल रही तो जेएमएम सफल. भाजपा की विफलता इस बात से समझ सकते हैं कि पार्टी से बागी होकर मेयर पद पर खड़े नागेश्वर दास एवं प्रकाश दास अंत समय में न सिर्फ जेएमएम समर्थित प्रमिला मेहरा को समर्थन दिया बल्कि भाजपा को अलविदा कहते हुए मुक्ति मोर्चा के सिपाही बन गए. वहीं भाजपा के बागी कामेश्वर ने तो खुले मंच से पार्टी के राज्य नेतृत्व का जमकर विरोध किया.
यूजीसी भी बना भाजपा की जीत में रोड़ा
भाजपा समर्थित प्रत्याशी की हार और जेएमएम समर्थित प्रत्याशी की जीत में यूजीसी के नियम का भी बहुत बड़ा योगदान रहा. दरअसल इस कानून का विरोध सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा को समर्थन नहीं करने का मन बना लिया था. सवर्ण समाज ने भाजपा को सबक सिखाने की योजना बनायी तो जेएमएम ने इसका सीधा फायदा उठाया. सवर्ण समाज के वोटरों को अपने समर्थन में लाने में मंत्री सुदिव्य के साथ जेएमएम जिलाध्यक्ष कामयाब रहे. अब जब सारे वर्ग के लोग जेएमएम के समर्थन में आए तो शहर में पहली बार भाजपा को पटकनी देने में कामयाब रही. हालांकि बीजेपी ने शहर में एक के बाद एक कई सवर्ण नेताओं को बुलाया लेकिन इनका विशेष प्रभाव नहीं पड़ा. सवर्ण समाज ने काफी हद तक भाजपा से किनारा किया.
हजार पर सिमटी कांग्रेस, भाजपा के बागी का यह हाल
इस चुनाव में कांग्रेस समर्थित समीर राज चौधरी से वोटरों ने किनारा कर लिया. समीर को महज 1084 ही वोट मिले. वहीं भाजपा से बागी होकर चुनावी मैदान में कूदे भाजपा नेता कामेश्वर पासवान को 3787 मत मिले. जबकि अर्जुन बैठा ने 5708 मत प्राप्त किए. इसी तरह जेकेएलएम समर्थित फूल देवी को 2253, भाकपा माले समर्थित गौरव कुमार को 2398, कांग्रेस के बागी योगेश्वर महथा को 912, कृष्णा तुरी को 1969, गोविंद तुरी को 1018, अनिल कुमार दास को 1070, नागेश्वर दास को 748, पंकज कुमार सागर को 418, प्रकाश कुमार दास को 514, प्रदीप पासवान को 976 और बनारसी लाल दास को 637 वोट मिले.
ये भी पढ़ें:
धनबाद नगर निगम चुनाव में विकास कार्यों के श्रेय पर सियासी संग्राम, जेएमएम और भाजपा आमने-सामने
अल्पसंख्यक सिर्फ वोट देने के लिए नहीं है, हमें भी अपनी हिस्सेदारी चाहिए: मंत्री इरफान अंसारी

