सतलुज में गाद से संभावित खतरों की पहचान करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट जमा करने के निर्देश
सुन्नी डैम जलविद्युत परियोजना नदी में गाद से जुड़े गंभीर मुद्दों और सुन्नी में इसके असर को बताने वाली फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट पर चर्चा.

By PTI
Published : February 22, 2026 at 1:41 PM IST
शिमला: सतलुज नदी में गाद से संभावित खतरों को देखते हुए शिमला जिला प्रशासन एक्टिव मोड में है. इसी कड़ी में जिला शिमला के डिप्टी कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन अनुपम कश्यप ने शनिवार को सुन्नी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को सतलुज नदी में गाद से संभावित खतरों की पहचान करने और एक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया, ताकि ड्रेजिंग ऑपरेशन जल्द से जल्द शुरू हो सके. यहां सतलुज नदी में गाद के बारे में एक रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, उन्होंने अलग-अलग सेक्टर– हाउसिंग, ज़मीन, पानी की स्कीम, बिजली, सड़क, सीवरेज और जानवरों के शेल्टर पर इसके असर पर एक डिटेल्ड रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए, यहां जारी एक बयान में कहा गया.
सतलुज में गाद से खतरा को लेकर बैठक
बैठक में सुन्नी डैम जलविद्युत परियोजना नदी में गाद से जुड़े गंभीर मुद्दों और सुन्नी इलाके में इसके असर को बताने वाली फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. सुन्नी के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा ने कहा कि, सुन्नी तहसील के तहत आने वाले अनु और लुनसू मोहल्लों के बीच के हिस्से को जो लुनसू को करसोग तहसील से जोड़ने वाले सस्पेंशन ब्रिज के पास है. सेंसिटिव एरिया के तौर पर नोटिफाई किया जाना चाहिए.
नदी से निकाली गई गाद को स्टोर करने पर चर्चा
सुन्नी के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा ने बताया कि निकाली गई गाद को स्टोर करने और डिस्पोजल के लिए सतलुज के बाएं किनारे पर जमीन की पहचान कर ली गई है. डिप्टी कमिश्नर अनुपम कश्यप ने कहा कि सुन्नी में सतलुज नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए गाद एक बड़ी चिंता का विषय है, जिससे उनके घरों और जान को खतरा है. उन्होंने एक रिपोर्ट मांगी है ताकि इस बारे में तुरंत एक्शन लिया जा सके.
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