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अलवर की नर्सरियों में तैयार पौधों की दिल्ली में डिमांड, राजस्थानी प्रजाति के पौधे कर रहे राष्ट्रीय राजधानी को हरा भरा

दिल्ली से जिन पौधों की डिमांड है, उनमें अरावली पर्वतमाला के हिसाब से तैयार किए जाने वाले पौधों की मांग ज्यादा है.

Saplings being prepared at the Alwar Forest Division nursery.
अलवर वन मंडल की नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे (ETV Bharat Alwar)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 27, 2026 at 2:13 PM IST

4 Min Read
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अलवर: राजधानी दिल्ली की अरावली पहाड़ियों को हरा भरा कर प्रदूषण पर नियंत्रण में अलवर के वन विभाग की बड़ी भूमिका रही है. अलवर वन मंडल अपनी नर्सरियों में धोक, खेजड़ी, खैर, गूलर, सालार, कदम, अर्जुन, नीम सहित कई राजस्थानी प्रजाति के पौधे तैयार कर दिल्ली के बायोलॉजिकल पार्क, दिल्ली यूनिवर्सिटी सहित कई अन्य बड़े शैक्षिक संस्थानों में भिजवा रहा है. बीते दो साल में अलवर वन मंडल करीब 80 हजार पौधे भिजवा चुका है. इस साल 10 हजार पौधे और​ भिजवाने का लक्ष्य है. इससे दिल्ली क्षेत्र में अरावली की वनस्पतियों का संरक्षण होने के साथ ही दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की समस्या से राहत मिलेगी.

अलवर वन मंडल के एसीएफ पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मंडल की नर्सरियों में तैयार हो रहे राजस्थानी प्रजाति के पौधों की डिमांड अब दिल्ली में तेजी से बढ़ रही है. पिछले दो-तीन साल से लगातार दिल्ली में अलवर से पौधे भेजे गए. दिल्ली से जिन पौधों की डिमांड है, उनमें अरावली पर्वतमाला के हिसाब से तैयार किए जाने वाले पौधों की मांग ज्यादा है. एसीएफ शेखावत ने बताया दिल्ली में भेजे जाने वाले राजस्थानी प्रजाति के पौधों में धोक, खैर, खेजड़ी, करंज, गूलर, सालार, जंगल जलेबी, अमलतास, अर्जुन, बेर, इमली, बबूल, बरगद, बीलपत्र, सतनार, पीपल, नीम, शीशम सहित विभिन्न प्रजातियां के पौधों की डिमांड ज्यादा है.

अलवर वन मंडल के एसीएफ पुष्पेंद्र सिंह शेखावत बोले... (ETV Bharat Alwar)

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इस साल 10 हजार पौधे भेजने का लक्ष्य: वन मंडल के एसीएफ पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि अलवर वन मंडल से दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस बार राजस्थानी प्रजाति के 10 हजार पौधे तैयार कर भेजने का लक्ष्य है. गत वर्षों में भी अलवर वन मंडल की ओर से दिल्ली के शैक्षिक संस्थानों में बड़ी संख्या में राजस्थानी प्रजाति के पौधे भेजे हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा दिल्ली आईआईटी, जेएनयू सहित भिवाड़ी के रीको व हरियाणा के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की ओर से भी राजस्थानी प्रजाति के पौधों की डिमांड है. मंडल में पौधे तैयार करने का कार्य जारी है. इससे समय पर पौधे तैयार कर डिमांड के अनुसार दिल्ली व अन्य प्रदेशों में भेजे जा सकेंगे.

24 लाख से ज्यादा पौधे होंगे तैयार: एसीएफ शेखावत ने बताया कि अलवर वन मंडल की नर्सरियों में इस साल 24 लाख 20 हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं. पौधों को तैयार करने का काम अलवर वन मंडल की 20 नर्सरी में किया जा रहा है. इसमें मुख्य रूप से अरावली संरक्षण संबंधित प्रजातियां, फलदार, फूलदार प्रजातियां के पौधे शामिल हैं. इनको तैयार कर मानसून से पहले मांग अनुसार भिजवाएंगे. इससे मानसून के दौरान पौधे रोपकर उनकी देखभाल की जा सकेगी.

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भिवाड़ी रीको की 2 लाख पौधों की डिमांड: एसीएफ पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि दिल्ली के साथ ही भिवाड़ी के रीको की ओर से भी अलवर वन मंडल को पौधों की डिमांड मिली है. विभिन्न प्रजातियों के करीब 2 लाख पौधे भिजवाने की रीको भिवाड़ी की ओर से मांग मिली. इसके लिए अलवर वन मंडल की नर्सरियों में पौधे तैयार किए जा रहे हैं. आगामी समय में कई और प्रदेशों व विभागों की ओर से भी पौधों की डिमांड मिलने की उम्मीद है.

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की समस्या होगी कम: अलवर वन मंडल की ओर से भेजे पौधों को दिल्ली क्षेत्र में अरावली की पहाड़ी एवं बड़े शैक्षिक संस्थानों व बायोलॉजिकल पार्क में रोपे जाएंगे. इससे दिल्ली क्षेत्र में हरियाली को बढ़ावा मिल सकेगा. इससे दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरण में सुधार हो सकेगा. दिल्ली व एनसीआर के अनेक क्षेत्र लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब अरावली पहाड़ी का पौधे लगाकर संरक्षण करने के साथ ही दिल्ली क्षेत्र में हरियाली बढ़ाकर प्रदूषण की समस्या से लोगों को निजात दिलाई जा सकेगी.

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