पोटाकेबिन की छात्रा की मौत पर सियासत तेज, कांग्रेस ने बनाई जांच टीम, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
पीसीसी चीफ दीपक बैज के निर्देश पर कांग्रेस की 7 सदस्यीय टीम जांच के लिए पोटाकेबिन जाएगी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 18, 2025 at 3:34 PM IST
बीजापुर: बीते दिनों पोटाकेबिन में रहकर पढ़ाई वाली छात्रा की मौत अस्पताल में हो गई थी. परिजनों का आरोप था कि बच्ची को समय पर इलाज नहीं मिला. परिजनों का कहना था कि अगर समय पर बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया होता, तो बच्ची की जान बच सकती थी. मृतक छात्रा कुमारी मनीषा सेमला छठी कक्षा में पढ़ती थी. बीमार होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
आदिवासी बच्ची की मौत पर गर्माई सियासत
आवापल्ली पोटाकेबिन की छात्रा की मौत के बाद जिले के सियासी पारा भी गर्मा गया है. बीजापुर जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष और कांग्रेस पार्टी के नेता कमलेश कारम ने घटना पर दुख जताया है. कमलेश कारम ने कहा कि घटना अत्यंत दुखद है. इस बात की जांच होनी चाहिए कि पोटाकेबिन आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा मनीषा सेमला की मौत कैसे हुई. कांग्रेस नेता ने मांग की है कि जो भी जिम्मेदार जांच के दायरे में उनसे पूछताछ की जानी चाहिए, दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि पोटाकेबिन में रहकर जो बच्चे पढ़ते हैं उनके परिजन अपने बच्चों की चिंता में परेशान हैं.
हमारे जिले में जितने भी आवासीय विद्यालय, आश्रम और छात्रावास हैं, वहां पर लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं. जिनके बच्चे यहां पढ़ते हैं वो अपने बच्चों की चिंता में परेशान हो रहे हैं. आवासीय विद्यालयों में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं. प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही के चलते अक्सर पोटाकेबिन से इस तरह की दुखद खबरें सामने आती रहती हैं: कमलेश कारम, पूर्व उपाध्यक्ष, जिला पंचायत, बीजापुर
आवापल्ली पोटाकेबिन की अधीक्षिका पर गंभीर आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि छात्रा मनीषा सेमला जब बीमार थी तब भी पोटाकेबिन की अधीक्षिका कमला ककेम ने उसका इलाज नहीं कराया. जब छात्रा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई, तब उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. तबतक काफी देर हो चुकी थी. कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि पोटाकेबिन की अधीक्षिका की लापरवाही के चलते बच्ची की जान गई है. आश्रम अधीक्षिका ने अगर समय पर बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा दिया होता तो इस दुखद स्थिति को टाला जा सकता था. कांग्रेस ने आश्रम अधीक्षिका पर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को अगर भविष्य के लिए टालना है तो जिम्मेदार पर कड़ी कार्रवाई करना जरुरी है.
कांग्रेस पार्टी ने कार्रवाई की मांग
कांग्रेस ने कहा कि गरीब ग्रामीणों के बच्चे वहां पढ़ने जाते हैं. नक्सल पीड़ित और नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चे वहां पढ़ते हैं. परिवार के लोग शासन प्रशासन पर भरोसा कर बच्चों को वहां भेजते हैं. लेकिन जब बच्चे उनके वहां भी सुरक्षित नहीं रहेंगे तो ग्रामीण क्या करेंगे.

पार्टी ने बनाई 7 सदस्यीय जांच टीम
कांग्रेस पार्टी ने अब छात्रा की मौत को लेकर अपनी एक जांच टीम बनाई है. 7 सदस्यीय जांच टीम में स्थानीय नेताओं के नाम शामिल हैं. जांच टीम में शामिल नेता आवापल्ली पोटाकेबिन जाकर मामले की जांच करेंगे. बच्ची के परिजनों से भी कांग्रेस की जांच टीम मुलाकात करेगी. कांग्रेस की टीम पोटाकेबिन में पढ़ रही बच्चियों से बातचीत कर उनको मिल रही सुविधाओं की जानकारी लेगी. दरअसल, छाता मनीषा सेमला की मौत के बाद पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मामले की जांच के लिए एक टीम बनाने के निर्देश कांग्रेस पदाधिकारियों को दिए थे. जिसके बाद ये टीम गठित की गई.
क्या है पोटाकेबिन
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पोटाकेबिन (प्री-फैब्रिकेटेड स्कूल/आश्रम) की शुरुआत की गई.
- नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों को शिक्षा की सुविधा देने के लिए पोटाकेबिन और आश्रम बनाए गए.
- इन आवासीय विद्यालयों में छात्र और छात्राएं रहकर पढ़ाई करते हैं.
- पोटाकेबिन और आवासीय आश्रम की देखरेख सरकार के जिम्मे होती है.
- पढ़ने वालों बच्चों पर जो खर्च होता है उसे सरकार वहन करती है.
- दूर दराज के बच्चों को गांव के पास ही शिक्षा मिल सके इसके लिए भी पोटाकेबिन बनाए गए.
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