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यूपी में मानसून के साथ खाद पर सियासी घमासान, विपक्ष ने लगाया किल्लत का आरोप, सरकार ने किया स्टॉक पूरा होने का दावा

क्या खाद की उपलब्धता तय करेगी यूपी विधानसभा चुनाव का समय?

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 5, 2026 at 4:49 PM IST

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Updated : July 6, 2026 at 7:22 AM IST

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले किसानों के मुद्दे पर विपक्ष मुखर हो गया है. खरीफ सीजन के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्ष लगातार सरकार पर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध न करा पाने का आरोप लगा रहा है, लेकिन सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही है. राज किशोर के संपादन के साथ पेश है संवाददाता खुर्शीद अहमद की खास रिपोर्ट.

अखिलेश यादव के आरोप: सत्ता में वापसी की राह देखने वाले अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले किसानों का मुद्दा उठाया है. खाद के लिए लंबी-लंबी कतारें और किसानों की परेशानी को सपा प्रमुख ने सियासी पिच पर उतार दिया है. उन्होंने सरकार पर खाद उपलब्ध कराने में असफल होने का आरोप लगाया है.

यूपी में खाद पर सियासी घमासान (Video Credit: ETV Bharat)

यदि सरकार खरीफ सीजन में किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने और धान की बुवाई सुचारू रूप से कराने में सफल रहती है, तो विधानसभा चुनाव अपने तय समय यानी 2027 में होंगे, लेकिन यदि खाद संकट गहराता है, और किसानों में व्यापक नाराजगी पैदा होती है, तो भाजपा समय से पहले, यानी 2026 के आखिर में ही चुनाव कराने का दांव चल सकती है.- अखिलेश यादव, अध्यक्ष, सपा

किसान नेता भी मैदान में उतरे: भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी खाद संकट का मुद्दा उठा रहे हैं. अखिलेश यादव से एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने किसानों से आंदोलन की राह अपनाने की अपील की. राकेश टिकैत ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर गोंडा जिले की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि, किसान खाद के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं.

कालाबाजारी के कारण किसानों को यूरिया और डीएपी के लिए निर्धारित कीमत से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है. धान की रोपाई के समय किसानों को खाद लेने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है, लेकिन सरकार इस समस्या पर गंभीरता नहीं दिखा रही है.- राकेश टिकैत, नेता, भारतीय किसान यूनियन

खाद की कमी नहीं, सरकार का दावा: यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विपक्ष पर खाद के मुद्दे पर बेवजह सियासत करने का आरोप लगाया है. ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने कहा कि, प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है. किसानों के खेत तक खाद पहुंच रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, अखिलेश यादव के बयानों से ऐसा लगता है, मानो वह चुनाव लड़ने से पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुके हों.

यूपी में खाद की वर्तमान कीमत जान लीजिए
यूपी में खाद की वर्तमान कीमत जान लीजिए (Photo Credit: ETV Bharat)

समाजवादी पार्टी के शासनकाल में किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनें लगानी पड़ती थीं, कई जगह विवाद और गोलियां चलने जैसी घटनाएं होती थीं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में किसानों को समय पर खाद मिल रही है.- सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री, यूपी सरकार

खाद की कमी या सियासी नैरेटिव?: कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 5.95 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 3.91 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.01 लाख मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक उपलब्ध है. हालांकि जुलाई 2026 तक का जिलावार ताजा स्टॉक सार्वजनिक नहीं किया गया है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें. यदि कहीं कालाबाजारी, अधिक कीमत वसूली या कृत्रिम संकट पैदा किए जाने की शिकायत मिले तो इसकी तत्काल सूचना कृषि विभाग को दें.

खाद की कमी या सियासी नैरेटिव?
खाद की कमी या सियासी नैरेटिव? (Photo Credit: ETV Bharat)

खाद मिलने के क्या हैं नियम?: किसानों को अधिकृत केंद्र पर आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के साथ जाना होता है. वहां 'पॉइंट ऑफ सेल' (PoS) मशीन के माध्यम से आधार आधारित सत्यापन किया जाता है. सत्यापन के बाद निर्धारित मात्रा में सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध कराई जाती है, और खरीद की रसीद भी दी जाती है.

खाद मिलने के क्या हैं नियम?
खाद मिलने के क्या हैं नियम? (Photo Credit: ETV Bharat)


कैसे मिलती है यूरिया और डीएपी?: खरीफ सीजन में उत्तर प्रदेश में यूरिया और डीएपी की मांग सबसे अधिक रहती है. किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर व्यवस्था संचालित करती हैं. केंद्र सरकार राज्यों को उर्वरकों का आवंटन करती है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार जिलों, सहकारी समितियों और अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से किसानों तक इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करती है. प्रदेश में यूरिया और डीएपी की आपूर्ति मुख्य रूप से IFFCO, KRIBHCO, NFL और RCF जैसी उर्वरक कंपनियों से होती है.

आइए जानते हैं खाद की सप्लाई चेन
आइए जानते हैं खाद की सप्लाई चेन (Photo Credit: ETV Bharat)

कैसे तय होती है खाद की मात्रा?: सरकार प्रति किसान एकड़ या हेक्टेयर के हिसाब से निश्चित संख्या में खाद की बोरी आवंटित नहीं करती. वितरण फसल, बोए गए क्षेत्र और कृषि विभाग के मानकों के अनुसार किया जाता है. यूपी सरकार के कृषि रसायन वितरण के नियम के मुताबिक, धान और गेहूं की फसल के लिए सामान्य परिस्थितियों में प्रति हेक्टेयर करीब 100 किलोग्राम डीएपी और 250 से 300 किलोग्राम यूरिया की आवश्यकता होती है. हालांकि अंतिम मात्रा मिट्टी की जांच और फसल की वास्तविक जरूरत के आधार पर तय की जाती है.

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Last Updated : July 6, 2026 at 7:22 AM IST