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राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले बीजेपी में सियासी हलचल तेज, क्या खत्म होगी अंतर्कलह?

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड दौरे से पहले अरविंद पांडे से दिग्गजों ने की मुलाकात, जानिए इसके सियासी मायने, धीरज सजवाण की रिपोर्ट

Uttarakhad BJP
बीजेपी में सियासी हलचल (फोटो सोर्स- X@TheArvindPandey)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 26, 2026 at 5:31 PM IST

5 Min Read
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देहरादून: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड दौरे से पहले पार्टी के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चाओं में है. अरविंद पांडे के घर बड़े नेताओं की लगातार मुलाकातों ने सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है.

उत्तराखंड बीजेपी में भले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को लेकर केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा मजबूत दिखाई देता हो, लेकिन पार्टी के भीतर पिछले कई महीनों से चल रहा 'अरविंद पांडे एपिसोड' थमता नजर नहीं आ रहा. अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे से पहले पार्टी संगठन और सरकार दोनों इस मामले को शांत करने की कोशिशों में जुट गए हैं.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दी अहम जानकारी (वीडियो सोर्स- ETV Bharat)

28 से 30 मई तक उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे नितिन नबीन: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन आगामी 28 मई से 30 मई तक उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे संगठनात्मक बैठकों से लेकर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे, लेकिन उनके दौरे से ठीक पहले प्रदेश की राजनीति में जिस तरह की हलचल देखने को मिल रही है, उसने बीजेपी के भीतर सब कुछ सामान्य होने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

दरअसल, बीजेपी विधायक अरविंद पांडे पिछले लंबे समय से अपनी बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. कई मौकों पर उनके बयान सरकार और संगठन दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं. इतना ही नहीं कई बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सामने आकर सफाई तक देनी पड़ी. राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा होती रही कि बीजेपी के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्र सक्रिय हैं और पार्टी दो खेमों में बंटी नजर आ रही है.

अरविंद पांडे से इन दिग्गजों ने की मुलाकात: अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले अचानक गदरपुर स्थित अरविंद पांडे के आवास पर बड़े नेताओं की आवाजाही ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है. दो दिन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी उनके आवास पहुंचे थे. वहींस मंगलवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अरविंद पांडे से मिलने गदरपुर पहुंचे. दोनों नेताओं की मुलाकातों की तस्वीरें भी सामने आई हैं.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इन मुलाकातों को सामान्य शिष्टाचार भेंट मानना आसान नहीं है. इसकी वजह ये भी है कि अरविंद पांडे को लंबे समय से अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र रावत खेमे के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है. ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले इन मुलाकातों ने बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

विधानसभा चुनाव 2027 पर पड़ सकता है असर: बीजेपी के भीतर यह चिंता भी साफ तौर पर दिखाई दे रही है कि यदि यह मामला ज्यादा बढ़ा तो 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. यही कारण है कि अब संगठन और सरकार दोनों स्तर पर इस विवाद को खत्म करने की कोशिशें तेज हो गई हैं.

कल होगी बीजेपी की अहम बैठक: बताया जा रहा है कि 27 मई को मुख्यमंत्री आवास पर बीजेपी के कई बड़े नेताओं की अहम बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और बीजेपी प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार शामिल हो सकते हैं.

महेंद्र भट्ट ने पार्टी में गुटबाजी से किया इनकार: माना जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म करने और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे से पहले एकजुटता का संदेश देने पर फोकस रहेगा. हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट लगातार पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी से इनकार कर रहे हैं.

BJP State President Mahendra Bhatt
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान (फोटो- ETV Bharat GFX)

फिलहाल, जिस तरह राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे से पहले लगातार राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं, उसने ये जरूर संकेत दे दिया है कि बीजेपी नेतृत्व इस पूरे मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. अब सबकी नजर 27 मई की बैठक और उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे पर टिकी हुई है.

देखने वाली बात होगी कि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व इन सियासी संकेतों को सिर्फ सामान्य मुलाकात बताकर आगे बढ़ता है या फिर उत्तराखंड बीजेपी में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान पर कोई बड़ा राजनीतिक समाधान सामने आता है. अब विधानसभा चुनाव 2027 भी नजदीक आता जा रहा है. ऐसे में किसी की नाराजगी या गिले-शिकवे को दूर करना ही फायदेमंद होगा.

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