ETV Bharat / state

बुढ़ापा पेंशन पर सियासी संग्राम, सरकार और विपक्ष आमने सामने, क्या है हंगामे की वजह ?

बुढ़ापा पेंशन पर हरियाणा की राजनीति इन दिनों गर्म हो गई है. विपक्ष हमलावर है. वहीं सत्तापक्ष आरोपों को खारिज कर रहा है.

POLITICS ON BUDHAPA PENSION
बुढ़ापा पेंशन पर सियासी संग्राम (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 11, 2026 at 2:24 PM IST

15 Min Read
Choose ETV Bharat

चंडीगढ़ः हरियाणा की सियासी फिजाओं में जब से बीजेपी की प्रदेश में सरकार चल रही है, उसके विकास कार्य और तकनीकी गति हमेशा विपक्ष के निशाने पर रहा है. हालांकि विपक्ष के ये प्रयास जमीनी स्तर पर उसको मजबूत करने या सत्ता में वापस लाने में कामयाब नहीं हो पाएं हैं. कभी जाट विरोधी सरकार का तमगा बीजेपी को दिया गया, कभी परिवार पहचान पत्र यानी पीपीपी को लेकर सरकार को घेरा गया, कभी बीपीएल कार्ड धारकों के नाम काटने को लेकर सरकार निशाने पर रही. वर्तमान में नायब सैनी सरकार वृद्धा अवस्था पेंशन (वृद्धावस्था सम्मान) के पात्र लोगों के नाम काटने के मामले में सियासी विरोध का सामना कर रही है. आइए पहले हम हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन को सिलसिलेवार समझते हैं.

POLITICS ON BUDHAPA PENSION
सीएम नायब सिंह सैनी (Etv Bharat)

हरियाणा में किसने की वुजुर्गों के सम्मान की पहलः साल 1987, महीना जून का और तारीख 17, हरियाणा के दिग्गज नेता रहे जननायक चौधरी देवीलाल ने पहली बार बुजुर्गों के लिए 100 रु बुढ़ापा पेंशन शुरू की थी. जब उन्होंने यह घोषणा की थी तब इस योजना को विपक्ष ने अव्यावहारिक बताया था. लेकिन सत्ता में आते ही चौधरी देवीलाल ने इस घोषणा को लागू किया. बाद में उनकी इस योजना को कई राज्यों ने भी अमल में लाया. वहीं हरियाणा में अन्य दलों की सरकारों ने भी सत्ता में आने के बाद बुढ़ापा पेंशन को आगे बढ़ाया.

बुढ़ापा पेंशन पर सरकार और विपक्ष आमने सामने (Etv Bharat)

बुढ़ापा पेंशन की शुरुआत के बाद स्थिति: जननायक चौधरी देवीलाल के कार्यकाल में जो बुढ़ापा पेंशन 100 रुपए से शुरू हुई. वह करीब एक दशक तक सौ रुपए ही रही. जबकि 1999 में यह 200 और कांग्रेस की 2004 में सरकार के वक्त यह तीन सौ रुपए और 2014 में कांग्रेस ने सत्ता से बाहर होने से पहले इसको हजार रुपए करने की घोषणा की. हालांकि बीजेपी सत्ता में आई तो उसने इसको एक हजार से बढ़ाकर 2015 में 1200 किया. जिसके बाद साल दर साल इसमें वृद्धि होती गई. नायब सैनी सरकार के साल 2024 में सत्ता में आने के वक्त यह तीन हजार तक पहुंच गई. वहीं सरकार के एक साल पूरा होने पर नवंबर 2025 में सैनी सरकार ने इसमें 200 रुपए की वृद्धि की घोषणा की तो यह 3200 तक पहुंच गई.

