रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली के एक महीने पूरे, अतिक्रमण पर सियासत हुई तेज, विपक्ष ने दागे सवाल
रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट के एक महीने पूरे हो गए हैं. इस बीच अतिक्रमण को लेकर कांग्रेस ने व्यवस्थापन पहले करने की मांग की है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 22, 2026 at 7:02 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुए करीब एक महीना बीत चुका है. इस नए नियम का असर अब सड़कों पर साफ दिखने लगा है. राजधानी की सूरत बदलने और यातायात को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस विभाग ने एक संयुक्त 'महा-अभियान' छेड़ रखा है. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्ततम बाजारों से अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर जारी है. जहां एक ओर प्रशासन इसे शहर के विकास और सुरक्षा के लिए अनिवार्य बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अतिक्रमण हटाने और छोटे व्यापारियों के पुनर्वास के बीच अब एक बड़ी राजनीतिक रार छिड़ गई है।
ट्रैफिक सुधार के नाम पर सख्त अभियान
यातायात एडीसीपी विवेक शुक्ला के अनुसार, कमिश्नरेट लागू होने के बाद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक निश्चित कार्ययोजना तैयार की गई है. इस योजना के तहत उन सड़कों और बाजारों की पहचान की गई है जहां ठेले-गोमती या व्यापारिक गतिविधियों के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं. इन जगहों पर जाम की स्थिति बनती है. नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम वहां से अतिक्रमण हटा रही है तथा सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है. इसके साथ ही निगम जोन, ट्रैफिक थाना और स्थानीय थानों के समन्वय से एक मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है ताकि हटाए गए अतिक्रमण दोबारा न लग सकें.
क्रेन, ई-चालान और जवाबदेही तय
ट्रैफिक पुलिस द्वारा तीन क्रेन लगातार व्यस्त मार्गों पर तैनात की गई हैं. नो-पार्किंग में खड़े वाहनों पर ई-चालान की कार्रवाई की जा रही है और यदि कोई वाहन जाम की वजह बनता है तो उसे तत्काल हटाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बल्कि स्थायी समाधान के लिए चलाया जा रहा है. अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित जोन और थाने की जिम्मेदारी तय की गई है ताकि दोबारा कब्जा न हो.

नगर निगम का पक्ष: चिन्हांकन के आधार पर कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने स्पष्ट किया कि पूरे शहर में चिन्हांकन कर उन स्थानों को प्राथमिकता दी गई है, जहां ट्रैफिक दबाव अधिक है. अवैध निर्माण और सड़क पर फैले कब्जों को हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के बाद नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है और अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े.
विपक्ष का हमला: “व्यवस्थापन के बिना कार्रवाई अनुचित”
रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस पूरे अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाना गलत नहीं है, लेकिन ठेले-गोमती और छोटे व्यापारियों की आजीविका को नजरअंदाज कर की जा रही कार्रवाई उचित नहीं है. उनका कहना है कि जिन लोगों का परिवार ठेले और छोटी दुकानों से चलता है, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए. आकाश तिवारी ने यह भी कहा कि यदि किसी दुकानदार ने सड़क पर अधिक कब्जा किया है तो उसे व्यवस्थित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन अचानक हटाने से गरीब परिवारों पर संकट आ जाता है.

सियासी टकराव की शुरुआत
रायपुर में कमिश्नरेट लागू होने के बाद राजधानी में प्रशासनिक सख्ती साफ दिखाई दे रही है. सत्ता पक्ष इसे बेहतर ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था की दिशा में निर्णायक कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे “गरीब विरोधी कार्रवाई” करार दे रहा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रायपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान केवल प्रशासनिक मुहिम बनकर रहता है या आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है.

