उत्तराखंड में खिलाड़ियों को 'आउट ऑफ टर्न' जॉब तो मिली, लेकिन खेल पर आया संकट, जानें कारण
उत्तराखंड में आउट ऑफ टर्न नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों को विभागीय जिम्मेदारियों के कारण अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए समय नहीं मिल रहा है

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 3, 2026 at 12:18 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में आउट ऑफ टर्न नौकरी पाने वाले कई खिलाड़ियों को विभागीय कार्यों और खेल के बीच संतुलन बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इससे उनके खेल करियर पर संकट के बादल छा रहे हैं. इस पर खेल विभाग और सरकार अब नीति बनाने की तैयारी में हैं.
आउट ऑफ टर्न नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों के सामने समस्या: उत्तराखंड सरकार राज्य को देवभूमि के साथ-साथ खेलभूमि बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें सुरक्षित भविष्य देने के लिए राज्य सरकार ने आउट ऑफ टर्न नौकरी योजना लागू की है. इस योजना के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति दी जा रही है. अब इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां सामने आने लगी हैं.
खिलाड़ियों को नौकरी के साथ नहीं मिल रहा अभ्यास का मौका: कई खिलाड़ियों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद विभागीय कार्यों का दबाव उनके खेल करियर को प्रभावित कर रहा है. उन्हें अभ्यास तथा प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है. राज्य के जाने-माने एथलीट और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके सूरज पंवार तथा अंकित रावत ने भी इस विषय पर अपनी चिंताएं साझा की हैं.
एक तरफ विभागीय ट्रेनिंग, दूसरी तरफ खेल प्रतियोगिताएं: सूरज पंवार वर्तमान में युवा कल्याण विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अंकित रावत वन विभाग में कार्यरत हैं. दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद खेल और कार्यालयी दायित्वों के बीच संतुलन बनाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है. सूरज पंवार ने बताया कि-
नौकरी के शुरुआती दिनों में मुझे ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जब एक ओर विभाग की ओर से प्रशिक्षण संबंधी आदेश थे और दूसरी ओर अपनी प्रतियोगिताओं और खेल गतिविधियों में भी भाग लेना था. ऐसे में मेरे सामने समय प्रबंधन की समस्या खड़ी हो गई थी. उस समय मैं मामले को विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में लाया, जिसके बाद समाधान निकाल लिया गया.
-सूरज पंवार, एथलीट-
विभागीय जिम्मेदारियों के साथ खेलना हो रहा मुश्किल: सूरज का मानना है कि अन्य विभागों में कार्यरत खिलाड़ियों को भी इसी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.वहीं अंकित रावत का कहना है कि-
वन विभाग में कार्य करते हुए मुझे विभागीय जिम्मेदारियों और खेल गतिविधियों के बीच सामंजस्य बैठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. खिलाड़ियों को नौकरी देने का उद्देश्य उनके खेल करियर को आगे बढ़ाना होना चाहिए, लेकिन यदि उन्हें पर्याप्त समय और सुविधाएं नहीं मिलती हैं, तो उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है.
-अंकित रावत, एथलीट-
खेल निदेशक ने माना समस्या है: इस पूरे मुद्दे को खेल विभाग ने भी गंभीरता से लिया है. खेल निदेशक दीप्ति सिंह ने स्वीकार किया कि यह वास्तव में एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक समस्या है. उन्होंने कहा कि-
यदि कोई खिलाड़ी नौकरी मिलने के बाद अपने खेल को ही जारी नहीं रख पाता है, तो यह चिंता का विषय है. राज्य सरकार खिलाड़ियों को सम्मान और सुरक्षा देने के उद्देश्य से नियुक्तियां कर रही है. इसलिए यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनका खेल प्रभावित न हो.
-दीप्ति सिंह, खेल निदेशक-
मंत्री और खेल सचिव के संज्ञान में लाया गया मामला: दीप्ति सिंह ने बताया कि इस विषय को विभागीय मंत्री के संज्ञान में लाया जा चुका है. विशेष सचिव खेल भी इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि विभाग स्तर पर इस दिशा में नीति तैयार करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि खिलाड़ियों को अपने विभागीय कार्यों और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन बनाने का अवसर मिल सके. विभाग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल करियर पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
खेल मंत्री भी खिलाड़ियों की बात से सहमत: उधर खेल मंत्री रेखा आर्या ने भी माना कि आउट ऑफ टर्न नियुक्तियों से जुड़े कुछ मुद्दे अभी कार्मिक स्तर पर लंबित हैं. उन्होंने कहा कि-
खेल विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि खिलाड़ियों को अधिक से अधिक खेल एवं युवा कल्याण विभाग में ही नियुक्ति दी जाए, ताकि वे खेल वातावरण में रहकर अपनी तैयारी जारी रख सकें. अब तक जिन खिलाड़ियों को वन विभाग, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य विभागों में नियुक्ति मिली है, वहां से कई प्रकार की व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं. विभाग के संज्ञान में यह बात आई है कि कई स्थानों पर खिलाड़ियों पर खेल गतिविधियों की तुलना में विभागीय कार्यों का अधिक दबाव रहता है.
-रेखा आर्या, खेल मंत्री-
ऐसे निकाला जा रहा समाधान: रेखा आर्या ने कहा कि कई खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने, प्रशिक्षण शिविरों में जाने और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए समय पर अवकाश भी नहीं मिल पाता. उन्होंने कहा कि कई मामलों में खिलाड़ियों को अपने उच्च अधिकारियों अथवा खेल विभाग के समक्ष शिकायत करनी पड़ती है. इसके बाद संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान निकाला जाता है.
सरकार खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न नियुक्ति के विज्ञापन जारी करने वाली है: खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि खिलाड़ियों को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, जहां वे नौकरी की सुरक्षा के साथ-साथ अपने खेल करियर को भी पूरी तरह जारी रख सकें. रेखा आर्या ने बताया कि सरकार भविष्य में होने वाली आउट ऑफ टर्न नियुक्तियों को लेकर भी तैयारी कर रही है. विभाग की कोशिश है कि नए खिलाड़ियों को उनके अनुकूल वातावरण में नियुक्ति मिले. इस संबंध में जल्द ही आवश्यक विज्ञप्ति जारी करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने संकेत दिए कि अगस्त या सितंबर माह तक आउट ऑफ टर्न नियुक्तियों के लिए नए विज्ञापन जारी किए जा सकते हैं.
अब तक आउट ऑफ टर्न 29 खिलाड़ियों को मिली नौकरी, 243 कर रहे इंतजार: गौरतलब है कि उत्तराखंड में अब तक इस योजना के तहत कुल 29 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिल पाई है. इनमें खेल विभाग में 2, युवा कल्याण विभाग में 5, पुलिस विभाग में 9 और वन विभाग में 13 खिलाड़ियों को नियुक्ति दी गई है. हालांकि राज्य में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले करीब 243 अन्य खिलाड़ी अभी भी आउट ऑफ टर्न नौकरी का इंतजार कर रहे हैं.
ऐसे में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है कि नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों को खेल जारी रखने के लिए अनुकूल माहौल मिले. यदि सरकार और विभाग इस दिशा में प्रभावी नीति तैयार करने में सफल होते हैं, तो यह न केवल खिलाड़ियों के हित में होगा, बल्कि उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.
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