साल-दर-साल प्रति लाभुक वृद्धावस्था पेंशन राशि
वर्षपेंशन की राशि (रुपये में)
196615
1987100
1999 200
2004300
2009700
20141000
20151200
2016 (जनवरी)1400
2016 (नवंबर)1600
20171800
2020 (जनवरी)2250
2021 (अप्रैल) 2500
2023 2750
2024 (जनवरी)3000
2025 3200
Source: socialjusticehry.gov.in

अब किस बात को लेकर शुरू हुई सियासत? बीजेपी सरकार जब वृद्धा पेंशन में साल दर साल वृद्धि कर रही है तो फिर इसको लेकर सियासत क्यों शुरू हुई. आखिर विपक्ष किस बात को लेकर सरकार पर हमलावर है. विपक्ष का कहना है कि "सरकार ने 75000 से अधिक लोगों का बुढ़ापा पेंशन काट दिया . बुजुर्गों के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है. सरकार ने जिस आधार पर पेंशन काटा है, वह कहीं से तर्कसंगत नहीं है."

वृद्धावस्था सम्मान भत्ता/पेंशन
वित्त वर्षलाभार्थियों की संख्याबजट (राशि करोड़ में)खर्च हुई राशि
1966-67 2362--------24680 रुपये
2017-1815,12,4363037.482965.55 करोड़
2018-1915,69,6163479.373479.01 करोड़
2019-2017,01,7614070.003616.14 करोड़
2020-2117,12,9344619.554633.34 करोड़
2021-2217,59,6745576.855159.46 करोड़
2022-2317,85,1375400.003951.53 करोड़
2023-2417,85,1375538.00--------
Source: socialjusticehry.gov.in

पेंशन बंद होने का कारणः परिवार पहचान पत्र यानी पीपीपी जो इस सरकार की सभी योजनाओं के पात्र लोगों की पहचान का एक माध्यम बना है उसकी वजह से भी कई बुजुर्गों की पेंशन की पात्रता पर कट लग गया है.इसके साथ ही उम्र की सीमा में गड़बड़ी यानी डेट ऑफ बर्थ की गलती या अन्य दस्तावेजों की गलतियों से भी बुजुर्गों के हजारों की संख्या में नाम कटे हैं. सरकार ने पात्र बुजुर्गों की पेंशन के लिए सालाना आय सीमा तीन लाख तय की है. वहीं अब जिनकी आय सीमा पीपीपी में तीन लाख से ज्यादा पाई गई है, उनके नाम सूची से कट गए हैं. हालांकि सरकार ने कहा है कि अगर किसी की पेंशन गलत कटी है तो उसके लाभार्थी को पुख्ता दस्तावेज देने को कहा गया है. दस्तावेज सही होने पर पेंशन बहाल हो जाएगी.

क्या है सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वालों का आंकड़ा? हरियाणा में एक तरफ जहां सरकार जहां दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत आठ लाख से अधिक महिलाओं को 2100 रुपए प्रति माह दे रही है. वहीं सामाजिक न्याय विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2023 में वृद्धावस्था सम्मान भत्ता यानी बुढ़ापा पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की संख्या 18 लाख से अधिक थी. जबकि मौजूदा समय में यह आंकड़ा 20 लाख के करीब है. जबकि अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन जिसमें विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन भी शामिल है, इन सभी पेंशन का आंकड़ा लाडो लक्ष्मी योजना को भी साथ जोड़कर 40 से 43 लाख के करीब हो जाता है. जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा वृद्धावस्था सम्मान यानी वृद्धावस्था पेंशन पाने वालों का है.

इनेलो के निशाने पर आए सीएम सैनी, लड़ाई लड़ने की तैयारी: इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि "भाजपा सरकार लगातार जनविरोधी फैसले लेकर हरियाणा प्रदेश को पूरी तरह से बर्बाद करने पर तुली है. सरकार अब बुजुर्गों को भी नहीं बख्श रही और बुजुर्गों के सम्मान के लिए दी जाने वाली बुढ़ापा पेंशन को आय से जोड़ने के साथ साथ अन्य कई शर्तें लगाकर काट रही है." अभय चौटाला कहते हैं कि "अब तक पूरे प्रदेश के 75 हजार से ज्यादा बुजुर्गों की पेंशन काटी जा चुकी है, और सीएम बेशर्मी से कह रहे हैं कि कोई पेंशन नहीं काटी गई है. पेंशन काटे जाने पर इनेलो चुप नहीं बैठेगी और 20 फरवरी को पंचकूला में प्रदेश स्तरीय बड़ा प्रदर्शन करेंगे और राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपेंगे. इस प्रदर्शन में बड़ी तादाद में बुजुर्ग शामिल होंगे जिनकी पेंशन काटी गई हैं."

