हाइट :खेल के मैदान से आम जीवन तक, वरदान या अभिशाप ?
कई राज्यों से वाराणसी आए खिलाड़ियों और उनके कोच की लंबाई भी देखकर लोग सरप्राइज्ड है. वहीं खिलाड़ी उसके एडवांटेज और डिसएडवांटेज गिना रहे.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 2:11 PM IST
|Updated : January 8, 2026 at 5:53 PM IST
वाराणसी (गोपाल मिश्र): स्पोर्ट्स के लिए फिजिकल स्ट्रैंथ बहुत जरूरी है. खिलाड़ी होने के नाते चाहे लड़का हो या लड़की अपनी फिजिक को मेंटेन रखने के लिए पसीना बहता है, लेकिन कुछ गेम ऐसे हैं, जिसमें आपकी फिजिकल स्ट्रैंथ के साथ आपकी लंबाई आपके लिए वरदान साबित होती है. ऐसे ही गेम वॉलीबॉल और बास्केटबाल जैसे स्ट्रैंथ वाले गेम माने जाते हैं. बनारस में चल रही 72वीं नेशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता में ऐसी ही लंबाई का अद्भुत मेल, खेल के साथ देखने को मिल रहा है.
यहां पर देश के हर हिस्से से आए खिलाड़ियों की फिजिकल स्ट्रैंथ के साथ उनकी लंबाई इस टूर्नामेंट में बनारस और आसपास के लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी है, क्योंकि अलग-अलग राज्यों से आए खिलाड़ियों की लंबाई 6 फीट 2 इंच से लेकर 6 फीट 9 इंच तक है. खिलाड़ियों के साथ उनके कोच की लंबाई भी देखकर लोग सरप्राइज्ड है. हालांकि सबसे महत्वपूर्ण होता है लंबाई को मेंटेन करना और उसके एडवांटेज और डिसएडवांटेज को समझना. ऐसा इसलिए है, क्योंकि लंबा होना भारत में बेहद फायदे का सौदा है. खासकर वॉलीबॉल जैसे खेल में इसका असर साफतौर पर दिखता है.
दूसरी ओर अच्छी लंबाई होने पर आपके सामाजिक जीवन में इसका कुछ दुष्प्रभाव भी होता है. इसको लेकर ईटीवी भारत ने यहां आने वाले खिलाड़ियों और कोच से बात की. ये लोग इस लंबाई को किस तरह से वरदान मानते हैं और किस तरह से उनके लिए यह कई जगह परेशानी का सबक बनती है. यह सब बातें खिलाड़ियों और कोच से बातचीत में सामने आई है.

लंबाई खिलाड़ियों के लिए वरदान या अभिशाप?
खेल के मैदान से आमजीवन तक फिजिकल स्ट्रैंथ का होना बहुत फायदे का सौदा माना जाता है, वैसे भी अब लोग अपने फिजिकल स्ट्रैंथ पर बेहद ध्यान दे रहे हैं. कोविड के बाद तो लोग अपने रूटीन में बदलाव करते हुए अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए तरह-तरह के प्रयास भी करते हैं. ऐसे में व्यक्तियों के जीवन में ज्यादा लंबा होना या फिर छोटा होना कई बार फायदे और घाटे दोनों का सौदा हो जाता है.

खासतौर पर शारीरिक लंबाई का फायदा विशेष रूप से खेल के संदर्भ में ज्यादा मिलता है. जहां यह एक स्पष्ट लाभ प्रदान करता है, लेकिन दैनिक जीवन में चुनौतियों का भी कारण बनता है.
शारीरिक लंबाई व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं, विशेषकर खेल में, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, और ऊंची कूद जैसे खेलों में, लंबी कद-काठी वाले खिलाड़ी स्वाभाविक रूप से फायदे की स्थिति में होते हैं.

वाराणसी में चल रहे नेशनल वॉलीबॉल टूर्नामेंट में 6 फीट 7 इंच से 6 फीट 9 इंच तक के खिलाड़ी चर्चा का विषय बने हैं, जो यह साबित करता है कि खेल में लंबाई एक निर्णायक कारक है. वॉलीबॉल में, ब्लॉकिंग और स्मैशिंग (स्पाइकिंग) के लिए अधिक पहुंच (Reach) मिलती है. इससे स्कोरिंग और डिफेन्स आसान हो जाता है.

इस बारे में इंडियन वालीबॉल टीम के पूर्व कप्तान और इंडियन वालीबॉल टीम के सिलेक्टर और इंटरनेशनल वॉलीबॉल प्लेयर गुरिंदर सिंह का कहना है कि इस खेल में लंबी काया अक्सर विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाती है.

