तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले मौत के राज, जानें क्या थे डेथ के कारण
जोगीबन क्षेत्र में 23 फरवरी को मादा तेंदुए की मौत हुई थी. अब तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 1:01 PM IST
सिरमौर : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के वन मंडल नाहन के अंतर्गत 23 फरवरी की दोपहर सतीवाला पंचायत के जोगीबन क्षेत्र से रेस्क्यू की गई लगभग दो वर्षीय मादा तेंदुए की मौत के मामले में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने तस्वीर साफ कर दी है. चिकित्सकीय परीक्षण में उसके शरीर पर कई गहरी और अलग-अलग स्थानों पर चोटों की पुष्टि हुई है. वन मंडल नाहन के अनुसार पोस्टमार्टम में विशेषज्ञों का मानना है कि गांव में पहुंचने के बाद गद्दी नस्ल के कुत्तों के हमले और लंबे समय तक बने दबाव ने उसे गंभीर शारीरिक आघात और सदमे में डाल दिया, जिससे उसकी जान चली गई.
तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की शेड्यूल–1 श्रेणी में शामिल है, जिसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है. ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया के तहत वन विभाग ने पूरे मामले की औपचारिक जांच बैठा दी है. वन विभाग यह स्पष्ट करने में जुटा है कि तेंदुआ जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र तक किन परिस्थितियों में पहुंचा. क्या वो शिकार की तलाश में भटका या किसी बाहरी दबाव के कारण गांव की ओर आया? गांव में प्रवेश के बाद उसकी गतिविधियां क्या थीं, क्या उसने अचानक किसी व्यक्ति या पशु पर हमला किया या केवल खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था, इन सभी बिंदुओं की पड़ताल शुरू कर दी गई है. इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि कुत्तों के अलावा किसी अन्य कारक की भूमिका तो नहीं रही. घटनास्थल पर मानव हस्तक्षेप या उकसावे की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा गया है. विभागीय टीम पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को इस जांच में जोड़ेगा.
डीएफओ ने कहा–जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष
वन मंडल नाहन के डीएफओ अवनी भूषण रॉय ने बताया कि 'पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मादा तेंदुए की मौत की वजह मल्टीपल इंजरी और कुत्तों के हमले का सदमा सामने आया है. मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों की गहन समीक्षा की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि तेंदुआ किन हालात में गांव पहुंचा और उसकी मौत की वास्तविक वजह क्या रही.'
बकरियों के बाड़े में घुसा था तेंदुआ
मामला केवल एक वन्यजीव की मौत तक सीमित नहीं माना जा रहा. पोस्टमार्टम में दर्ज चोटों और संभावित सदमे की पुष्टि के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर जंगली जानवर गांव की ओर क्यों रुख कर रहे हैं. पिछले कुछ समय से हिमाचल सहित सिरमौर जिले में तेंदुओं की गतिविधियों में बदलाव दर्ज किया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों का दायरा घटने, प्राकृतिक शिकार की कमी और गांवों के आसपास पालतू पशुओं की मौजूदगी के कारण तेंदुए आबादी के करीब आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि जोगीबन में तेंदुआ एक गोट फार्म में पहुंचा, जहां मौजूद गद्दी कुत्तों ने उसे घेर लिया. बचने के प्रयास में वो एक संकरे कलवर्ट में जा घुसा. लंबे समय तक फंसे रहने और लगातार दबाव ने हालात को गंभीर बना दिया.
रक्षात्मक प्रतिक्रिया या आक्रामकता?
वन्यजीव जानकारों का कहना है कि अधिकांश स्थितियों में तेंदुए का व्यवहार रक्षात्मक होता है. जब जानवर खुद को असुरक्षित या घिरा हुआ महसूस करता है, तो वह स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया देता है. जोगीबन की घटना में भी तेंदुए की हरकतें भय और आत्मरक्षा से जुड़ी मानी जा रही हैं. घंटों तक संकरे स्थान में फंसे रहना, बाहर से लगातार दबाव और चोटें, इन सबने मिलकर उसकी हालत को नाजुक बना दिया.
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