जेजेपी के तेवर भी सख्त, दुष्यंत चौटाला का तीखा हमलाः बुढ़ापा पेंशन योजना को लेकर हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने सरकार से मांग की है कि "वे किसी भी बुजुर्ग की पेंशन न रोकें और योजना से वंचित किए गए बुजुर्गों की पेंशन को तुरंत बहाल करें. अगर किसी के दस्तावेज में कोई छोटी-मोटी त्रुटियां है भी तो उसे सरकार घर-घर जाकर दुरुस्त करवाएं, न कि पेंशन को काटे." दुष्यंत चौटाला ने कहा कि "1 नवंबर को घोषणा के बावजूद अब तक बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों की पेंशन में 200 रुपये की बढ़ोतरी लागू नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि आज भी हरियाणा में उतनी ही पेंशन दी जा रही है जितनी गठबंधन सरकार के तहत जेजेपी ने 1 जनवरी 2024 को लागू करवाई थी." दुष्यंत चौटाला ने कहा कि "जेजेपी बुजुर्गों का अपमान नहीं सहेगी और सरकार को न केवल काटी गई बुढ़ापा पेंशन को बहाल करनी पड़ेगा बल्कि ये भी बताना पड़ेगा कि इस योजना को लेकर उनकी मंशा क्या है ?"

क्या है इस मुद्दे पर कांग्रेस की तैयारी ? इधर कांग्रेस पार्टी जानती है कि विधानसभा का बजट सत्र आ रहा है, पार्टी के नेता सदन में आम लोगों की विभिन्न मुद्दों पर बात उठाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है. नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा कहते हैं कि "बात बुजुर्गों की पेंशन काटने की हो या धान घोटाले सहित अन्य मुद्दों की कांग्रेस सदन में सरकार को सभी मुद्दों पर घेरेगी." वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह कहते हैं कि "हम इन मुद्दों पर जमकर विरोध कर रहे हैं, जल्द ही इन मुद्दों को लेकर है कार्यक्रम भी जिलों में बना रहे हैं. लोगों की पेंशन को लेकर बहुत शिकायतें हैं. इसलिए कांग्रेस गरीबों और किसन के साथ खड़ी है."

बुढ़ापा पेंशन पर लगाई जा रही शर्तें अमानवीय: सैलजा सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने हरियाणा में वृद्धावस्था सम्मान भत्ता (बुढ़ापा पेंशन) को फैमिली आईडी, आय सत्यापन और बिजली के बिल जैसी शर्तों से जोड़कर रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने इसे बुजुर्गों के साथ अन्याय और अमानवीय व्यवहार करार दिया है. उन्होंने बयान जारी कर कहा कि "प्रदेश के अनेक बुजुर्ग, जो वर्षों से पेंशन प्राप्त कर रहे थे, आज केवल तकनीकी और कागजी कारणों से अपनी पेंशन से वंचित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट नीति है कि बुढ़ापा पेंशन सभी पात्र बुजुर्गों को सरल और सम्मानजनक ढंग से मिले."

