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अल्पसंख्यकों के नाम पर सभी सुविधाएं मुस्लिम को.. आखिर जैन, सिख, बौद्ध को क्यों भूली सरकार?

अल्पसंख्यकों को लेकर देश में हमेशा से राजनीति होती रही है. इसी बीच बिहार में एक नई बहस छिड़ गई है. पढ़ें

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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 23, 2026 at 8:20 PM IST

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रिपोर्ट: बृजम पांडेय

पटना : बिहार विधानसभा में पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार ने बिहार में सिख समाज को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र मुहैया नहीं कराये जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार ने 27 जनवरी 2014 को पारित अधिसूचना के द्वारा सिखों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया था. लेकिन, इसके बावजूद बिहार में सिख समुदाय को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र मुहैया नहीं कराया जाता है.

बात जब सिख समाज की शुरू हुई तो बिहार में मुस्लिम अल्पसंख्यक के अलावा और भी कई अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं. इसमें जैन धर्म के लोग हैं, बौद्ध धर्म के लोग हैं, ईसाई हैं. ऐसे में क्या सरकार द्वारा बनाए गए अल्पसंख्यक योजनाओं में उनकी भागीदारी होती है. यह बड़ा सवाल है. ईटीवी भारत ने इन सवालों के जवाब को ढूंढने की कोशिश की.

हक देने पर सब कुछ 0 : पिछले 30 साल से सिख समाज का कोई भी नुमाइंदा बिहार विधानसभा में नहीं दिखा है. राजनीतिक पार्टियां तो इनसे वोट लेती हैं लेकिन, उनके समुदाय से किसी उम्मीदवार को नहीं खड़ा किया जाता है. उन्हें टिकट नहीं दिया जाता है. बिहार का पटना साहिब सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली है. यहां पूरे देश से श्रद्धालु आते हैं. राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक इनके प्रकाश उत्सव की जबरदस्त ब्रांडिंग करती है. लेकिन जब बात उन्हें हक देने की होती है तो सब कुछ शून्य होता है.

30 साल से कोई विधायक नहीं : बात उस समय की है जब बिहार झारखंड एक हुआ करता था तो, 1995 में इंदर सिंह नामधारी को संयुक्त बिहार में डाल्टेनगंज से टिकट मिला था. उसके बाद से किसी भी सिख को राजनीतिक दल से टिकट नहीं मिला. शायद वजह यह है कि यह किसी बड़ी जाति के वोट बैंक से नहीं आते हैं. ऐसे में उनकी पीड़ा काफी है.

'हमलोग हमेशा झंडा ढोते हैं' : सिख नेता और राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव सरदार रंजीत सिंह कहते हैं कि उनके समुदाय के लोग सभी दलों से जुड़े हैं. हमेशा उनका झंडा ढोते हैं. हालांकि बदले में आज तक कुछ नहीं मिला. बिहार में हम लोगों को अल्पसंख्यक के रूप में ज़रूर रखा गया है, लेकिन पंजाब में हम लोग अल्पसंख्यक नहीं हैं. अल्पसंख्यक की परिभाषा है कि जिनकी संख्या कम हो वह अल्पसंख्यक होता है.

''बिहार सरकार ने कुछ दिन पहले जातीय गणना कराया था. जिसमें बिहार सरकार का आंकड़ा है कि 14758 सिखों की संख्या है. अल्पसंख्यक समुदाय की सुविधा हमें नहीं मिलती है. बच्चे परीक्षा पास करते हैं, जो छात्रवृत्ति सरकार के तरफ से दी जाती है, वह हमें नहीं मिलती है. हमारा जातीय प्रमाण पत्र नहीं बनता है.''- रणजीत सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ

रणजीत सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ (ETV Bharat)

