वेस्ट यूपी के बड़े डॉन कुख्यात गैंगस्टर उधम सिंह को अब हथकड़ी नहीं पहना पाएगी पुलिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमानत हासिल करने और फरार होने के मामले में उधमसिंह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 3, 2026 at 10:28 AM IST
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर उधम सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ी और अस्थायी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमानत हासिल करने और फरार होने के मामले में उधम सिंह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है.
इसके साथ ही, अदालत ने इस बेहद गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब (हलफनामा) दाखिल करने का निर्देश दिया है.
मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र के कस्बा करनावल का रहने वाला उधम सिंह उत्तर प्रदेश का चिह्नित अपराध माफिया है, जिस पर हत्या, रंगदारी और जानलेवा हमले जैसे 70 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हैं.
वह पिछले करीब 4 साल 8 महीने से उन्नाव जेल में बंद था और 26 मार्च 2026 को ही जमानत पर बाहर आया था.
जमानत मिलने के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया.
पुलिस जांच में पता चला कि जसड़ (सरूरपुर) के रहने वाले अनवर नाम के एक सीधे-साधे युवक को लोन दिलाने का झांसा दिया गया था.
आरोपियों (शेखर फोगाट और बाबू पंडित) ने अनवर से लोन प्रक्रिया के नाम पर उसके जरूरी पहचान पत्र (जैसे आधार और पैन कार्ड) ले लिए और सरधना कचहरी ले जाकर धोखे से जमानत के कागजातों पर उसके हस्ताक्षर करवा लिए.
अनवर को भनक तक नहीं थी कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल वेस्ट यूपी के एक बड़े डॉन की जेल से रिहाई कराने के लिए किया जा रहा है, जब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, तो पीड़ित की शिकायत पर सरूरपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया.
इस पूरे मामले पर पुलिस विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का रुख बेहद सख्त है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही यह साफ हुआ कि उधम सिंह ने फर्जीवाड़ा करके अदालत को गुमराह किया और जमानत ली, वैसे ही उसकी जमानत रद्द कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
एसपी देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि उधम सिंह एक शातिर अपराधी है, जिसने कानून की आंखों में धूल झोंककर फर्जी तरीके से जमानत हासिल की. इस धोखाधड़ी का पता चलते ही सरूरपुर थाने में गैंगस्टर और उसके मददगारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था.
आरोपी के लगातार फरार रहने के कारण पुलिस ने उस पर पहले 25 हजार, फिर 50 हजार और हाल ही में 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. उसकी धरपकड़ के लिए यूपी-एसटीएफ (STF) और स्वाट (SWAT) टीमों को लगाया गया है.
गिरफ्तारी की तलवार लटकते देख उधम सिंह के वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की थी.
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अगली तारीख तक उधम सिंह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक तो लगा दी है, लेकिन राज्य सरकार से दो हफ्तों में जवाब तलब कर यह साफ कर दिया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट को गुमराह करने वाले मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा.
अब देखना यह होगा कि दो सप्ताह बाद जब उत्तर प्रदेश सरकार और मेरठ पुलिस अपना मजबूत पक्ष और पुलिसिया जांच की रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखेगी, तब इस कुख्यात अपराधी की किस्मत क्या करवट लेती है.