नायब सिंह सरकार ने 75000 बुज़ुर्गों की पेंशन की बंद- अनुराग ढांडा: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने बुढ़ापा पेंशन को लेकर भी सीएम सैनी को जमकर घेरते हुए कहा कि "मीडिया में सीएम बयान देते हैं कि किसी की पेंशन नहीं कटी जबकि हरियाणा के 75000 से अधिक बुज़ुर्गों की पेंशन काट दी गई है. पेंशन न दिए जाने के बेतुके तर्क दिए जा रहे हैं. किसी किसान के खाते में फसल का पैसा डेढ़ या दो लाख आया तो उसे कहा जा रहा है कि 3 लाख की कमाई है, तुम्हें पेंशन नहीं मिल सकती. इसका मतलब नायब सरकार 3 लाख की फसल बेचने वाले किसान को संपन्न मान रही है." ढांडा ने कहा कि "किसान की खेती से कोई कमाई नहीं होती बल्कि किसान का खर्च इतना होता है कि पूरे परिवार का घर चलाना भी मुश्किल होता है."

किसान नेता भी कर रहे पेंशन कटने का विरोध: किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (मान) के प्रदेश अध्यक्ष गुणी प्रकाश कहते हैं कि "चौधरी देवीलाल ने वृद्धावस्था पेंशन शुरू की थी, उस वक्त बंसी लाल ने उस पर सवाल उठाए थे जबकि किसान के बेटे सीएम नायब सैनी ने उस पर तलवार चला दी जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. इसमें ऐसी शर्त लगा दी कि किसानों की हजारों की संख्या में पेंशन कट गई. तीन लाख की फसल बिकी तो पेंशन कट जाएगी. दो सौ गज का प्लॉट किसी का है तो पेंशन कट जाएगी, चार पहिए के व्हीकल रखने वाले की पेंशन कट जाएगी. यह पेंशन बुजुर्गों को सम्मान के तौर पर दी गई थी. टेक्निकल प्वाइंट से पेंशन काटने का बुजुर्गों को बड़ा दर्द हुआ है. मेरा सीएम ने निवेदन है कि इस तरह की शर्तों को तुरंत हटाया जाए और बुजुर्गों की पेंशन बहाल की जाए."

सीएम नायब सिंह दो टूक बोले-'जो पात्र नहीं उनको योजना का लाभ नहीं मिलेगा': सीएम नायब सैनी ने बुजुर्गों की पेंशन काटने के मामले में कहा कि "सभी पात्र बुजुर्गों को हम पेंशन का लाभ दे रहे हैं. जो पात्र नहीं उनको योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जनता को विपक्ष भ्रामक प्रचार करके उकसा रहा हैं. कांग्रेस दो लाख लोगों कि पेंशन काटने की बात कर रही हैं. जब किसी पेंशन लाभार्थी की मृत्यु होती है तो पेंशन रुक जाती है. एक लाख तीन हजार ऐसे लाभार्थी थे जिनकी मृत्यु अभी तक हुई है, उनकी पेंशन रुकी. रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के पोर्टल में दिक्कत हुई थी, नवंबर 2025 में डाटा मिला, जिसके बाद हमने उसे ठीक किया. 37000 मामले 60 साल से कम आयु के थे, जिनका वेरीफाई करेंगे. जो सही होगा उसको पेंशन का पैसा देंगे. कुछ मामलों में डाटा से छेड़छाड़ हुई है जिसकी जांच चल रही है. 39000 मामलों में आय से अधिक होने का सत्यापन होगा, जिसकी आय तीन लाख से कम आय सत्यापित होगी उनको पेंशन मिलेगी."

कांग्रेस और इनेलो की पूर्ववर्ती सरकारों पर सैनी का आरोपः सीएम नायब सिंह सैनी पूर्ववर्ती कांग्रेस और इनेलो की सरकार पर प्रहार करते हुए कहते हैं कि "जहां तक आय सीमा की बात है तो वृद्धावस्था पेंशन जब पहली बार लगाई गई थी, उस वक्त आय लिमिट दस हजार थी. जो 1992 में लगी थी. उस वक्त कांग्रेस की राज्य में सरकार थी. तब सौ रुपए 6 लाख 50 हजार बुजुर्गों को पेंशन मिलती थी. इनेलो ने भी अपनी सरकार आने पर इसकी आय सीमा दस हजार ही रखी. साल 2004 में 9 लाख 3 हजार लाभार्थी पेंशन के हकदार थे. मार्च 2005 में कांग्रेस सरकार थी. हुड्डा सीएम थे चार साल बाद उन्होंने पहली मार्च 2009 को चुनाव से पहले यह पेंशन 300 से बढ़ाकर 500 की . आय सीमा वही दस हजार रही. इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ. कांग्रेस और इनेलो की सरकार की सोच कम से कम लोगों को लाभ देने की थी."

