जंबूरी की जिम्मेदारी में अपनों से जंग वाली राजनीति,जवाब देने में हांफ रही पार्टियां,विरोधी दल से ज्यादा गूंज रही अपनों के विरोध की आवाज
नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी को लेकर बीजेपी नेताओं के बीच ठन गई है.जिसमें पार्टी के दिग्गज नेता ने आयोजन पर सवाल उठाए हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 8, 2026 at 7:27 PM IST
रायपुर : "मिले दोस्त जिसको यहां तेरे जैसा उसे दुश्मनों की जरूरत ही क्या है" छत्तीसगढ़ में इस जुमले की तासीर बड़ी गर्म हो गई है.वजह साफ है चाहे कांग्रेस हो या फिर भाजपा दोनों राजनीतिक दलों में जिस तरह की राजनीति हो रही है,उसमें ना तो विपक्ष को कोई सवाल खड़ा करना है न ही कोई जवाब देना है. दोनों राजनीतिक दलों को विपक्ष की जरूरत भी नहीं है.दोनों दलों के भीतर ही अपने ही नेता पर सवाल उठाने और आरोप लगाने वाली राजनीति पूरी रफ्तार से चल रही है.
सत्ता पक्ष से उठी भ्रष्टाचार की आवाज
विपक्ष विकास पर सवाल उठता है तो सत्ता पक्ष भ्रष्टाचार के मामले पर कहानी कहने लगता है. राज्य का राजनीति में पिछले दो दिनों में जिस तरह के हालात बने हैं अब सत्ता पक्ष के लोग ही सवाल पूछ रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस को मुद्दा बड़ा हाथ लगा है, लेकिन सियासत में भ्रष्टाचार बनाम विकास और विकास के लिए हो रहा भ्रष्टाचार छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई शक्ल लेकर आ गया है. अब इसमें सरकार,राजनीतिक सुचिता, जनता के प्रति जवाबदेही और जिम्मेदार सियासत दान सब कुछ सवालों में खड़ा हो रहा है.
जंबूरी की जिम्मेदारी किस पर पड़ रही भारी
छत्तीसगढ़ के बालोद में नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का आयोजन हो रहा है. लेकिन इस आयोजन की जिम्मेदारी और जवाबदेही जिसके पास है वह राजनीति में जिम्मेदार बनने और भ्रष्टाचार करने की लड़ाई में आमने-सामने है. बृजमोहन अग्रवाल जो रायपुर के सांसद हैं छत्तीसगढ़ के बड़े कद्दावर नेता हैं, उन्होंने अपनी ही सरकार पर इस आयोजन को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए. हालांकि सरकार ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए जिस पद पर बृजमोहन खुद को अभी भी होने की बात कहते हैं, उस पर वर्तमान शिक्षा मंत्री को बैठा दिया. जिसके बाद पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है ये सवाल उठ खड़ा हुआ है.
मुख्यमंत्री की छवि के लिए भ्रष्टाचार ठीक नहीं
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि जिस तरीके से ये आयोजन हुआ है वो छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय मुख्यमंत्री विष्णुदेव के छवि के लिए ठीक नहीं है. जबकि जो इस जिम्मेदारी को लिए हैं और जिनके ऊपर इस आयोजन में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर आरोप की शिकायत है उनका कहना है कि यह सब कुछ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कहने पर ही हो रहा है. अब सवाल यह है कि भ्रष्टाचार के आरोप अगर आयोजन पर लग रहा है तो इसमें छवि विष्णुदेव की खराब हो रही है यह बृजमोहन का अग्रवाल का आरोप है.
जबकि इस खेल का आयोजन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कहने पर हो रहा है यह वर्तमान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना है. अब सवाल यह उठ रहा है कि खेल के होने से जिस तरह की छवि राज्य में बनी है उसमें अपनी ही सरकार पर एक बड़ा आरोप बृजमोहन अग्रवाल ने लगा दिया है. जिसमें यह कहा है कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है.राजनीति में इसे किस हिसाब किताब से देखा जाए यह तो राजनेता अपने तरीके से बात ही देंगे, लेकिन एक बात साफ है कि खेल तो हो रहा है.
हाईकोर्ट पहुंचे बृजमोहन अग्रवाल
बालोद में हो रहे खेल के आयोजन के साथ ही बृजमोहन अग्रवाल को पद से हटाए जाने और पूरे मामले की जांच को लेकर के रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. उनका कहना है कि जो व्यवस्था अभी बनाई गई है उसमें गड़बड़ी है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए. बृजमोहन अग्रवाल की तरफ से इस बाबत एक जानकारी साझा की गई है. जिसमें उन्होंने ये कहा है कि जो हो रहा है वह ठीक नहीं है, इससे छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की छवि खराब हो रही है और सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहा है.
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का जवाब
छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बालोद में जिस खेल का आयोजन हो रहा है उसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से विधिवत अनुमति ली गई है. गजेंद्र यादव ने कहा कि उनके निर्देशानुसार ही पूरे कार्यक्रम को किया जा रहा है. इसमें किसी तरह की कोई ऐसी बात नहीं है जो मुख्यमंत्री को पता ना हो. जिस जिम्मेदारी को मुझे दिया गया है वह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुमोदन के बाद ही मिला है.
