PMCH में मरीज के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों में मारपीट, विरोध में इमरजेंसी सेवा ठप
PMCH में मरीज के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों में मारपीट के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू किया, इमरजेंसी सेवा भी बंद. रिपोर्ट- कृष्णनंदन कुमार

Published : August 20, 2026 at 11:29 AM IST
|Updated : August 20, 2026 at 11:36 AM IST
पटना: पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी पीएमसीएच की इमरजेंसी में बुधवार देर रात मरीज के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद जमकर मारपीट हुई. आरोप है कि मरीज के परिजनों ने एक इंटर्न डॉक्टर के सिर पर रॉड से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. डॉक्टर के सिर पर गहरी चोट लगी और काफी खून भी बह गया है.
डॉक्टर के सिर पर दर्जनभर से अधिक टांके: घायल इंटर्न डॉक्टर को ICU में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार, उसके सिर पर दर्जनभर से अधिक टांके लगाए गए हैं और फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है. घटना के विरोध में गुरुवार सुबह से PMCH के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं.
इमरजेंसी और OPD सेवाएं प्रभावित: पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सत्यम कुमार ने बताया कि घटना के विरोध में अस्पताल की इमरजेंसी और OPD दोनों सेवाएं प्रभावित हुई हैं. सुबह से इमरजेंसी में नए मरीजों को भर्ती नहीं दिया जा रहा है, जबकि OPD में भी मरीजों की पर्ची नहीं काटी जा रही है.
क्या है डॉक्टरों की मांग: हड़ताल के कारण अस्पताल पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि उनकी प्राथमिक मांग अस्पताल परिसर में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और इमरजेंसी में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है.
5-6 परिजनों के पहुंचने पर हुआ विवाद: डॉ. सत्यम कुमार के मुताबिक, विवाद की शुरुआत इमरजेंसी में एक मरीज के साथ आए 5 से 6 परिजनों को लेकर हुई. उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में एक मरीज के साथ इतनी संख्या में परिजनों को रहने की अनुमति नहीं होती, क्योंकि इससे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इलाज करने में परेशानी होती है. डॉक्टरों ने सुरक्षा गार्ड को बुलाकर परिजनों को इमरजेंसी से बाहर कराया. आरोप है कि परिजनों ने इसे अपने ईगो से जोड़ लिया और कुछ समय बाद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए.
डॉक्टरों को जहां देखा, वहीं की मारपीट: जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष का आरोप है कि बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने इमरजेंसी के आसपास मौजूद डॉक्टरों के साथ मारपीट शुरू कर दी. इस दौरान जो भी डॉक्टर उन्हें नजर आया, उसके साथ मारपीट की गई. इसी दौरान एक इंटर्न डॉक्टर के सिर पर रॉड से हमला कर दिया गया.
"सिर में गंभीर चोट लगने के बाद डॉक्टर को तत्काल ICU में भर्ती कराया गया. अत्यधिक खून बहा है और उसके सिर पर दर्जनभर से अधिक टांके लगाए गए हैं. इमरजेंसी में काम करने वाले डॉक्टर लगातार दबाव में रहते हैं और पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने के कारण ऐसी घटनाओं का खतरा बना रहता है. डॉक्टरों ने मांग की है कि इमरजेंसी में अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की जाए, ताकि डॉक्टर बिना भय के मरीजों का इलाज कर सकें."-डॉ. सत्यम कुमार, अध्यक्ष, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन
संस्थागत FIR की मांग: डॉ. सत्यम कुमार ने बताया कि डॉक्टरों की पहली कोशिश है कि पीएमसीएच अधीक्षक की ओर से संस्थागत एफआईआर दर्ज कराई जाए. अधीक्षक डॉक्टरों के समर्थन में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद जब कुछ इंटर्न डॉक्टर स्थानीय टीओपी में शिकायत करने पहुंचे तो वहां उन्हें ही यह कहकर डांटा गया कि हमेशा जूनियर डॉक्टरों का ही झगड़ा क्यों होता है. जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने इस रवैये पर भी नाराजगी जताई है.
मरीजों की बढ़ी परेशानी: डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सुरक्षा और कार्रवाई को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रखने पर विचार किया जाएगा. घटना के बाद पीएमसीएच में इलाज व्यवस्था प्रभावित होने से बड़ी संख्या में मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. राज्य का सबसे बड़ा यह सरकारी अस्पताल है और बहुत दूर क्षेत्र से लोग यहां इलाज की उम्मीद में आते हैं.
पहले भी सामने आती रही हैं ऐसी घटनाएं: पीएमसीएच में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच मारपीट का यह कोई पहला मामला नहीं है. अस्पताल में आए दिन इलाज को लेकर विवाद, परिजनों की भीड़ और डॉक्टरों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं.
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