आज 20 लाख 31 हजार 367 लोग हैं वृद्धावस्था पेंशनः सीएम ने कहा कि "1992 से 2009 तक आय सीमा दस हजार रुपए ही रखी. 2014 के चुनाव से पहले हुड्डा ने पेंशन को सात सौ से बढ़ाकर 1000 किया, मार्च 2012 में आय सीमा इन्होंने दो लाख की. 12 लाख 79 हजार लाभार्थी तब इस पेंशन के हुए. पांच अप्रैल 2023 को हमने इस पेंशन की आय सीमा दो लाख से तीन लाख किया है. जून 2023 में 17 लाख 98000 हजार लाभार्थी इसके हुए. करीब पांच लाख से ज्यादा हुए. आज यह संख्या 20 लाख 31 हजार 367 है."

दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रुकी पेंशन दी जाएगी: सीएम ने कहा "कांग्रेस सरकार के मुकाबले छह लाख से अधिक बुजुर्गों की संख्या हमारी सरकार में इसमें बढ़ी. 11 लाख 28 हजार से अधिक इनेलो सरकार से अधिक बुजुर्गों की संख्या हमारी सरकार में बढ़ी है. हमने आय सीमा इसलिए बढ़ाई ताकि ज्यादा बुजुर्गों को यह पेंशन मिले और विपक्ष बड़ी-बड़ी बातें करते हैं उंगली करवाकर शहीद होने वाली बात है. ग्यारह साल में हमने वृद्धावस्था पेंशन में 2200 की वृद्धि की यानी एक हजार से 3200 की. देश में सबसे ज्यादा बुजुर्गों को सम्मान भत्ता हम देते हैं. पंजाब में आय सीमा साठ हजार और पेंशन 1500 है. आज हमने 3200 का ही बटन दबाया है, और हर महीने दस तारीख को हम यह बटन दबाएंगे. जिन बुजुर्गों की पेंशन अभी दस्तावेजों की गड़बड़ी से रुकी है उनको दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रुकी पेंशन दी जाएगी."

हुड्डा सरकार में हुआ था 11 करोड़ का पेंशन घोटालाः 2011 में हुड्डा सरकार के समय हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला हुआ था. कैग में खुलासे के बाद राकेश बैंस ने हाईकोर्ट में मामला दायर किया था. कोर्ट के हस्तक्षेप पर जांच में पाया गया कि 40 साल से कम उम्र के लोग, मृत लोगों को भी पेंशन की राशि दी जा रही थी. कई लोग सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे थे. लगभग 11 करोड़ के फर्जीवाड़े में 25 मई 2023 तक 4 करोड़ की राशि को रिकवर किया जा चुका था. वहीं 7 करोड़ की राशि की रिकवरी उस समय तक बाकी थी.

ये भी पढ़ें-

हरियाणा में कट जाएगी 72 हजार बुजुर्गों की पेंशन!, "बुढ़ापा पेंशन काटने की तैयारी में सैनी सरकार", दीपेंद्र हुड्डा का बीजेपी पर आरोप

हरियाणा सरकार ने किया भत्ता बढ़ाने का ऐलान, जानिए कब से मिलेगा

अभय चौटाला ने वृद्धा पेंशन में 250 रुपये की बढ़ोतरी को बताया ऊंट के मुंह में जीरा

हरियाणा सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग, मजदूर पेंशन बढ़ाई - विधवा पेंशन हरियाणा

मनोहर लाल की बड़ी घोषणा, 1 अप्रैल से 2500 रुपये मिलेगा वृद्धावस्था पेंशन