कहां छुपा है झारखंड-बिहार का माओवादी नितेश यादव और उसके साथी, पुलिस एवं सुरक्षा बल को है तलाश!
झारखंड-बिहार के माओवादी नितेश यादव और उसके साथी को पुलिस और सुरक्षा बल तलाश रही है. नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Published : August 31, 2026 at 10:18 PM IST
पलामूः झारखंड-बिहार का मोस्ट वांटेड माओवादी नितेश यादव और उसके साथियों को पुलिस एवं सुरक्षा बल ढूंढ रही है. नितेष यादव अब तक छुपा हुआ है और उसके साथ भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं.
नितेश यादव माओवादियों का रीजनल कमांडर सदस्य है. झारखंड सरकार ने नितेश यादव पर 15 लाख जबकि बिहार सरकार ने तीन लाख रुपए का इनाम रखा हुआ है. नितेश यादव के दस्ते में 10 लाख के इनामी माओवादी संजय गोदराम, ठेगन मियां शामिल है. हाल में ही नितेश यादव ने छात्र के इलाके में 10 लाख के इनामी माओवादी कमांडर मनोहर गंझू के साथ हाथ मिलाया है.
दरअसल, नितेश यादव को पुलिस एवं सुरक्षाबल पिछले एक दशक से टारगेट कर रहे हैं लेकिन हर बार वह बचाने में सफल हो रहा है. नितेश यादव पलामू, चतरा और बिहार के गया औरंगाबाद में लगातार अपने ठिकानों को बदलते रहता है.
झारखंड-बिहार में सबसे बड़े दस्ते का नेतृत्व कर रहा नितेश यादव
झारखंड के सारंडा से लगभग माओवादियों का सफाया हो गया है. सारंडा के बाद झारखंड-बिहार में सबसे बड़ा दस्ता नितेश यादव के पास ही था. पुलिस एवं सुरक्षा बल लगातार नितेश यादव को टारगेट कर रहे हैं और उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं. मई 2025 में पलामू के हुसैनाबाद एवं पांडू थाना क्षेत्र के सीमावर्ती नितेश यादव के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ में इनामी माओवादी कमांडर तुलसी भूइयां मारा गया था जबकि नितेश यादव बच के निकल गया था.
पुलिस ने शुरू किया मिशन नितेश यादव, बिहार के साथ बनाया गया समन्वय
नितेश यादव एवं उसके दस्ते के सफाए के लिए पुलिस ने कई बिंदुओं पर अभियान शुरू हुआ है. कुछ दिनों पहले पलामू पुलिस और बिहार की औरंगाबाद पुलिस की एक संयुक्त बैठक हुई. जिसमें नितेश यादव एवं उससे जुड़े हुए सभी जानकारी को दोनों राज्यों ने एक दूसरे के साथ साझा किया. बिहार एवं झारखंड संयुक्त रूप से नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया था. इस अभियान के क्रम में नितेश के मौजूदगी वाले इलाकों को टारगेट करने के साथ-साथ उसके समर्थकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की योजना तैयार हुई है.
माओवादियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया है, इसके फलस्वरुप उनकी संख्या बेहद ही काम रह गई है. नितेश यादव के दस्ते में भी गिनती के लोग बचे हुए हैं. इसको लेकर लगातार सूचना संकलन किया जा रहा है और उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. पलामू में जिला बल एवं अतिरिक्त बल के मौजूदगी में अभियान चलाया जा रहा है. कई बार स्पेशल फोर्स के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है. जिस तरह से सोचना है मिल रही है और अभियान चलाया जा रहा है उम्मीद है कि जल्द ही नितेश यादव गिरफ्त में होगा. -किशोर कौशल, डीआईजी, पलामू.
बिहार के गया का रहने वाला है नितेश यादव, 40 से अधिक हत्याओं का आरोपी
नितेश यादव मूल रूप से बिहार के गया के डुमरिया के तरवाडीह गांव का रहने वाला है. नितेश यादव पर झारखंड और बिहार में 40 से अधिक लोगों की जान लेने का आरोप है. 2012-13 में पलामू के विश्रामपुर थाना क्षेत्र के कौड़िया गांव में नक्सली संगठन टीएसपीसी और भाकपा माओवादी के मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ में टीएसपीसी के 15 कमांडर मारे गए थे. नितेश यादव माओवादियों के दस्ते का नेतृत्व कर रहा था.
2016 में पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र के काला पहाड़ के इलाके में लैंड माइंस विस्फोट हुआ था. इस विस्फोट में पुलिस के सात जवान शहीद हुए थे, इस घटना में नितेश यादव की भूमिका थी. जुलाई 2016 में ही बिहार के गया औरंगाबाद सीमा पर माओवादियों ने कोबरा के जवानों पर हमला किया था. इस हमले में कोबरा बटालियन के 10 जवान शहीद हुए थे. नितेश यादव पर इसके अलावा कई बड़े घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है.
2010-11 में टीएसपीसी के चंगुल से बचा था नितेश
2010 -11 में पलामू चतरा सीमा पर माओवादी और टीएसपीसी के बीच मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ में माओवादियों के 10 कमांडर मारे गए थे जबकि टीएसपीसी ने 25 कमांडरों का अपहरण कर लिया था. इस घटना में नितेश यादव बच निकला था और धीरे-धीरे माओवादी संगठन में अपने कद को बढ़ाना शुरू किया. बाद में नितेश यादव माओवादियों का रीजनल कमांडर सदस्य बन गया. नितेश यादव का बिहार एवं झारखंड पुलिस ने संपत्ति का भी आकलन किया था. नितेश यादव को लेकर एनआईए ने भी मामला दर्ज किया था उसे लेकर कई इलाकों में छापेमारी भी किया था.
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