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मनरेगा का नाम बदलने पर सियासी घमासान, नेता प्रतिपक्ष और डिप्टी सीएम में जुबानी जंग

देश में मनरेगा का नाम बदलने पर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस मोदी सरकार और बीजेपी पर हमलावर है.

Leader of the Opposition Charandas Mahant
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 10, 2026 at 8:04 PM IST

3 Min Read
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महासमुंद: मनरेगा का नाम विकसित भारत जी राम जी योजना कर दिया गया है. कांग्रेस मनरेगा का नाम बदलने को गलत बता रही है. शनिवार को कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार के इस फैसले पर विरोध जताया है. महासमुंद में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने प्रेस वार्ता कर मनरेगा का नाम बदलने को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया है.

गरीबों का कानून है मनरेगा

नेता प्रतिपक्ष चरणदास मंहत ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा संख्या किसानो की है.सरकार उनका विरोध करने के लिए नये नये कृषि कानून लाई.जिसका विरोध कांग्रेस ने किया तब जाकर रुका.इसी तरह आज मनरेगा को जो कि गरीब , श्रमिकों के लिए लाया गया कानून है. वह महात्मा गांधी के नाम पर था. बीजेपी इसे खत्म करना चाहती है.

विकसित भारत जी राम जी योजना पर सियासत (ETV BHARAT)

जब केंद्र में हमारी सरकार थी तब हमने ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा कानून लेकर आए थे. मनरेगा पलायन रोकने का बहुत बड़ा माध्यम था. इसका नाम बदलने को लेकर कांग्रेस इसका विरोध करेगी. इसी कड़ी में कांग्रेस नेता कल से उपवास पर रहेंगे. हम पंचायत स्तर पर जाकर लोगों से प्रस्ताव लेकर दिल्ली सरकार को भेजेंगे. हमारा आंदोलन ब्लॉक , जिला , प्रदेश हर स्तर पर चलेगा- चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़

नए कानून के प्रावधानों का विरोध

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर नए प्रावधान लागू किए गए हैं. इसका हम विरोध करते हैं. इसमें 40 फीसदी हिस्सा राज्य के अंश के हिसाब से देने की बात की गई है. छत्तीसगढ़ में यह 20 हजार करोड़ रुपया होता है. जब पंचायतों में काम करने के लिए पैसा नहीं है तो 20 हजार करोड़ रुपया कहां से आएगा.

डिप्टी सीएम अरुण साव का बयान

डिप्टी सीएम अरुण साव ने विकसित भारत जी राम जी योजना को लेकर कहा कि यह विकसित भारत का रोडमैप है. हमने इस कानून के जरिए 100 दिन के रोजगार को बढ़ाकर 125 दिन किया है. गांव के विकास के लिए राज्य का भी योगदान होता है. मनरेगा के माध्यम से गांव के आवश्यकता की पूर्ति की जा रही है. जलसंचय से लेकर बाकी सुविधाओं की पूर्ति राज्य और केन्द्र सरकार मिलकर करेगी.

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