बेनीवाल के नोटिस पर बोले राठौड़ - राजनीति में गिरावट नहीं आनी चाहिए, राज्यसभा चुनाव पर दिए ये संकेत
हनुमान बेनीवाल के नोटिस से शुरू हुई नई जंग. पंचायत चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान. राठौड़ ने राज्यसभा चुनाव पर कही ये बड़ी बात...

Published : June 4, 2026 at 1:08 PM IST
|Updated : June 4, 2026 at 3:22 PM IST
जयपुर: कानूनी नोटिस ने पंचायत-निकाय चुनाव से पहले नई सियासी जंग शुरू कर दी है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद अब भाजपा भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है. मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों दलों के बीच पहले भी गठबंधन और टकराव का लंबा इतिहास रहा है. राज्यसभा चुनावों पर राठौड़ ने कहा कि आज शाम तक नामों की घोषणा हो सकती है.
दोनों पार्टियों के बीच चल रही तल्खी अब कानूनी मोर्चे तक पहुंच गई है. आरएलपी सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद राठौड़ ने गुरुवार को भाजपा मुख्यालय पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार खुलकर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि राजनीति को शुद्धिकरण की दिशा में आगे बढ़ाने की जरूरत है और राजनीतिक संवाद की गरिमा बनी रहनी चाहिए.
मदन राठौड़ ने बेनीवाल के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नोटिस मिल गया है, लेकिन इसका जवाब देना चाहिए या नहीं देना चाहिए, इस पर वह अभी विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके वकील कानूनी पहलुओं को देख रहे हैं और आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय होगी. लेकिन राजनीति में गिराव किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं.
भाषा की गरिमा हो : मदन राठौड़ ने बिना नाम लिए बेनीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास अच्छा शब्दकोश नहीं है. राजनीति में विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन विरोध की भी एक मर्यादा होती है. उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा और व्यवहार का स्तर गिरना नहीं चाहिए. लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवाद की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है. राठौड़ ने कहा कि किसी भी मामले में प्रार्थना करना या अपनी बात रखना कोई अपराध नहीं होता.
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उन्होंने कहा कि उनका संगठन और वह स्वयं चाहते हैं कि प्रदेश में उच्च कोटि की राजनीति हो. राजनीति का उद्देश्य समाज और लोकतंत्र को मजबूत करना होना चाहिए न कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोपों के जरिए माहौल को खराब करना. हनुमान बेनीवाल के सामाजिक बहिष्कार के मामले पर राठौड़ ने कहा कि मैंने कभी ये नहीं कहा कि बहिष्कार कर दो...मैंने कहा कि बहिष्कार होना चाहिए, लेकिन सुचिता की राजनीति में इस तरह की भाषा का कोई स्थान नहीं है. इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
पंचायत और निकाय चुनाव पर असर : हाल ही में हनुमान बेनीवाल ने मदन राठौड़ के कुछ बयानों को लेकर कानूनी नोटिस भेजा था. बेनीवाल का आरोप है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से दिए गए कुछ बयान तथ्यों से परे और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं. इसी को लेकर उन्होंने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया.
नोटिस के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी कि भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आएगी. पंचायत और निकाय चुनावों से पहले भाजपा और आरएलपी के बीच बढ़ रही बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है. दोनों दल ग्रामीण और किसान राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं. ऐसे में कानूनी नोटिस से शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है.
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा खोल सकती है पत्ते: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने अभी तक अपने प्रत्याशियों के नामों का औपचारिक ऐलान नहीं किया है.
हालांकि, विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार निर्वाचित होगा. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने संकेत दिए हैं कि पार्टी के दोनों प्रत्याशियों के नामों की घोषणा संभवतः गुरुवार शाम या शुक्रवार तक हो सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यसभा प्रत्याशियों के नाम का अंतिम निर्णय और घोषणा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा की जाएगी. राठौड़ ने यह भी संकेत दिया कि भाजपा इस बार राजस्थान से ही दोनों उम्मीदवारों को मौका दे सकती है, जिससे लंबे समय से चल रही बाहरी बनाम स्थानीय चेहरे की बहस पर भी विराम लग सकता है.

