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सिस्सू में कचरे पर सख्त हुआ प्रदूषण विभाग, साडा प्रबंधन को लगाया इतने लाख का जुर्माना

साडा एरिया सिस्सू में कचरे के ढेर पर प्रदूषण विभाग सख्त हुआ है. जगह-जगह कूढ़े के ढेर के कारण प्रदूषण विभाग ने जुर्माना लगाया है.

साडा पर प्रदूषण विभाग ने लगाया जुर्माना
साडा पर प्रदूषण विभाग ने लगाया जुर्माना (FILE PHOTO)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 16, 2026 at 6:59 PM IST

7 Min Read
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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के शीत मरुस्थल के नाम से जाने जाना वाला जिला लाहौल स्पीति के प्रवेश द्वार सिस्सू में कचरा प्रबंधन को बेहतर न पाए जाने को लेकर हिमाचल प्रदेश प्रदूषण विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. हिमाचल प्रदेश प्रदूषण विभाग ने स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के क्षेत्र में कचरे के उचित निपटान और जगह-जगह गंदगी के लगे हुए ढेर को देखते हुए एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है.अब साडा अथॉरिटी को प्रदूषण बोर्ड को यह जुर्माना भी भरना होगा.

सिस्सू में साल 2020 में साडा बैरियर भी शुरू किया गया था, ताकि यहां पर्यटन के साथ-साथ कचरे के निपटान को लेकर उचित कदम उठाए जा सकें, लेकिन बीते दिनों हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण बोर्ड की टीम ने जब यहां का निरीक्षण किया तो सफाई व्यवस्था बेहतर न होने के चलते अब यह जुर्माना लगाया गया है. जिला लाहौल स्पीति में अटल टनल के पास के क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (SADA) का गठन मुख्य रूप से 3 अक्टूबर 2020 को किया गया था.

लाहौल घाटी के सिस्सू क्षेत्र में कचरा निष्पादन को लेकर खामियां उजागर हुई थीं. इसको लेकर विशेष क्षेत्र प्राधिकरण पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है. टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया था. खामियां उजागर होने पर इसकी रिपोर्ट राज्य प्रदूषण बोर्ड को भेजी थी.-सुनील शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कुल्लू.

क्या है साडा

स्पेशल एरिया डवलेपमेंट अथॉरिटी (Special Area Development Authority - SADA) एक वैधानिक निकाय है, जो किसी राज्य में अनूठी भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक या ऐतिहासिक महत्व वाले विशिष्ट क्षेत्रों के योजनाबद्ध और टिकाऊ विकास के लिए काम करता है. यह नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम (Town and Country Planning Act) के तहत गठित किया जाता है. अथॉरिटी का अध्यक्ष जिला के उपयुक्त होते हैं. अध्यक्ष की नियुक्ति मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है. मुख्यमंत्री स्थानीय विधायक, मंत्री को भी इसका अध्यक्ष बना सकता है.

कचरा प्रबंधन सही न होने पर लगा जुर्माना
कचरा प्रबंधन सही न होने पर लगा जुर्माना (FILE PHOTO)

बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से लिया जाता है टैक्स

अटल टनल के उद्घाटन के बाद घाटी में बढ़े पर्यटकों के दबाव और अनियोजित निर्माण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इसे लागू किया गया था. यह व्यवस्था अटल टनल के साथ लगते घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थल सिस्सू जैसे प्रमुख स्थानों के सुनियोजित विकास के लिए शुरू की गई थी. इसे लागू करने के लिए अटल टनल के साउथ पोर्टल के साथ ही एक बेरियर स्थापित किया गया है, जहां पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से टैक्स लिया जाता है, ताकि उस राशि से क्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण में इस्तेमाल किया जा सके. इसके अलावा साडा शुल्क से घाटी में पर्यटन के कारण नदी-नालों के किनारे फैलने वाले कचरे को रोकने के लिए ठोस एवं तरल कचरा संयंत्र स्थापित किया जा सके, ताकि यहां आने वाले सैलानियों को कचरा जैसी समस्या का सामना न करना पड़ सके. इसके अलावा नगर एवं ग्रामीण नियोजन विभाग के तहत भवनों के निर्माण और स्वच्छता सुनिश्चित करना है, ताकि आने वाले समय में यहां पर व्यवस्थित तरीके से होटल, होमस्टे तथा घरों को बनाया जा सके.