उनका कहना है कि "मैं 20 वर्षों से भी ज्यादा वक्त तक इंडियन वालीबॉल टीम में रहा और कप्तान के साथ अपनी टीम को फिजिकल स्ट्रैंथ भी देता था. मेरी लंबाई 6 फीट 7 इंच से भी ज्यादा है. जिसका मुझे इस खेल में पूरा फायदा मिला. उन्होंने कहा कि जिनकी लंबाई अच्छी होती है. वह अच्छे खिलाड़ी और बाद में सफल कोच बन जाते हैं. जहां उनकी कद-काठी उनका प्रभाव बनाए रखने में मदद करती है."
वहीं दिल्ली वॉलीबॉल टीम के हेड कोच और इंटरनेशनल वॉलीबॉल प्लेयर किरण पाल राणा का कहना है कि "लंबाई और अच्छी फिजिक के युवा यह ना समझें कि सिर्फ अब भारत में खेलने के लिए ही कैरियर बनता है, बल्कि वह अलग-अलग रूप में अलग-अलग सर्विसेज के साथ जुड़कर अपना कैरियर बना सकते हैं. कोच बनना फिटनेस ट्रेनर बनना टीम के साथ जुड़कर फिजियोथैरेपिस्ट बनना या फिर स्पोर्ट्स के इक्विपमेंट तैयार करने वाली कंपनियों के साथ जुड़ना किसी भी सेक्टर में अब लंबे ऊंचे खिलाड़ियों की अच्छी डिमांड है."

उन्होंने कहा, "मैं भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बिलॉन्ग करता हूं. मैं जब युवा था, तो मेरे पास लंबाई के अलावा कुछ नहीं था. उस वक्त कुछ वॉलीबॉल खिलाड़ियों की नजर मेरे ऊपर पड़ी और उन्होंने मुझे प्रैक्टिस शुरू करवाई. देखते ही देखते मैं इस खेल में आया और इंटरनेशनल लेवल तक खेल कर अब हेड कोच बन चुका हूं और दिल्ली पुलिस में नौकरी भी कर रहा हूं."
राणा का कहना है की लंबाई का बहुत सा फायदा खेलों में होता है, लेकिन कई जगह इसका नुकसान भी देखने को मिला. खासतौर पर दैनिक जीवन में, लेकिन वह आदत में शामिल हो जाता है.
वहीं हरियाणा वॉलीबॉल टीम के प्लेयर उमेश सिंह का कहना है कि, "हमारे लिए हमारी यह लंबाई खेलों के लिए वरदान है. हां कभी-कभी दैनिक जीवन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. जिसमें ट्रांसपोर्ट के दौरान या फिर कहीं जाने पर होटल या टूर्नामेंट में बेड छोटे पडने जैसी समस्याएं आती हैं, लेकिन हम मैनेज करते हैं और चीज खुद-ब-खुद हमारे पक्ष में होती हैं."
अधिक लंबाई से प्लेयर को नुकसान
लंबे शरीर वालों को सामान्य कारों, ट्रेनों या हवाई जहाज की सीटों में लेग स्पेस की कमी महसूस होती है. घरों में सामान्य दरवाजे की कम ऊंचाई उनको परेशान करती है. बाथरूम में लगे छोटे शावरहेड मुसीबत का सबब बनते हैं. इतना ही नहीं छोटे बिस्तर परेशान करते हैं.
लंबाई क्या शारीरिक गतिविधियों पर भी असर डालती है? इस बारे में फिजियोथेरेपिस्ट पंकज सिंह का कहना है अगर खिलाड़ी है तो निश्चित तौर पर उसे फिटनेस पर ध्यान देना और अपनी लंबाई के हिसाब से अपने शारीरिक गतिविधियों को मेंटेन रखना जरूरी है. उनका कहना है कि वॉलीबॉल या बास्केटबॉल जैसे खेल में आपके पैरों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है.
उन्होंने बताया कि शारीरिक गतिविधियों में पैरों की हड्डियों और नसों का मजबूत होना बेहद जरूरी है. इसलिए नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज करना अनिवार्य है. यदि वह खिलाड़ी नहीं है और लंबाई ज्यादा है, तो उसको अपने फिजिकल एक्टिविटी को रूटीन में शामिल करना होगा, क्योंकि हड्डियों के स्ट्रैंथ ज्यादा होने पर लंबाई नुकसान भी करती है. पैरों खासतौर पर घुटने और रेडियो में दर्द (एड़ी में पेन) जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं. कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि बहुत अधिक लंबाई पीठ दर्द या फ्रोजन शोल्डर की स्थिति बनती है.
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