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नशामुक्त राजस्थान और साइबर अपराध पर लगाम के वादे के साथ पुलिस कांफ्रेंस का समापन

मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने कहा कि तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग के जरिए सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए.

DGP addressing the media
मीडिया को संबोधित करते डीजीपी (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 9, 2026 at 8:35 PM IST

4 Min Read
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जयपुर: राज्य स्तरीय पुलिस सम्मलेन का शुक्रवार को राजस्थान पुलिस अकादमी में समापन हुआ. प्रदेश के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास समापन समारोह के मुख्य अतिथि रहे. दो दिन तक इस सम्मलेन में विकसित भारत में पुलिसिंग और राजस्थान पुलिस का योगदान की थीम को लेकर चर्चा की गई. शुक्रवार को समापन के दिन अपराध अनुसंधान में फोरेंसिक क्षमता को बेहतर बनाने सहित अन्य विषयों पर मंथन हुआ.

जन आंदोलनों के दौरान पुलिसिंग पर व्याख्यान: डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि विभिन्न सत्रों में साइबर क्राइम, ट्रैफिक मैनेजमेंट, आतंरिक सुरक्षा, काउंटर टेरेरिज्म, नारकोटिक्स तस्करी जैसी चुनौतियों के लगातार बदलते स्वरूप और उन पर काबू पाने के प्रयासों को लेकर चर्चा की गई. इसके साथ ही आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा, क्राउड मैनेजमेंट और जन आंदोलनों के दौरान पुलिसिंग जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिया. युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति की गंभीर समस्या, इसकी चुनौतियां, निवारण और अनुसंधान के साथ ही पुनर्वास व जागरुकता को लेकर भी मंथन किया गया. पांचवे और अंतिम सत्र में वर्तमान परिदृश्य में विभिन्न आपदा, उनके प्रबंधन और चुनौतियों से निपटने को लेकर गहन विमर्श किया गया. इस सम्मलेन का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को किया था.

पुलिस कांफ्रेंस के समापन पर क्या बोले सीएस, देखें वीडियो (ETV Bharat Jaipur)

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अपराध अनुसंधान में फोरेंसिक साइंस पर चर्चा: सम्मलेन के दूसरे दिन शुक्रवार को पहले सत्र में पुलिस प्राथमिकताओं में अव्वल 'महिला सुरक्षा और उसमें प्रौद्योगिकी व तकनीक के प्रयोग' विषय पर व्याख्यान हुआ. दूसरे सत्र में 'जन आंदोलन का मुकाबला-एक पांरिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण की आवश्यकता' विषय पर व्याख्यान हुआ. तकनीक के दौर में अपराध अनुसंधान में फोरेंसिक के महत्व के मद्देनजर त्वरित अनुसंधान के लिए फोरेंसिक क्षमता को बेहतर करने और एनसीएल की पालना सुनिश्चित करने पर भी मंथन हुआ.

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डीजी-आईजी कांफ्रेंस के बिंदुओं की दी जानकारी: डीजीपी ने कहा कि साइबर अपराध आज सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर सामने है. इसलिए सम्मेलन I4C के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने साइबर अपराध पर विस्तृत जानकारी देते हुए इसकी पहचान व रोकथाम के तरीकों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में राजस्थान पुलिस का चालान प्रतिशत 32 फीसदी है. जो देश में सबसे अधिक है. उन्होंने इसे और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया. डीजी (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार अग्रवाल, एडीजी (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने डीजी-आईजी कांफ्रेंस के बिंदुओं के बारे में जानकारी दी.

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सीएस बोले-तकनीक से बनाएं बेहतर पुलिसिंग: उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकसित भारत में पुलिसिंग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस के सामने नए दौर में नई चुनौतियां हैं. नए कानूनों को प्राथमिकता के साथ लागू करते हुए आमजन को इनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जाए. तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग के जरिए सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि राजकॉप सिटीजन एप को आज 21 हजार लोग हर दिन इंस्टॉल कर रहे हैं. इसे और बेहतर बनाए जाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि तकनीक का पुलिसिंग में कैसे बेहतर उपयोग किया जा सकता है. इस पर भी दो दिन में गहन विमर्श किया गया है.

थानों के सुदृढ़ीकरण पर भी हुई चर्चा: मीडिया से बातचीत में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा, पुलिस अधिकारियों को व्यापक जानकारी देने के मकसद से अलग-अलग जगहों से विषय विशेषज्ञों को इस सम्मलेन में बुलाया गया था. उनके साथ एक सार्थक चर्चा की गई. थानों के सुदृढ़ीकरण के लिए भी इस सम्मलेन में विमर्श किया गया. प्रदेशभर में थानों को लेकर क्या व्यवस्था की जानी है. इसके बारे में जानकारी दी गई. विकसित भारत-2047 तक विकसित भारत के पीएम मोदी के संकल्प में पुलिसिंग का क्या रोडमैप होगा. इसे लेकर भी चर्चा की गई.