सरदार रणजीत सिंह आगे बताते हैं कि 1995 में इंदर सिंह नामधारी को टिकट भी मिला था, वह जीते भी थे और बिहार के मंत्री भी बने थे. आज 30 साल हो गए, विधानसभा में कोई भागीदारी नहीं है. हाल में जो विधानसभा का चुनाव हुआ, किसी पार्टी ने किसी सिख समुदाय के एक व्यक्ति को टिकट नहीं दिया. 1974 में कटिहार से सरदार मलेश्वर सिंह को दो बार एमएलसी बनाया गया था. उसके बाद 1986 से लेकर आज तक विधान परिषद में भी कोई सिख समुदाय का व्यक्ति नहीं गया. क्या सिख होना बिहार में गुनाह है?

'सिखों के साथ बिहार में अन्याय होता है' : सरदार रणजीत सिंह ने सवालिए लहजे में कहा कि बताइए अल्पसंख्यक छात्रावास में सिख के कितने बच्चे रहते हैं? क्या सिख छात्रावास बनाया गया है? हमारे जो बच्चे पास करते हैं, सरकार की तरफ से अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को 10000 रुपये छात्रवृत्ति देने की बात है, वह हमें नहीं मिलता है. हमारा जातीय प्रमाण पत्र नहीं बनता है. हम लोग जाते हैं सिख जाति प्रमाण पत्र बनवाने तो कंप्यूटर में वह कॉलम ही नहीं दिया गया है. सिखों के साथ बिहार में अन्याय होता है.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

जैन समाज का अपना दर्द : वहीं, दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय जैन समाज से आने वाले राजेश जैन बताते हैं कि भारत सरकार को पहले यह जानना है कि भारत में माइनॉरिटी कौन है? सिख, बौद्ध, जैन यह माइनॉरिटी समाज में आते हैं. मुख्य रूप से जो जैन समाज है, यह भारत के अल्पसंख्यक समुदाय में से आता है.

राजेश जैन कहते हैं कि देश की पूरी जनसंख्या में सिर्फ 0.05 प्रतिशत आबादी जैन की है. हर राज्य में जैन समाज के बहुत ही कम तादाद में लोग हैं. बिहार में महज 12000 ही कुल आबादी है. बिहार के साथ-साथ कई राज्यों में जैन धर्म का मंदिर, धर्मशाला है जिसकी रक्षा के लिए, जिसकी बातों के लिए, जिसकी सुरक्षा के लिए जब हम अपने सरकार के पास जाते हैं तो वह कभी भी हमें अल्पसंख्यक जानकार व्यवहार नहीं किया जाता है. हम लोगों की बातों को कभी भी अल्पसंख्यक के तौर पर नहीं देखा जाता है.

''हम लोग सरकार से निवेदन करते हैं कि कृपया करके वह बताएं सिख, जैन, बौद्ध माइनॉरिटी के लिए किस प्रकार का लाभ देते हैं और कौन सा लाभ देते हैं? साथ ही यह भी बताया जाए कि किस प्रकार से हम लोग माइनॉरिटी समाज का लाभ ले सकते हैं? सरकार इसको क्लियर करे.''- राजेश जैन

राजेश जैन (ETV Bharat)

AIMIM विधायक की दलील : इस सवाल को जब ईटीवी भारत ने एआईएमआईएम के विधायक मुर्शीद आलम से पूछा तो उन्होंने कहा कि सभी धर्मों में जो संख्या कम है उसको अल्पसंख्यक कहा जाता है. मुसलमान ही अल्पसंख्यक हैं ऐसी बात नहीं है. कई देशों में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, हिंदू अल्पसंख्यक हैं. बांग्लादेश चले जाइए, वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं. पाकिस्तान चले जाइए, वहां हिंदू समाज के लोगों को अल्पसंख्यक कहा जाता है.

