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हरियाणा में आलू के रेट में भारी गिरावट, तबाही की कगार पर किसान, चढ़ूनी ने CM को लिखा पत्र, भावांतर भरपाई की उठी मांग

हरियाणा में आलू के रेट गिरने से किसान घाटे में है. इसे लेकर किसान नेता चढ़ूनी ने सीएम तो पत्र लिखा है.

Potato Prices Crash in Haryana
हरियाणा में आलू के रेट में भारी गिरावट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : December 27, 2025 at 4:47 PM IST

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Updated : December 27, 2025 at 5:24 PM IST

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कुरुक्षेत्र: हरियाणा में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है. राज्य में सबसे अधिक आलू कुरुक्षेत्र में उगाया जाता है. कुरुक्षेत्र की पिपली अनाज मंडी हरियाणा की सबसे बड़ी आलू मंडी मानी जाती है. यहां कुरुक्षेत्र के साथ-साथ आसपास के जिलों के किसान भी अपनी फसल बेचने के लिए पहुंचते हैं. हालांकि इस बार आलू के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. यही कारण है कि किसान बुरी तरह संकट में आ गए हैं. आलम यह है कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकल पा रहे हैं. ऐसी स्थिति पिछले करीब 10 वर्षों में पहली बार देखने को मिली है.

चढ़ूनी ने CM को लिखा पत्र: आलू के लगातार गिरते दामों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है.

Potato Prices Crash in Haryana
तबाही की कगार पर किसान (ETV Bharat)

"10-15 साल बाद रेट में आई इतनी गिरावट": हालात को जानने के लिए ईटीवी भारत की टीम हरियाणा की सबसे बड़ी आलू मंडी पिपली पहुंची. टीम ने मंडी में किसानों और कमीशन एजेंटों से बातचीत कर आलू के मौजूदा भाव और मंडी के हालात की जानकारी ली. मंडी में मौजूद किसान गुरजीत सिंह ने कहा कि, " हमने 14 एकड़ आलू लगाया हुआ है. एक वैरायटी को छोड़कर सभी वैरायटी के दाम बहुत कम मिल रहे हैं. ₹250 प्रति क्विंटल के हिसाब से आलू जा रहा है. यह करीब 10 - 15 सालों बाद इतना कम रेट किसानों को आलू का मिल रहा है. हमने एक एकड़ आलू की खेती में करीब ₹40000 खर्च किया है, लेकिन हमारे एक एकड़ से करीब 20000 रुपए का आलू निकल रहा है. इससे हमें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है."

आलू के रेट में भारी गिरावट (ETV Bharat)

भावांतर भरपाई योजना को दुरुस्त करने की उठी मांग: वहीं, करनाल से आए हुए एक और किसान श्यामलाल ने ईटीवी भारत से कहा कि, " हमने 16 एकड़ में आलू की खेती की हुई है. हम करनाल यहां पर आलू बेचने के लिए आते हैं. कुछ दिनों पहले₹600 प्रति क्विंटल के हिसाब से आलू बिका था. कल ₹400 के प्रति क्विंटल के हिसाब से आलू बिका था, लेकिन आज के रेट ढाई सौ से ₹300 प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल रहे हैं. एक एकड़ में करीब 45000 रुपए आलू की खेती में खर्च किया हुआ है, लेकिन उसके आधे रेट में हमारे आलू 1 एकड़ से निकल रहे हैं. इसेसे तो हमारा खर्च भी नहीं निकल रहा है. मेरी सरकार से अपील है कि भावांतर भरपाई योजना को थोड़ा दुरुस्त किया जाए, ताकि किसानों को इस नुकसान से बाहर निकाला जा सके. वरना किसान बर्बाद होने की कगार पर है."