साडा के उद्देश्य

यह विशेष क्षेत्रों (जैसे पर्यटन स्थल, पहाड़ी क्षेत्र) में नियोजित बुनियादी ढांचे (Infrastructure), सड़कों, और आवास का विकास करता है. अथॉरिटी के द्वारा स्थानीय विकास, कचरा प्रबंधन को लेकर कार्य किया जाता है और इसके लिए उसे इलाके में चल रही पर्यटन गतिविधियों और अन्य इकाइयों से भी फंड एकत्र किया जाता है. व्यावसायिक गतिविधियों पर भी शुल्क लगाकर क्षेत्र के विकास के लिए फंड एकत्र करना है. इसके अलावा इलाके में बैरियर के माध्यम से बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से भी प्रवेश शुल्क लिया जाता है. साडा के तहत जो भी कार्य होते हैं. उन सभी कार्यों को स्वीकृति साडा के तहत बनाई गई कमेटी की होती है.

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सिस्सू में की गई है साडा की स्थापना (FILE PHOTO)

साडा के कार्य

साडा का मुख्य कार्य उसे पूरे इलाके को बेहतर तरीके से विकसित करना होता है, ताकि उस इलाके के पर्यावरण और अन्य किसी प्रकार की गतिविधियों से नुकसान ना हो सके. इसके मुख्य कार्यों में मास्टर प्लान तैयार करना, भवनों के नक्शे को पास करना, भूमि उपयोग को विनियमित करना और विकास योजनाओं को मंजूरी देना शामिल है. कुल मिलाकर जब कोई क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा हो या जहां कोई अन्य विकास प्राधिकरण न हो, वहां सुनियोजित विकास के लिए SADA का गठन किया जाता है.

2024 कोकसर पंचायत पर लगा था जुर्माना

गौर रहे कि इससे पहले वर्ष 2024 में सिस्सू के साथ लगती कोकसर पंचायत में भी कचरा प्रबंधन को लेकर बड़े स्तर पर खामियां उजागर हुई थीं. यह मामला एनजीटी तक जा पहुंचा था. उस दौरान भी एनजीटी की सख्ती के बाद उस समय भी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इलाके का दौरा किया था. टीम ने कोकसर पंचायत को एक लाख रुपये जुर्माना लगाया था, लेकिन अब विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन करने करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त हो गया है.
बढ़नी चाहिए मूलभूत सुविधाएं

लाहौल घाटी के स्थानीय निवासी प्रेम लाल का कहना हैं कि 'जब साडा बैरियर पर बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों से प्रवेश शुल्क लिया जाता है तो उनके लिए व्यवस्था करना भी प्राधिकरण का काम है. सैलानी यहां पर पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं और स्थानीय कारोबारी को भी इससे फायदा हो रहा है. ऐसे में प्रशासन को भी चाहिए कि वो यहां पर मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाएं और ठोस कचरे के निष्पादन के लिए भी संयंत्र की व्यवस्था करे, ताकि स्थानीय लोगों को भी कचरा निष्पादन में मदद मिल सके.'

साडा पर प्रदूषण विभाग ने लगाया जुर्माना
साडा पर प्रदूषण विभाग ने लगाया जुर्माना (FILE PHOTO)

लाखों में पहुंची पर्यटकों की संख्या

पर्यटन नगरी मनाली में अटल टनल बनने के बाद सैलानियों की संख्या लाहौल घाटी में लाखों में पहुंच गई है. सैलानी मनाली के सोलंग नाला, अटल टनल होते हुए लाहौल घाटी का रुख कर रहे हैं. ऐसे में वहां पर आए दिन कचरे के ढेर भी देखने को मिल रहे हैं. यहां पर कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से कचरे के वीडियो भी प्रसारित किए गए हैं और उन मामलों पर एनजीटी ने पहले भी कार्रवाई की है. अटल टनल बनने के बाद सिस्सू और कोकसर सैलानियों की पहली पसंद बने हुए हैं. मनाली आने वाला सैलानी कोकसर और सिस्सू का रुख करता है, लेकिन स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ने अभी भी यहां पर कचरा निष्पादन को लेकर कोई ठोस कार्य नहीं किया है.

लाहौल घाटी के पर्यटन कारोबारी किशन ठाकुर का कहना है कि 'अटल टनल बनने के बाद सिस्सू और कोकसर पर्यटन स्थल के रूप में पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गए हैं. यहां सैलानी लाहौल घाटी के नजरों का मजा लेते हैं और इससे घाटी में भी पर्यटन कारोबार काफी बढ़ा है, जिससे स्थानीय लोगों को भी काफी फायदा हो रहा है, लेकिन अभी भी यहां पर ना तो कचरे के निष्पादन की कोई ठोस व्यवस्था है और ना ही जगह-जगह पर अभी तक शौचालय बन पाए हैं. इससे सैलानियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. प्रशासन को चाहिए कि वो कचरे के निष्पादन को लेकर बेहतर व्यवस्था करें, ताकि लाहौल घाटी साफ सुथरी रह सके.'

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