''हिंदुस्तान में हमारी आबादी कम है, इसलिए हम लोग अल्पसंख्यक हैं. अल्पसंख्यकों में जो जातियों की कैटेगरी है उसका प्रमाण पत्र हमें मिलता है. मैं अति पिछड़ा हूं तो मुझे अति पिछड़ा का सर्टिफिकेट मिलता है. दर्जी है, उसका सर्टिफिकेट मिलता है. हम लोग थोड़ी संख्या में ही इसलिए हम लोगों को अल्पसंख्यक कहा जाता है.''- मुर्शीद आलम, विधायक, एआईएमआईएम

एआईएमआईएम विधायक मुर्शीद आलम (ETV Bharat)

'अल्पसंख्यक करके कोई सर्टिफिकेट नहीं' : हालांकि, जब विधायक से यह पूछा गया कि क्या सिख, जैन, बौद्ध भी अल्पसंख्यक होते हैं, उनको भी वह सुविधा मिलती है? इस पर उन्होंने कहा कि वह भी अल्पसंख्यक हैं, उनको भी वही सुविधाएं मिलती हैं जो हमें मिलती हैं. यहां जिस जाति की संख्या कम है वह अल्पसंख्यक है. मुर्शीद आलम आगे कहते हैं कि सरकार हर अल्पसंख्यक के लिए योजनाएं चला रही है. जातियों का सर्टिफिकेट मिलता है. अल्पसंख्यक करके कोई सर्टिफिकेट नहीं मिलता है और देने की जरूरत भी नहीं है और ना हम लोगों ने कभी मांग की है.

वरिष्ठ पत्रकार और जानकार अरुण कुमार पांडे बताते हैं कि आबादी के मुताबिक अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक की गिनती होती है. पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. आप बिहार प्रदेश की बात कर रहे हैं तो 500 करोड़ बिहार के खजाने से खर्च करके जातिगत गणना कराई गई थी. इसमें 215 जातियों को वर्गीकृत किया गया. बिहार में मुस्लिम लगभग 18% हैं.

''नियम के अनुसार, जिनकी संख्या कम होगी, उन्हें अल्पसंख्यक कहा जाता है. मुश्किल से आधे प्रतिशत में सिख और जैन की आबादी है, तो वह भी अल्पसंख्यक हैं. चूंकि मुसलमान अधिक संख्या में हैं तो, वह बड़ा वोट बैंक माने जाते हैं. वोट की राजनीति में आबादी और जाति बंट जाती है. राजनीति में कोई इन्हें साधता है तो कोई निशाने पर लेता है.''- अरुण कुमार पांडे, वरिष्ठ पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडे (ETV Bharat)

वोट बैंक की राजनीति : अरुण कुमार पांडे कहते हैं कि यदि भारतीय जनता पार्टी की बात करेंगे तो इन्हें अल्पसंख्यकों से किसी को कोई मतलब नहीं है. वह हिंदू वोट की राजनीति करते हैं. दूसरी पार्टियां कांग्रेस, राजद, जदयू अल्पसंख्यक वोट को साधने के लिए सब कुछ करती हैं. अल्पसंख्यक कल्याण के लिए अलग मंत्री बनाए हुए हैं. आयोग भी बनाया गया है, उसमें सिख प्रतिनिधि भी हैं. हालांकि ऐसा नहीं है जिसकी बहुसंख्यक आबादी है, जिससे राजनीति साधी जाती है उसी को साधने की तैयारी होती है.

''अल्पसंख्यक को सारी सुविधाएं मिलती है. लेकिन, सिख और जैन के लिए कोई सुविधा या अलग से चिन्हित कोई छात्रावास नहीं बनाया जाता है. उसमें मुस्लिम छात्र ही रहते हैं. सर्टिफिकेट जैसी कोई बात नहीं होती है कि उनको अल्पसंख्यक का सर्टिफिकेट मिले जो जाति प्रमाण पत्र है, वही मिलता है. वह जैन है तो मतलब वह अल्पसंख्यक हैं. सरदार हैं तो अल्पसंख्यक है.''- अरुण कुमार पांडे, वरिष्ठ पत्रकार

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