विपक्ष बोला सरकार से पूछिये कुछ जवाब कुछ
छत्तीसगढ़ में चढ़ी भाजपा में अंदरुनी विरोध वाली सियासत ने राजनीति को बड़ी जगह दे दी है और इसे लेकर के छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विष्णुदेव साय को कुछ पता ही नहीं है.पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आज भी स्थिति वही है कि, इनसे कुछ भी पूछिए उत्तर इनका अलग ही होता है. अब इनके पार्टी के भीतर गतिरोध और विरोध साफ तौर पर सामने आ गया है और यह भी साफ है कि जिस विषय पर यह विवाद हो रहा है उसमें सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है. इसकी बड़ी वजह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हो जिनसे कुछ भी पूछिए उसका उत्तर वह अलग ही देते हैं. सवाल कुछ होता है उत्तर कुछ और देते हैं. जो खेल हो रहा है उसमें गड़बड़ी की शिकायत मिल रही है, इसकी जांच होनी चाहिए.
कांग्रेस पार्टी अपने भीतर झांक कर देखे
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस के भीतर जिस तरह का अंदरूनी कलह मचा हुआ है. वह अपने मुद्दे को और पार्टी के भीतर चल रहे विरोध को सुलझा ले यह बड़ी बात है.उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर ना तो किसी तरह का कोई विरोध है न हीं विभेद है. पार्टी पूरे तौर पर संगठित है और सरकार भी पार्टी और संगठन के भीतर ना तो कोई विरोध है और ना ही कोई विभेद है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी को अपने भीतर झांक कर देख लेना चाहिए पहले वह अपने अंदरूनी कलह से निपट ले, फिर भारतीय जनता पार्टी के ऊपर किसी तरह का सवाल उठाएं.
देश के हुनर का मामला है
छत्तीसगढ़ में हो रहे इस आयोजन को लेकर के जिस तरह के राजनीतिक हालात बने और बृजमोहन अग्रवाल के द्वारा उठाए जा रहे कदम पर जानकारी देते हुए वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश भटनागर में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर इस तरह का सवाल उठाना भारतीय जनता पार्टी के बनाए गए नीतियों के विरुद्ध है. अगर किसी विभाग में किसी तरह की कोई गड़बड़ी आई है तो पहले उसकी जांच होनी चाहिए.
जंबूरी रद्द करना असंभव
दुर्गेश भटनागर ने कहा जंबूरी रद्द करना मुश्किल इसलिए था कि लोगों की तमाम तैयारियां को अंतिम रूप दिया जा चुका था. जिन राज्यों से लोगों को वहां पहुंचना था उनके टिकट, रहने के इंतजाम, वापस जाने की तैयारी सब पहले से ही तय था. दुर्गेश भटनागर ने कहा इसके रद्द होने से सीधा नुकसान इसमें शामिल हो रहे छात्रों का होता. इस लड़ाई में अगर सबसे ज्यादा घाटा किसी का होता तो छात्रों का ही होता जो उसमें शामिल होने के लिए आए हैं. ऐसे में आयोजन का ना रद्द होना स्टूडेंट्स के पक्ष में है.
खिलाड़ियों के भविष्य ने ना हो खिलवाड़
आयोजन में भ्रष्टाचार होना देश की व्यवस्था और तैयारी कर रहे खिलाड़ियों के साथ खिलवाड़ है. निश्चित तौर पर इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. बृजमोहन अग्रवाल अगर हाईकोर्ट गए हैं तो उम्मीद की जाती है कि न्यायालय इसमें निश्चित तौर पर न्याय संगत निर्णय देगा क्योंकि यहां पर भविष्य के हुनर का मामला है जहां पर खिलाड़ियों को तैयार करना होता है, उस पर राजनीति और वहां भ्रष्टाचार नहीं बर्दाश्त की कोई जगह होनी ही नहीं चाहिए.
भाजपा खुद के आरोपों के भंवर में फंसी
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल का सरकार के मंत्री और विभाग पर आयोजन पर सवाल उठाना बहुत बड़ी बात कही जा सकती है, क्योंकि अभी तक इस तरह की परिपाटी भारतीय जनता पार्टी में किसी एक मुद्दे को लेकर के नहीं आई है. अब तक भाजपा ने कांग्रेस में विवाद की बात की है. कांग्रेस के नेताओं के आपस में गुटबाजी ,कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक चरित्र को बताने वाली बीजेपी अब खुद इन्हीं आरोपों के घेर में है.
कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक जैसा ही खेल
जिस तरह से एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को लेकर विरोध के सुर उठाए हैं वह एक नहीं कई मुद्दों की तरफ इशारा कर रहा है. अब इसमें सियासत का कौन सा रंग होगा यह सबसे महत्वपूर्ण है. क्योंकि यहां भी एक वर्चस्व है जो कायम रहे इसकी जिद है. वहीं और दूसरा इसे कायम करना है इसकी जिद की जद्दोजहद है. छत्तीसगढ़ की राजनीति ने भाजपा के भीतर जिस तरह को विरोध की बात आई है उससे एक बात साफ है कि कांग्रेस और भाजपा में पार्टी के भीतर हालात एक जैसे ही हैं, बस खेल अलग-अलग तरह से होता है और हो रहा है.
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