“चंदा चकोर” ने जीता नक्सलगढ़ का दिल, बदलते बस्तर की तस्वीर पर्दे पर उतरी
सरेंडर नक्सलियों को जब शासन ने सम्मान के साथ प्रोत्साहन राशि दी तो लोगों की आंखें भर आई.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : May 28, 2026 at 2:12 PM IST
|Updated : May 28, 2026 at 2:22 PM IST
नारायणपुर: बस्तर नक्सलमुक्त हो चुका है. नक्सलमुक्त बस्तर की तस्वीर को बदलने की कोशिशें लगातार जारी है. इसी कड़ी में बुधवार को एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) के सहयोग के एक नाटक का मंचन एजी सिनेमा हॉल में किया गया जिसका टाइटल था, चंदा चकोर. इन नाटक के जरिए छत्तीसगढ़ और खासकर बस्तर की समृद्ध संस्कृति को दिखाया गया. नाटक के जरिए ये बताया गया कि बस्तर के लोग कितने प्रकृति प्रेमी और जीवट होते हैं.
क्या है चंदा चकोर की कहानी
नाटक की कहानी अबूझमाड़ के एक अविकसित गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित है. जिसमें चंदा और चकोर की प्रेम कथा के माध्यम से गांव से संसद तक विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था का संदेश दिया गया. मंचन में आदिवासी देवी-देवताओं की आस्था, विवाह परंपराएं, मेला-मड़ई, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और जनजातीय संस्कृति का अत्यंत जीवंत चित्रण किया गया है. कलाकारों ने शिक्षा, सामाजिक परिवर्तन और लोकतंत्र की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया. खास बात यह रही कि नाटक का मंचन आत्मसमर्पित नक्सली युवा-युवतियों एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा.
12 करोड़ 29 लाख के विकास कार्यों की सौगात
नाट्य मंचन के बाद डिप्टी सीएम और वन मंत्री ने इलाके के समग्र विकास के लिए 12 करोड़ 29 लाख के विकास कार्यों की सौगात जनता को दी. इस मौके पर खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया. डिप्टी सीएम अरुण साव ने सरेंडर नक्सलियों को इस मौके पर प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित भी किया. अरुण साव ने कहा कि बस्तर के आदिवासी अंचलों का विकास करना सरकार की पहली प्राथमिकताओं में शामिल है. मंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क पर काम तेजी से किया जा रहा है. युवाओं को रोजगार मिले इसकी भी कोशिशें जारी हैं.

बस्तर के सुदूर ग्रामीण अंचलों का विकास करना हमारी पहली प्राथमिकता है: उपमुख्यमंत्री अरुण साव
ऐसे नाटकों का मंचन भविष्य में भी होते रहना चाहिए. हमारी संस्कृति और सभ्यता से देश और दुनिया वाकिफ हो इसके लिए हम लगातार प्रयास भी कर रहे हैं: केदार कश्यप, मंत्री

तीस साल से मैं रंगमंच कर रहा हूं. इस नाट्य मंचन में हमने यहां के लोगों को 30 दिन तक प्रशिक्षण दिया. इस मंचन में सरेंडर नक्सलियों को भी शामिल किया गया: हीरा मानिकपुरी, निर्देशक "चंदा चकोर"
मैं लोक गायिका और थियेटर की कलाकार हूं. गांव के लोगों को हमने यहां ट्रेंड किया. ट्रेनिंग के बाद यहां के लोगों ने जिस तरह से नाटक पेश किया उसकी सभी तारीफ कर रहे हैं: गरिमा दिवाकर, लोक गायिका
मैं पहली बार नाटक के कलाकार के रूप में भाग ले रहा हूं. मुझे काफी अच्छा लग रहा है, आगे भी मौका मिला तो मैं इस तरह के आयोजन में शामिल होना चाहूंगा. मैं नक्सली संगठन में था लेकिन बात में मैं समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गया. नक्सली संगठन में गीतों के जरिए मनोरंजन किया जाता था: लालू बेंजाम, आत्मसमर्पित नक्सली

मैं सोनपुरा गांव का रहने वाला हूं. चंदा चकोर नाटक में एक गांव है जहां सभी सुविधाएं हैं. नाटक के जरिए ये बताया गया है कि बाकी दूसरे गांवों तक कैसे सुविधाओं को पहुंचाया जाए: जितेंद्र कुमार, स्थानीय युवक
मुझे चंदा का रोल मिला है, इस तरह के आयोजन आगे भी होते रहना चाहिए. ट्रेनिंग के बाद हमारे भीतर की झिझक खत्म हो चुकी है: कनेश्वरी, स्थानीय युवती
गांव में किस तरह के सांस्कृतिक आयोजन होते हैं उसे यहां नाटक के जरिए दिखाया जा रहा है: आत्मसमर्पित महिला नक्सली
करियर गाइडेंस कार्यक्रम का आयोजन
उप मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा आयोजित 5 दिवसीय कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और स्कूली बच्चों एवं युवाओं का हौसला बढ़ाया. उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन से नारायणपुर के युवा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं. कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि “चंदा के चकोर” जैसी प्रस्तुतियां जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी संदेश देती हैं. उन्होंने सभी कलाकारों और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी.

