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पेसा पर सियासत: दीपक प्रकाश ने नियमावली सार्वजनिक करने की दी चुनौती, सत्तापक्ष ने कहा- फैलाया जा रहा भ्रम

झारखंड में पेसा नियावली को लेकर सियासत जारी है. बीजेपी नेता दीपक प्रकाश ने सीएम हेमंत सोरेन को इसे सार्वजनिक करने की चुनौती दी है.

Politics over PESA in Jharkhand
झारखंड मंत्रालय (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 1, 2026 at 2:44 PM IST

3 Min Read
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रांची: कैबिनेट से पास होने के बाद सरकार अब तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं किया है जाहिर तौर पर पेसा को लेकर सियासत जारी है. विपक्ष सरकार को इस बहाने घेरने में जुटी है वहीं सत्तारूढ़ दल बचाव करने में लगी है. बीजेपी सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री से इसे सार्वजनिक करने की चुनौती दी है.

दीपक प्रकाश ने कहा कि 1996 में भारत के संसद से जनजाति क्षेत्र में स्वशासन स्थापित करने के उद्देश्य से पेसा एक्ट बनाया गया था जिसके आधार पर राज्य में पंचायत चुनाव हुए. वर्तमान राज्य सरकार ने पेसा नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी तो दी है मगर इसमें क्या है इसे जानने का हक राज्य की जनता को है ऐसे में इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया जाना उचित नहीं है.

दीपिक प्रकाश और प्रदीप यादव का बयान (ETV Bharat)

इधर, पेसा के मुद्दे पर विपक्ष के हमले से बचाव के लिए सत्तारूढ़ दल जेएमएम-कांग्रेस-राजद उतर आया है. सरकार के प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस भाजपा पर पलटवार किया है. पार्टी के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा है कि कैबिनेट में जो चीजें पास हो जाती है वह सार्वजनिक होता ही है. आखिर भाजपा को इतनी बेचैनी क्यों है. उन्होंने भाजपा पर भ्रम और अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए जमकर हमला किया है.

23 दिसंबर को हेमंत कैबिनेट में पेसा नियमावली पर लगी थी मुहर

काफी जद्दोजहद के बाद बीते 23 दिसंबर को हेमंत कैबिनेट ने पेसा नियमावली पर मुहर लगाकर बड़ा निर्णय लिया है. राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली पर लगाई गई मुहर के बाद सबकी नजर इसमें आदिवासियों के रूढ़िवादी धार्मिक, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था का प्रावधान होने या ना होने पर टिका हुआ है. जाहिर तौर पर जबतक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं होता तब तक इसके वास्तविक प्रावधान के बारे में कयासों का दौर जारी रहेगा.

गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद सर्वप्रथम झारखंड विधानसभा ने 2001 में झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 पारित किया था, जिसके तहत राज्य के सभी गैर अनुसूचित व अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती व्यवस्था को सुदृढ करना था. मगर इसे आज तक पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा सका है. समय-समय पर
पेसा लागू करने को लेकर मांगे तेज होती रही और इस संदर्भ में न्यायालय के आदेश भी आते रहे.इस मामले में आगामी 13 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है.

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