PUBLIC AUDIT: गड्ढे और चोक नालियां बताते हैं प्रयागराज की 'ख़ूबसूरती' ! फुर्सत मिले तो घूम आइए पुराने शहर
फुर्सत मिले तो घूम आइए प्रयागराज के पुराने शहरी इलाकों में. यहां की तस्वीरें बता देंगी कि नगर निगम ने क्या-क्या किए हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 6, 2026 at 10:50 AM IST
|Updated : July 6, 2026 at 10:58 AM IST
प्रयागराज : "मॉनसून सिर पर है और प्रयागराज नगर निगम के दावे हवा-हवाई! जनता का आरोप है कि जो सड़कें बनती हैं, उन्हें अगले ही साल उखाड़ दिया जाता है और हर बार नाले चोक होने से जनता त्रस्त रहती है. इस अव्यवस्था पर क्या कहना है प्रयागराज के स्थानीय लोगों का, सीधे सुनिए उनकी ज़ुबानी...
प्रयागराज के वाशिंदे इरशादुल्लाह कहते हैं कि "देखिए, नगर निगम की तैयारी कुछ भी नहीं है, जीरो है. 0/0 (जीरो बटा सन्नाटा) समझ लीजिए. और मॉनसून हमारे ख्याल से दो-चार-पांच दिन में दस्तक दे देगा. तो शहर के इतने बुरे हालात हैं कि रोड में गड्ढा है कि गड्ढे में रोड है? इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं कि आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं. और रही नाले की और नाले की सफाइयों की बात, तो जो नाले पूरी तरीके से बंद से हो गए कर दिए गए हैं, उसके अंदर उसकी सफाई तो हुई नहीं, उसके अंदर पानी जाने का भी रास्ता नहीं है. ऐसे में सारे पानी रोड पर होंगे और जलभराव होगा."
इरशादुल्लाह यहीं नहीं रुकते हैं, वो आगे कहते हैं कि "पूरा नगर निगम अभी तक कुंभकर्णी नींद सो रहा है. इनको किस तरह से जगाया जाए, समझ में नहीं आ रहा है. बारिश होते ही हालात अभी बहुत भयावह होने वाले हैं."
शहर का दर्द बयां करते हुए इरशादुल्लाह कहते हैं कि "हालात बुरे हैं, शहर के कई इलाकों में इतने गड्ढे हैं कि आप चल भी नहीं सकते हैं. वो कहते हैं कि आप मेन रोड पे चले जाइए, तो आपको चमचमाती रोड मिलेगी. मगर शहर के अति व्यस्ततम इलाकों, जैसे पुरानी बस्तियांं कल्याणी, करेली में सड़कों के हालात बहुत बुरे हैं. प्रयागराज नगर निगम को लेकर वो कहते हैं कि निगम के दावे पूरी तरीके से फेल हैं."

स्थानीय निवासी पवन कहते हैं कि "देखिए, प्रयागराज वैसे तो पूरे विश्व के पटल पर प्रयागराज का नाम है, लेकिन अब जिस तरीके से यहां काम होता है, वो समझ से परे है. मॉनसून आते ही शहर की सूरत बिगड़ जाएगी. बीते वर्ष यहां पर महाकुंभ जैसा दुनिया का सबसे बड़ा भव्य आयोजन किया गया, लेकिन यहां पर सड़कों पे कहीं ना कहीं मरम्मत का कार्य चलता रहता है."

पवन कहते हैं कि "नगर निगम लगातार कार्य करता हुआ नज़र आ रहा है, लेकिन जब मॉनसून आते ही सब कुछ बिखर-सा जाता है. कहीं नाला जाम हो जाता है, तो कहीं नालियां चोक हो जाती हैं. जलभरवा तो आम बात है. इसको ठीक करने के लिए निश्चित रूप से नगर निगम को अपनी कार्यक्षमता को बढ़ानी पड़ेगी. तभी जाकर ज़मीनी स्तर पर काम हो सकेगा. अगर हम बीते वर्षों की बात करें तो नगर निगम की तैयारी कहीं ना कहीं, ज़मीनी स्तर पर फेल नज़र आती है."

बगैर रुके पवन कहते हैं कि "मौजूदा शहर के हालात की बात करें, तो शहर में आप जिधर देखेंगे, रोड पे कहीं ना कहीं काम चल रहा है. समझ में नहीं आता है कि नगर निगम किस तरीके से कार्य करवाता है. जो सड़कें बनाई जाती हैं, उसको अगले साल फिर उखाड़ दिया जाता है, फिर उसपे कार्य शुरू होता है. कहीं डिवाइडर उखड़े नजर आते हैं, कहीं गड्ढे नजर आते हैं, कहीं नालियां जाम नजर आती हैं."
वहीं शहर के ताज़ा हालात को लेकर नगर निगम के अधिकारी कहते हैं कि पिछले साल से अबकी बार और बेहतर व्यवस्था है. लोगों को बहुत कम मुश्किल का सामना करना पड़ेगा.

इस तरह से देखें तो पब्लिक प्रयागराज को चाक-चौबंद चाहती है. साफ-सुथरा चाहती है. वैसे तो हालात देखकर संभव नहीं है. प्रदेश में मॉनसून आ ही गया है... कल रविवार को हल्की फुहारें भी पड़ी हैं. अब देखना है कि नगर निगम के दावे में कितना दम रहता है, जब शहर में इस बारिश के मौसम की पहली तगड़ी बरसात होगी.

