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CM नीतीश कुमार जी.. ये आपके जिले का हाल है, दो कमरों में 421 बच्चों की पढ़ाई, दो शिफ्टों की मजबूरी

नालंदा के उर्दू मध्य विद्यालय में दो कमरों में 421 बच्चों की पढ़ाई हो रही है. शिक्षकों ने अपनी सैलरी से बनवाया बाउंड्री और शौचालय.

Nalanda Balkhi Khanqah Urdu School
उर्दू मध्य विद्यालय बलखी खानकाह (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 14, 2026 at 6:19 PM IST

5 Min Read
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नालंदा: बिहार सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बार-बार दावे किए जाने के बावजूद, नालंदा जिले के बिहार शरीफ शहर के गगन दीवान स्थित उर्दू मध्य विद्यालय बलखी खानकाह की स्थिति बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले में यह स्कूल मात्र दो कमरों में संचालित हो रहा है, जहां कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई दो शिफ्टों में चलती है. बाहरी सूरत में कुछ बदलाव दिखाई देते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी आज भी जस की तस बनी हुई है.

दो कमरों में दो शिफ्टों की मजबूरी: स्कूल में कुल दो कमरे उपलब्ध होने के कारण छात्रों को दो शिफ्टों में बांटकर पढ़ाया जा रहा है. पहली शिफ्ट सुबह 6:30 से 11:30 बजे तक चलती है, जिसमें कक्षा 6 से 8 के छात्र पढ़ते हैं. दूसरी शिफ्ट 11:30 से शाम 4:30 बजे तक होती है, जिसमें कक्षा 1 से 5 के बच्चे शामिल होते हैं. दोनों शिफ्टों में मिलाकर 200 से 250 बच्चे (लगभग 421 छात्र-छात्राएं, जिनमें 141 छात्र और 278 छात्राएं) शिक्षा ग्रहण करते हैं. शिक्षिकाओं नाहिद जहां और शाहीन कहकशां ने बताया कि जगह की भारी कमी के कारण पढ़ाई बाधित हो रही है.

देखें छात्राओं और शिक्षिकाओं की प्रतिक्रिया (ETV Bharat)

अभिभावकों और छात्राओं की पीड़ा: अभिभावक मो. मुर्शिद आलम ने स्कूल प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी जताई. स्कूल तालाब के किनारे स्थित होने से पहले बच्चों को खतरा रहता था. विभाग से मदद न मिलने पर तत्कालीन प्रधानाध्यापक एस.एम. गयासुद्दीन, प्रभारी प्रधानाचार्य मो. शकील और वर्तमान शिक्षकों ने अपनी सैलरी से चंदा इकट्ठा कर बाउंड्री वॉल और शौचालय का निर्माण कराया. इससे छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं को पड़ोस के घरों में शौचालय जाने की मजबूरी खत्म हुई. कक्षा 7 की छात्राएं पलक नाज और अलिजा नाज ने बताया कि ठंड में सुबह 6 बजे घर से निकलना पड़ता है, जिससे परेशानी होती है। वे सरकार से 2-3 अतिरिक्त कमरे बनाने की मांग कर रही हैं.

"ठंड के दिनों में सुबह 6 बजे घर से निकलना पड़ता है, जिससे बहुत परेशानी होती है. कमरा छोटा होने के कारण एक साथ बैठने में दिक्कत होती है. सरकार से मांग है कि स्कूल में कम से कम 2-3 अतिरिक्त कमरे बनाए जाएं ताकि पढ़ाई सुचारू रूप से हो सके."-पलक नाज, छात्रा

Nalanda Balkhi Khanqah Urdu School
प्रार्थना में शामिल बच्चे (ETV Bharat)

शिक्षकों की कमी और ड्यूटी का बोझ: जब टीम स्कूल पहुंची तो मात्र दो शिक्षिकाएं मौजूद थीं, जो बच्चों की लाइव हाजिरी बना रही थीं. कुल 11 शिक्षक (6 पुरुष और 4 महिला, प्रभारी प्रधानाचार्य सहित) हैं, जो दो शिफ्टों में 5-5 के हिसाब से बंटे हैं. अन्य शिक्षक इंटरमीडिएट परीक्षा और अन्य सरकारी ड्यूटियों में व्यस्त रहते हैं. गिने-चुने शिक्षकों के भरोसे ही सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई चल रही है. स्कूल करीब 30 वर्षों से संचालित है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है.

प्रभारी प्रधानाचार्य की अपील: प्रभारी प्रधानाचार्य मो. शकील ने बताया कि कई बार नगर निगम से लेकर शिक्षा पदाधिकारी तक लिखित और मौखिक आवेदन दिए गए, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि 11 शिक्षक मिलकर बच्चों का भविष्य संवारने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भवन अभाव के कारण स्थिति चिंताजनक है. स्थानीय लोगों ने भी जिला प्रशासन से अतिरिक्त भवन निर्माण की मांग की है.

"उर्दू मध्य विद्यालय बलखी खानकाह में मात्र दो कमरों 421 छात्र-छात्राओं में 141 छात्र एवं 278 छात्राएं पढ़ती है. जिनके लिए 6 पुरुष शिक्षक व 4 महिला शिक्षक हैं. इन बच्चों का भविष्य संवारने का प्रयास 11 शिक्षक मिलकर कर रहे हैं. करों की परेशानी को लेकर नगर निगम से लेकर शिक्षा पदाधिकारी तक कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन सभी ओर से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है."-मो. शकील, प्रभारी प्रधानाचार्य

Nalanda Balkhi Khanqah Urdu School
उर्दू मध्य विद्यालय बलखी खानकाह (ETV Bharat)

शिक्षा विभाग का आश्वासन: जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने मामले की जानकारी मिलने पर कहा कि भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा और जल्द प्रक्रिया पूरी कर बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा. हालांकि, बिहार शरीफ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अंशू कुमारी ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

"सूचना मिली है, भवन बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा. जल्द प्रक्रिया पूरी कर बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था प्रदान कराने का प्रयास किया जाएगा."-आनंद विजय, जिला शिक्षा पदाधिकारी

सरकारी दावों और हकीकत में अंतर: बिहार सरकार शिक्षा में निवेश और सुधार के दावे करती रही है, लेकिन नालंदा जैसे जिले में ऐसे स्कूलों की स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती है. दो कमरों में दो शिफ्टों से चल रहे इस स्कूल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर उनकी दिनचर्या और भविष्य पर पड़ रहा है.

बच्चों के भविष्य पर खतरा: यह स्कूल सिर्फ एक उदाहरण नहीं, बल्कि बिहार की ग्रामीण और शहरी शिक्षा व्यवस्था की कई कमियों को उजागर करता है. छात्र-छात्राएं बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं ताकि वे भी अपना भविष्य संवार सकें. यदि समय रहते अतिरिक्त कमरे और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो सैकड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में जा सकता है. स्थानीय समुदाय और अभिभावक अब ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.

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