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भावांतर भरपाई योजना को दुरुस्त करने की उठी मांग (ETV Bharat)

"बर्बादी की कगार पर किसान":वहीं, आलू के रेट के बारे में पिपली अनाज मंडी के पूर्व प्रधान राजीव गोयल ने बताया कि, "हरियाणा में 80% पुखराज आलू की वैरायटी लगाई जाती है.पुखराज वैरायटी का इस बार रेट ₹250 प्रति क्विंटल से लेकर ₹400 प्रति क्विंटल है. ज्यादातर 250 से ₹300 प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है. वहीं, आलू की कुफरी मोहन वैरायटी की बात करें तो उसका रेट ₹400 प्रति क्विंटल से लेकर 450 रुपए प्रति क्विंटल है. लेकिन यह बहुत कम मात्रा में लगाया गया है.एक नई वैरायटी 7008 है, उसका रेट कुछ इससे अच्छा है, लेकिन वह खाने के लायक आलू नहीं है. वह चिप्स इत्यादि के लिए लगाया जाता है. उसकी भी हरियाणा में बहुत कम खेती की गई है. मुख्य वैरायटी पुखराज होती है और उसमें ही किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. यह अब तक कि पिछले 10 सालों की सबसे बड़ी आलू के रेट की मंदी देखी जा रही है, जिससे किसान बर्बादी के कगार पर हैं. उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है."

"पिछले साल सही थे रेट": पिपली अनाज मंडी के पूर्व प्रधान राजीव गोयल ने आगे कहा कि, "बात अगर पिछले साल की करें तो आलू के रेट ठीक थे, जिसके चलते आलू का रकबा इस बार ज्यादा है. इस वजह से आलू के दाम गिर गए हैं. भावांतर भरपाई योजना के तहत आलू में किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है. इसमें ₹600 प्रति क्विंटल के हिसाब से आंकलन लगाकर किसानों की भरपाई की जाती है, लेकिन इसमें भी किसान को कुछ ज्यादा फायदा नहीं होता. भावांतर भरपाई योजना वाला पोर्टल भी अच्छे से काम नहीं कर रहा. कुछ किसानों के उस पर दस्तावेज अपलोड होने में समस्या हो रही है."

Potato Prices Crash in Haryana
10-15 साल बाद रेट में आई इतनी गिरावट (ETV Bharat)

किसान नेता का सीएम को पत्र: भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इसे लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि, "हरियाणा की मंडियों में आलू के भाव में और गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सफेद आलू उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है. इसके बावजूद भावान्तर भरपाई योजना अब तक लागू नहीं की गई, जो किसानों के साथ अन्याय है." भाकियू (चढ़ूनी) के अनुसार प्रदेश की अधिकांश मंडियों विशेषकर पंचकूला, सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर, अम्बाला तथा कुरुक्षेत्र की पिपली, शाहाबाद, बैबन आदि मंडियों में सफेद आलू के भाव लगातार गिर रहे हैं और यह भाव किसानों की उत्पादन लागत से काफी नीचे चले गए हैं."

किसानों को भारी नुकसान: भारतीय किसान यूनियन ने हरियाणा सरकार को पत्र में लिखा कि, "दूसरी ओर लाल आलू का भाव अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है, जिससे मंडियों का औसत/मोडल के कारण भाव ऊपर दिखाया जा रहा है. इसका सीधा नुकसान सफेद आलू उत्पादक किसानों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि इसी औसत के आधार पर उन्हें भावान्तर भरपाई योजना से बाहर किया जा रहा है. जब सफेद आलू का वास्तविक विक्रय मूल्य बेहद कम है, तो उसे लाल आलू के साथ जोड़कर औसत निकालना सरासर अन्याय है."

यूनियन का आरोप:यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि आलू की फसल मंडियों में आने के बावजूद पोर्टल पर किसानों द्वारा पंजीकृत फसल का सत्यापन अभी तक पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण ई-खरीद पोर्टल पर कोटा जारी नहीं हो पा रहा और मंडियों में ऑनलाइन गेट पास नहीं कट रहे. इससे किसानों को मजबूरी में औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ रही है.

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) की प्रमुख मांगें:

  • लाल और सफेद आलू के लिए अलग-अलग मूल्य/औसत निर्धारण किया जाए.
  • भावान्तर भरपाई की गणना वास्तविक मंडी विक्रय मूल्य के आधार पर की जाए.
  • पोर्टल पर पंजीकृत आलू फसल का तत्काल सत्यापन कराया जाए.
  • ई-खरीद पोर्टल पर कोटा जारी कर ऑनलाइन गेट पास व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए.
  • भावान्तर भरपाई योजना को अविलंब लागू किया जाए.

भाकियू (चढ़ूनी) की चेतावनी: भाकियू (चढ़ूनी) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो सफेद आलू उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागों की होगी. यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन को आंदोलनात्मक रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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Last Updated : December 27, 2025 at 5:24 PM IST